पुरस्कार वापसी के बाद अब होगी मेडल वापसी
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वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) की मांग को लेकर जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे पूर्व सैनिक अपने आंदोलन को तेज करने जा रहे हैं। पूर्व सैनिकों ने एलान किया आगामी 9 व 10 नवंबर को दुनिया भर में भारतीय दूतावास व देश के 676 जिलों में अपना मेडल वापस करेंगे।
वहीं, जंतर मंतर पर काली दिवाली मनाई जाएगी। आंदोलन की अगुवाई कर रहे जनरल (सेवा.) सतबीर सिंह ने शुक्रवार को मीडिया से बताया कि हमने देशभर में अपने मेडल को लौटाने का फैसला एकमत से लिया है।’
सतबीर सिंह के मुताबिक, अब हम दुबारा सरकार के पास नहीं जाएंगे। हमारी मुहिम देश के आम लोगों के बीच चलेगी। आंदोलन के महासचिव कैप्टन (सेवा.) वीके गांधी ने बताया कि सरकार हमें जो ओआरओपी देने जा रही है, वह विसंगतियों से भरी है।
यह मूल ओआरओपी से मेल नहीं खाती। इसके विरोध स्वरूप मेडल वापसी अभियान शुरू हो रहा है। पूर्व सैनिक जिलाधिकारी के पास अपना मेडल जमा कराएंगे और गुजारिश करेंगे कि मेडल राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास भेज दें।
ओआरओपी नहीं, वन रैंक, फाइव पेंशन
पूर्व सैनिकों का कहना था कि केंद्र सरकार द्वारा पांच सितंबर को जिस ओआरओपी योजना की घोषणा की है वह ओआरओपी नहीं है। इसकी जगह इसे वन रैंक, फाइव पेंशन कहना बेहतर होगा।
पूर्व सैनिकों के मुताबिक, यही वजह रही कि सरकार के एलान के बाद भी पूर्व सैनिकों को मजबूरन अपना आंदोलन जारी रखना पड़ा। शुक्रवार को आंदोलन ने 145 दिन पूरे कर लिए हैं।
युनाइटेड फ्रंट ऑफ एक्स सर्विस मूवमेंट (यूएफईएसएम) पर कर्नल (सेवा.) दिनेश नैन के दावे के बारे में जनरल (सेवा.) सतबीर सिंह ने कहा कि हम सभी यूएफईएसएम के बैनर तले एकजुट हैं। सारा यूएफईएसएम जंतर-मंतर पर मौजूद है।
बता दें कि बृहस्पतिवार को दिनेश नैन ने यूएफईएसएम पर अपना दावा पेश किया था। वहीं, जंतर मंतर के आंदोलन के राजनीतिकरण व फंडिंग में हेराफेरी का आरोप लगाते हुए खुद को अलग कर लिया था। नैन का कहना है कि वह दिवाली के बाद अपनी रणनीति को खुलासा करेंगे।