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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद टकराव खत्म होने की उम्मीद, बढ़ जाएगी सरकार की जवाबदेही

Thu, 05 Jul 2018 01:19 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 05 Jul 2018 01:19 PM IST
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after supreme court decision power tussle may end in delhi and government answer ability increase
केजरीवाल

दिल्ली सरकार व उपराज्यपाल के मौजूदा टकराव पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को विशेषज्ञों ने दिल्ली के लिये बेहतर बताया है। संविधानविदों का कहना है कि अदालत ने दो संवैधानिक संस्थाओं के अधिकारों को स्पष्ट कर दिया है।

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साथ ही उम्मीद भी जताई है कि इस फैसले से टकराव खत्म होगा और दिल्ली सरकार की जवाबदेही भी बढ़ेगी। हालांकि, संविधानविद मान रहे हैं कानूनी प्रावधानों के सहारे सियासी टकरावों का समाधान नहीं निकल सकता। इसके लिये संवैधानिक जिम्मेदारियां निभा रहे नेताओं को अपना रवैया भी बदलना जरूरी है।
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संविधानविद सोली सोराबजी के मुताबिक, अदालत का काम संविधान के अस्पष्ट प्रावधानों की व्याख्या करना है। दिल्ली के मसले में भी सुप्रीम कोर्ट ने यही किया है। अदालत कानून नहीं बना सकती।
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दिल्ली के मामले में केंद्र का पलड़ा हमेशा से भारी रहा है। अपने फैसले में भी अदालत ने यही व्यवस्था दी है। तीनों आरक्षित विषय उपराज्यपाल के पास जस के तस हैं। जिन विषयों पर दिल्ली सरकार को कानून बनाना है, उन पर वह कानून बनाती रहेगी।

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kejriwal

मतविभन्नता की स्थिति में मामला केंद्र को भेज दिया जायेगा। उस पर केंद्र को फैसला करना है। उन्होंने कहा कि बावजूद इसके अगर राजनेताओं का रवैया नहीं बदला तो हालात के बेहतर होने की ज्यादा उम्मीद नहीं बनती।

उधर, संविधानविद एसके शर्मा बताते हैं कि संविधान की धारा 239एए में दिल्ली की स्थिति स्पष्ट है। उसमें किस-किस के पास क्या क्या अधिकार हैं, उसी को सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया है।

किसी को कोई अतिरिक्त शक्ति इस फैसले से नहीं मिली हैं। जो थोड़ा फर्क प्रक्रियागत मामलों पर पड़ा है वह यही कि उपराज्यपाल सरकार से आने वाली फाइलों पर दस्तखत कर दें। बाकी विषयों पर फर्क नहीं पड़ेगा। तीन आरक्षित विषयों पर उपराज्यपाल केंद्र को रिपोर्ट करेगा।

वहीं, दूसरे राज्यों की तरह दिल्ली का अपना कोई सर्विस कैडर न होने से अधिकारी गृहमंत्रालय के अधीन काम करेंगे। एसके शर्मा यहां तक बताते हैं कि उपराज्यपाल ने विधान सभा अध्यक्ष से जिन तीन आरक्षित विषयों पर सवाल न लेने की बात कही है, वह भी पूर्ववत रहेगा। इसमें भी कोई बदलाव नहीं होगा।

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