गजेंद्र की खुदकुशी पर गरमाएगी दिल्ली की सियासत
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आम आदमी पार्टी सरकार का सियासी भूचालों से नाता चोली-दामन का हो गया है। आप के भीतर मचे घमासान से सरकार उबर भी नहीं पाई थी कि बाहरी झटके की जमीन तैयार हो गई है।
बुधवार दोपहर बाद से ही दिल्ली में मातम की सियासत गरमा गई है। दिल्ली सरकार व आप पर भाजपा व कांग्रेस हमलावार हो गए हैं। दोनों विपक्षी पार्टियां सड़क पर उतरने को तैयार हैं।
दरअसल, सरकार बनने के बाद आप के भीतर घमासान शुरू हो गया था। बागी नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाने के बाद उम्मीद की जा रही है कि अब भीतरी घमासान थम जाएगा।
रणनीति हुई ढेर बढ़ गई परेशानी
आप और उसकी सरकार अपनी रणनीति के अनुसार आगे का रास्ता तय करेगी। किसान रैली के सहारे पार्टी की रणनीति थी कि सरकार अपना काम करेगी।
जबकि संगठन मिशन विस्तार की राह चलेगा। लेकिन किसान रैली गहरे मातम में बदल गई। हजारों की भीड़ के सामने राजस्थान के किसान गजेंद्र सिंह ने आत्महत्या कर ली।
इस दर्दनाक हादसे से विपक्षी पार्टियां आप सरकार पर हमलावर हो गई हैं। निशाने पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हैं। कांग्रेस और भाजपा का आरोप है कि किसान की मौत के बावजूद केजरीवाल समेत आप के चार बड़े नेताओं ने भाषणबाजी जारी रखी।
वह दो घंटे तक पेड़ पर चढ़ा रहा
जुबानी संवेदना जाहिर करने के अलावा आप नेताओं ने किसान को बचाने की कोशिश नहीं की। वह भी तब, जब किसान ने अचानक फांसी नहीं लगाई। इससे पहले करीब दो घंटे तक वह पेड़ पर चढ़ा रहा।
आप सरकार को घेरने के लिए भाजपा और कांग्रेस सड़क पर उतरने की तैयारी कर रही हैं। भाजपा बृहस्पतिवार को इस मामले का विरोध करने जा रही है।
वहीं, कांग्रेस भी आप पर हमलावर है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन भी अस्पताल पहुंचे। माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों तक आप को बाहरी विरोध का सामना करना पड़ेगा।
योगेंद्र यादव ने जताया दुख
गजेंद्र की खुदकुशी अत्यंत ही दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद है। दिल्ली के जंतर-मंतर की ये घटना किसानों की बदहाल स्थिति का प्रतिबिंब है।
साथ ही यह ये भी दर्शाता है कि पूरा सत्ता-प्रतिष्ठान किसान के प्रति किस कदर असंवेदनशील हो चुका है। इस घटना की बिलकुल निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
योगेंद्र बोले कि कम से कम अब भी केंद्र और राज्य सरकारें किसानों के हालात को सुधारने के प्रयास करें। अब तो ऐसे कदम उठाए जाएं जिससे किसानों की दिन-ब-दिन बढ़ती आत्महत्याओं पर अंकुश लगे।