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कांग्रेस में ब्लॉक अध्यक्षों का चुनाव अधर में, शीला दीक्षित के निधन के बाद असमंजस में पर्यवेक्षक
Wed, 24 Jul 2019 09:11 PM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Wed, 24 Jul 2019 09:11 PM IST
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शीला दीक्षित
- फोटो : Amar Ujala
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कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष शीला दीक्षित के निधन के बाद नए ब्लॉक अध्यक्षों को चुनने का मामला अधर में है। इन्हें चुनने के लिए नियुक्त किए गए पर्यवेक्षक असमंजस में हैं कि इस अभियान को जारी रखें या ठंडे बस्ते में डाल दें। दरअसल, उन्हें यह डर सताने लगा है कि वह ब्लॉक अध्यक्ष की सूची बनाते हैं और नया प्रदेशाध्यक्ष इस पर सहमत नहीं होता है तो किरकिरी हो जाएगी।
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लोकसभा चुनाव के बाद से शीला दीक्षित प्रदेश संगठन को मजबूत करने के अभियान में जुटी थीं। वह नई कार्यकारिणी का भी गठन करने की योजना बना चुकी थीं। चुनावी हार के बाद गठित कमेटी की समीक्षा में यह बात सामने आई थी कि ब्लॉक अध्यक्षों ने चुनाव में पूरी जिम्मेदारी के साथ सहयोग नहीं किया। इसके बाद शीला दीक्षित ने सभी 280 ब्लॉक अध्यक्षों की कमेटी को एक ही झटके में भंग कर दिया। उनके निधन के बाद नए ब्लॉक अध्यक्षों की सूची तैयार करने पर उनके गुट के नेता असमंजस में हैं। कमेटियां भंग करने के फैसले का प्रदेश कांग्रेस प्रभारी पीसी चाको समेत कई दिग्गज नेताओं ने खुले तौर पर विरोध किया था। उन्होंने आलाकमान को पत्र लिखकर भी इसकी शिकायत की थी।
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ब्लॉक अध्यक्ष को चुनने के लिए नियुक्त पर्यवेक्षक भी इस संबंध में कुछ बोलने में हिचक रहे हैं। उनका अभियान थम गया है। दरअसल, प्रदेश नेतृत्व को लेकर कांग्रेस आलाकमान भी चुप्पी साधे हुए है। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि हटाए गए ब्लॉक अध्यक्ष भी इस वजह से सक्रिय नहीं हैं कि उनके पास कोई पद नहीं है। यह स्थिति तब है, जब अगले छह महीने में विधानसभा चुनाव होने हैं।
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