एम्स निदेशक पद के नाम के चयन में कौन सी प्रक्रिया का होता है पालन : PMO
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक पद के तय किए गए नाम के संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय से कुछ सवाल पूछे गए हैं।
निदेशक पद के लिए भेजे गए नाम को चुनने में जिस प्रक्रिया का पालन किया गया है, उसकी जानकारी भी मांगी है। एम्स के कुछ वरिष्ठ चिकित्सकों ने प्रधानमंत्री कार्यालय में इस बात की शिकायत की थी कि निदेशक पद पर चयनित नाम में वरिष्ठता को नजर अंदाज किया गया है।
एम्स निदेशक के लिए सर्च कम सेलेक्शन कमेटी ने तीन नाम तय करके एम्स की इंस्टीट्यूट बॉडी को भेज दिया गया था। जिसके बाद इस नाम को अंतिम फैसले के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली अप्यांटमेंट कमेटी ऑफ कैबिनेट (एसीसी) को भेज दी गई थी।
संभव है अभी एम्स के निदेशक का नाम तय होने में और देरी हो
जिसके बाद कुछ आवेदकों की ओर से शिकायत की गई थी। संभव है अभी एम्स के निदेशक का नाम तय होने में और देरी हो। 31 जनवरी को एम्स के निवर्तमान निदेशक डॉ.एम.सी.मिश्रा सेवानिवृत्त हो गए थे।
सर्च कम सेलेक्शन कमेटी एम्स के पीडियाट्रिक्स विभाग के प्रमुख डॉ. वी.के.पॉल, पल्मोनरी मेडिसिन और स्लीप डिसऑडर के प्रमुख डॉ.रणदीप गुलेरिया और कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. बलराम भार्गव के नाम भेजे गए थे।
हालांकि कमेटी ने कुछ अन्य नामों पर चर्चा की थी और इसकी जानकारी भी एम्स की इंस्टीट्यूट बॉडी को भेज दी गई थी। निदेशक पद के लिए कुल 53 चिकित्सकों ने आवेदन किया था जिसमें 18 एम्स से थे और 35 देश के अलग-अलग चिकित्सीय संस्थानों से थे।
एम्स के ईएनटी विभाग के प्रमुख डॉ. एस.सी.शर्मा, एम्स के पैथोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ.एस.के.पांडा और मानेसर स्थित नेशनल ब्रेन रिसर्च सेंटर (एनबीआरसी) के निदेशक के नाम न होने पर भी सवाल खड़े किए गए हैं।