मॉक टेस्ट की असफलता के बाद दिल्ली विश्विद्यालय पर परीक्षाएं टालने का दबाव बढ़ा
दिल्ली यूनिवर्सिटी में मॉक टेस्ट के दूसरे दिन भी छात्रों की परेशानियां कम नहीं हुईं। अनेक सेंटरों पर प्रश्न पत्रों को डाउनलोड करने में परेशानी सामने आई तो कई छात्रों ने पर्याप्त समय न मिलने की बात कही। छात्रों का कहना है कि प्रश्न पत्रों को डाउनलोड होने में बहुत अधिक समय लग रहा है जो उनके परीक्षा समय में से ही कट रहा है जिससे वे पर्याप्त उत्तर देने में समर्थ नहीं हो पा रहे हैं। छात्रों की इन परेशानियों को देखते हुए ओपन बुक एग्जामिनेशन का फिर विरोध शुरू हो गया है। छात्रों के साथ-साथ अनेक प्रोफेसरों ने भी कहा है कि समय की मजबूरी को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को परीक्षाओं को टालते हुए परिणाम घोषित करने के लिए किसी अन्य विकल्प पर विचार करना चाहिए।
विश्वविद्यालय ने ओपन बुक एग्जामिनेशन के सिस्टम से छात्रों-शिक्षकों को परिचित कराने के लिए 4 जुलाई से 8 जुलाई के बीच मॉक टेस्ट का आयोजन किया है। इसके बाद 10 जुलाई से 22 जुलाई तक मुख्य परीक्षाएं आयोजित किए जाने की भी घोषणा की जा चुकी है।
दिल्ली विश्वविद्यालय एग्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्य राजेश झा ने अमर उजाला से कहा कि मॉक टेस्ट के आयोजन के दो दिनों के अनुभव के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि विश्वविद्यालय अभी इस तरह की परीक्षाओं के आयोजन के लिए सक्षम नहीं है। ऐसे में अगर मुख्य परीक्षाओं को ओपन बुक एग्जामिनेशन (Open Book Examination, OBE) के माध्यम से आयोजित कराया जाता है तो परीक्षा के दौरान भारी अनियमितता उत्पन्न होगी। उसका सीधा नुक्सान छात्रों को उठाना पड़ेगा। इसलिए उनकी सलाह है कि इस वर्ष परीक्षाओं को टाल दिया जाना चाहिए और किसी वैकल्पिक माध्यम का उपयोग करते हुए छात्रों को आगे बढ़ा देना चाहिए।
राजधानी कॉलेज के छात्र गौरव कुमार ने बताया है कि उनकी समस्याएं कम नहीं हो रही हैं। प्रश्न पत्रों को खोजने, उन्हें डाउन लोड करने में बहुत अधिक समय लग रहा है। ऐसे में इन गड़बड़ियों से उनके भविष्य को नुक्सान पहुंच सकता है। उनके साथ सैकड़ों छात्रों ने भी ऑन लाइन एग्जामिनेशन को टालने की मांग की है।
आम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह ने कहा है कि मॉक टेस्ट (Mock Test) के असफल होने से यह बात साफ हो जाती है कि दिल्ली विश्वविद्यालय (Delhi University, DU) इस समय लाखों छात्रों की ऑन लाइन परीक्षा लेने में समर्थ नहीं है। यह भी स्पष्ट हो गया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के पास अभी इस तरह की परीक्षा कराने की तकनीकी क्षमता नहीं है। इसलिए छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष परीक्षाओं को टाल दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वे आज मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को पत्र लिखकर मांग करेंगे कि जिस प्रकार कई अन्य संस्थाओं ने अपने छात्रों को पिछले वर्ष की परीक्षाओं में मिले अंकों के आधार पर छात्रों को सफल घोषित कर दिया है, उसी अनुसार दिल्ली विश्व विद्यालय भी अपने छात्रों का परिणाम घोषित करे।