फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Agnipath scheme delhi high court reject petition filed against agnipath scheme says its correct

Delhi HC: अग्निपथ योजना को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज, कोर्ट ने कहा- इसमें दखल देने की कोई वजह नहीं

Tue, 28 Feb 2023 04:24 AM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Tue, 28 Feb 2023 04:24 AM IST
सार

केंद्र सरकार द्वारा सेना में भर्ती के लिए लाई गई अग्निपथ योजना के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका डाली गई थी।

विज्ञापन
Agnipath scheme delhi high court reject  petition filed against agnipath scheme says its correct
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने सेना में भर्ती के लिए केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना को वैध करार दिया है। इसे चुनौती देने वाली सभी 23 याचिकाएं खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा, राष्ट्रहित में बनी यह योजना सेना को ज्यादा सक्षम बनाती है। हमें इसमें हस्तक्षेप की कोई वजह नजर नहीं आती।
विज्ञापन

 
हाईकोर्ट ने पूर्व में जारी विज्ञापनों के तहत सशस्त्र सेनाओं में हो रही भर्ती प्रक्रिया को लेकर दायर याचिकाएं भी खारिज कर दीं। कहा, अभ्यर्थी भर्ती का अधिकार नहीं मांग सकते। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सतीशचंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने सोमवार को पक्षकारों और केंद्र को सुनने के बाद 15 दिसंबर को अपना निर्णय सुरक्षित रखा था। इस मामले में केरल, पंजाब, हरियाणा, पटना, उत्तराखंड स्थित हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दायर हुई थीं। सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें दिल्ली हाईकोर्ट स्थानांतरित करने या उच्च अदालत का निर्णय आने तक लंबित रखने का आदेश दिया था।
विज्ञापन


उम्र में छूट: 10 लाख अभ्यर्थियों को लाभ 
कोर्ट को एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी और स्थायी अधिवक्ता हरीश वैद्यनाथन ने बताया कि यह योजना रक्षा क्षेत्र की भर्तियों के लिहाज से सबसे बड़ा बदलाव है। उम्र में दी गई दो साल की छूट से दस लाख अभ्यर्थियों को लाभ हुआ। कई अन्य निर्णय भी हुए, जिन्हें हलफनामे में बताने की जरूरत नहीं, पर सरकार ने अच्छे इरादे से काम किया है। केंद्र सरकार ने बताया, अग्निपथ नीति जारी करने से पहले इसे लेकर बड़े स्तर पर अध्ययन हुए। इसे हल्के ढंग से नहीं लिया गया। योजना को लेकर केंद्र सरकार पूरी तरह सजग और जानकार है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


अग्निवीर सिपाही से नीचे होंगे 
केंद्र ने साफ किया कि अग्निवीर अलग काडर है। यह सिपाही से नीचे की रैंक होगी।

बदलती सैन्य जरूरतों का ध्यान : केंद्र 
केंद्र ने कहा, अग्निपथ नीतिगत निर्णय है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा की वजहों से लिया गया है। पूर्व में जारी भर्ती में शामिल अभ्यर्थियों को कोई नुकसान नहीं हुआ है। सशस्त्र सेनाओं में भर्ती अन्य सरकारी पदों पर भर्ती से अलग है। यह सरकार का अनिवार्य संप्रभु कार्य है, जो देश की रक्षा से जुड़ा है। रक्षा क्षेत्र को ज्यादा मजबूत और अभेद्य बनाने व बदलती सैन्य जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अपना संप्रभु दायित्व निभाया है। केंद्र ने कहा, सुरक्षा और अखंडता को कुशलता से बनाए रखने के लिए वह नीतियां बदलने की शक्ति रखती है। इसमें सशस्त्र सेनाओं में तैनाती पाने वालों के लिए सेवा शर्तें और प्रक्रिया बदलना शामिल है। 

जिन्हें समस्या, अग्निपथ में शामिल न हों
याचिकाकर्ताओं से हाईकोर्ट ने सवाल किया कि इसकी वजह से उनके किन अधिकारों का हनन हो रहा है? यह स्वैच्छिक योजना है, जिन्हें समस्या है, वे इस योजना से सेना में भर्ती न हों। साथ ही, कहा कि जज सैन्य मामलों के विशेषज्ञ नहीं हैं। इसे थल, नौसेना व वायुसेना के विशेषज्ञों ने बनाया है।

क्यों लाई गई अग्निपथ योजना? 
अग्निपथ योजना समय की जरूरत है। भारत के आसपास माहौल बदल रहा है। बदलते समय के साथ सेना में बदलाव जरूरी है। इसे एक नजरिए से देखने की जरूरत है। अग्निपथ अपने आप में एक स्टैंडअलोन योजना नहीं है। 2014 में जब पीएम मोदी सत्ता में आए, तो उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक भारत को सुरक्षित और मजबूत बनाना था। ये योजना उसी का एक हिस्सा है।

सेना को क्या फायदा मिलेगा?
देश को सुरक्षित करने के लिए तकनीक, हाईटेक हथियार, सिक्योर डिफेंस कम्युनिकेशन के क्षेत्र में काफी काम हुआ है। हमने नई-नई तकनीक का प्रयोग शुरू किया है। यहां तक की हमने स्पेस पॉवर में भी बड़ी सफलता हासिल की है। इसको ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए हमें ज्यादा से ज्यादा युवाओं की जरूरत पड़ेगी जो तकनीक के मामले में दक्ष होते हैं। अग्निपथ योजना इसी का एक हिस्सा है। इससे हमें बड़ी संख्या में टेक फ्रेंडली युवा मिलेंगे।

चार साल बाद क्या करेंगे अग्निवीर? 
2022-23 वर्ष का युवक चार वर्ष अग्निवीर के रूप में गुजारकर जॉब मार्कट में आया है। उसकी तुलना उस युवक से कीजिए जो अग्निवीर नहीं बना। जो अग्निवीर अपने प्रतिस्पर्धी के मुकाबले हर मोर्चे पर आगे रहेगा। इसलिए उसके पास कोई रास्ता बंद नहीं हुआ है। उसके पास करीब 11 लाख रुपये भी हैं। अगर वह चाहे तो पढ़ाई कर सकता है, कोई बिजनेस कर सकता है। पहले का जमाना अलग था। उस वक्त सैनिक रिटायर होने के बाद अपने गांव चला जाता था और वहां अपनी जमीन से अन्न उपजाता था और पेंशन से बाकी खर्चे निकल जाते थे। आज वो हालात नहीं रह गए हैं।


सेना में चार साल बिताने के बाद अग्निवीर जब वापस जाएगा तो वह स्किल्ड और ट्रेन्ड होगा। वह समाज में सामान्य नागरिक की तुलना में कहीं ज्यादा योगदान कर पाएगा। पहला अग्निवीर जब रिटायर होगा तो 25 साल का होगा। उस वक्त भारत की इकनॉमी 5 ट्रिलियन डॉलर की होगी। तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को ऐसे लोग चाहिए होंगे। सेंट्रल आर्म्ड फोर्सेज, राज्य पुलिस समेत अन्य कई भर्तियों में ऐसे ट्रेंड युवाओं की जरूरत होगी। सभी विभागों ने पहले ही अग्निवीरों को नौकरी में वरीयता देने का एलान कर दिया है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed