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आईआईटी के साथ मिलकर एम्स ने बनाए विशेष जूते और छड़ी

Thu, 07 Nov 2019 05:18 AM IST
दुष्यंत शर्मा परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 07 Nov 2019 05:18 AM IST
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AIIMS made special shoes and stick with IIT
demo pic - फोटो : file photo

वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य को लेकर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) कई बड़े अध्ययन कर चुका है। अब दिल्ली एम्स ने आईआईटी के साथ मिलकर एक ऐसी छड़ी और जूते तैयार किए हैं जिनमें विशेष प्रकार का सेंसर लगा हुआ है। इनका इस्तेमाल नॉर्डिक वॉकिंग के लिए किया जाएगा। 

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एम्स के जीरिएट्रिक मेडिसिन विभाग की ओर से जल्द ही नॉर्डिक वॉकिंग पर एक अध्ययन शुरू होने वाला है, जिसे भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की ओर से बजट भी मिला है। एम्स के वरिष्ठ डॉ. प्रसून चटर्जी की निगरानी में ये अध्ययन शुरू होगा। 
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इसमें वरिष्ठ नागरिक भी शामिल हो सकते हैं। एम्स के डॉक्टरों ने अध्ययन में शामिल होने के लिए दिल्ली के बुजुर्गों को आमंत्रण भी दिया है। इन्हें घर से एम्स तक निशुल्क यातायात सुविधा भी मिलेगी।  
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दरअसल, वॉकिंग (घूमना) का ही एक नया रूप नॉर्डिक वॉकिंग है, जिसमें दोनों हाथ में छड़ी का सहारा लेकर वॉकिंग की जा सकती है। अभी तक भारतीय बाजार में नॉर्डिक वॉकिंग को लेकर कई तरह की अत्याधुनिक छड़ी आदि उपलब्ध भी हैं। कुछ राष्ट्रीय स्तर पर नॉर्डिक वॉकिंग को लेकर संगठन भी बने हैं, जो सोशल मीडिया पर इसके लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाते रहते हैं। 

सेंसर देगा शरीर के बैलेंस की जानकारी
एम्स प्रबंधन के अनुसार, इफेक्ट ऑफ स्मार्ट नॉर्डिक वॉकिंग ट्रेनिंग ऑन मोबिलिटी इंडिपेंडेंस इन कम्यूनिटी एल्डरली विषय पर एक पायलट अध्ययन किया जाएगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इसमें 60 या उससे अधिक आयु वर्ग के वरिष्ठ नागरिक भाग ले सकते हैं। आईआईटी के साथ मिलकर इस अध्ययन के लिए पोल्स (छड़ी) और जूते तैयार किए हैं। 

इनमें सेंसर लगे हैं, जो मांसपेशियों के अलावा गति आदि के बारे में जानकारी देते रहेंगे। अध्ययन के दौरान एम्स के फिजियोथेरेपिस्ट्स की निगरानी में वरिष्ठ नागरिक इन विशेष जूते और छड़ी के साथ स्मार्ट नॉर्डिक वॉकिंग करेंगे। इसमें शामिल होने के लिए न्यू प्राइवेट वार्ड के भूतल स्थित विभाग के कमरा नंबर 3 में संपर्क किया जा सकता है।


घूमने की गति बढ़ा सकता है नॉर्डिक वॉकिंग
दिल्ली एम्स ने पिछले वर्ष ही नॉर्डिक वॉकिंग पर एक अध्ययन भी किया था। इसमें 66 वरिष्ठ नागरिकों को शामिल किया था। इस अध्ययन के अनुसार वरिष्ठ नागरिकों के लिए नॉर्डिक वॉकिंग सामान्य की तुलना में ज्यादा बेहतर है। क्योंकि, दोनों हाथ में छड़ी होने से उनके कूल्हे और घुटनों पर भार कम पड़ता है और गति में बढ़ावा भी मिलता है। इसके अलावा हाथ और पैरों की मसल्स पावर बढ़ती है और घूमते वक्त उनके शरीर का बैलेंस भी बना रहता है।

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