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दिल्ली में 76 लाख लोगों को 17 लाख घर मिलने का रास्ता साफ, लैंड पूलिंग पॉलिसी मंजूर

Sat, 08 Sep 2018 04:59 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 08 Sep 2018 04:59 AM IST
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After five years of long wait, land pooling policy approved in delhi
DDA flats

पांच साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार राजधानी में लैंड पूलिंग पॉलिसी को मंजूरी मिल ही गई। शुक्रवार को उपराज्यपाल अनिल बैजल की अध्यक्षता में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की बोर्ड बैठक में लैंड पूलिंग पॉलिसी के संशोधनों को मंजूर किया गया। इसके बाद दिल्ली में 17 लाख घरों की राह आसान हो गई है। डीडीए के अनुसार, इन 17 में से पांच लाख घर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए होंगे।

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17 लाख घर बनने के बाद करीब 76 लाख लोगों को दिल्ली में छत नसीब हो सकेगी। हालांकि अधिसूचना जारी करने के लिए डीडीए ने पॉलिसी को केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय भेज दिया है। इसके अलावा बैठक में रोहिणी, नरेला और सिरसापुर में सरेंडर हुए 7876 एलआईजी फ्लैट्स को सीआईएसएफ को दी कीमतों पर ही केंद्र, दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम को देने का निर्णय लिया है। अगर इसके बाद भी फ्लैट खाली रहते हैं तो इन्हें निजी ठेकेदारों को सौंपा जा सकता है।
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डीडीए के अनुसार, 2013 में सबसे पहले इस लैंड पूलिंग पॉलिसी को लाया गया था। उस समय से लोग इस पॉलिसी के तहत सस्ते घर पाने का सपना देख रहे हैं। डीडीए के अनुसार, पॉलिसी में एफएआर 200 ही रखा गया है, जबकि बोर्ड सदस्य एवं नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता का कहना है कि दिल्ली में जलापूर्ति कम होने की वजह से डीडीए को एफएआर 400 से घटाकर 200 करना पड़ा। उन्होंने इसके लिए दिल्ली सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। इससे पहले बीते जनवरी में डीडीए ने इस पॉलिसी को लेकर जनता से आपत्तियां एवं सुझाव मांगे थे।

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दिल्ली में 24 हजार हेक्टेयर जमीन

जानकारी के अनुसार, दिल्ली में 24 हजार हेक्टेयर जमीन ऐसी है, जो लैंड पूलिंग के दायरे में आती है। इसमें ज्यादातर कृषि भूमि है, जिसका स्वामित्व किसानों के पास है। डीडीए ने शर्त रखी है कि जिस भी जगह के भूस्वामी इस पॉलिसी में शामिल होना चाहते हैं, उनके पास वहां की खाली पड़ी जमीन का कम से कम 70 फीसदी हिस्सा होना चाहिए, तभी डीडीए वहां इसके लिए मंजूरी देगा।

डीडीए को प्रति हेक्टेयर देना होगा शुल्क
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि डीडीए को प्रति हेक्टेयर एक से दो करोड़ रुपये का विकास शुल्क भी देना अनिवार्य होगा। अधिकारी बताते हैं कि लैंड पूलिंग के तहत जमीन में 40 एवं 60 का अनुपात रखा गया है। 60 फीसदी जमीन पर उसके स्वामियों द्वारा निर्माण कार्य कराया जाएगा। इसमें भी 53 फीसदी हिस्सा रिहायशी निर्माण, पांच फीसदी कमर्शियल और दो फीसदी संस्थागत निर्माण के लिए तय किया गया है। 40 फीसदी जमीन पर डीडीए सड़कों, पार्क, सामुदायिक भवन और सीवरेज लाइन जैसी सुविधाएं विकसित करेगा।

70 फीसदी जमीन एकत्रित करना चुनौती
सूत्रों की मानें तो डीडीए को फिलहाल इस पॉलिसी में लंबा वक्त लग सकता है। पॉलिसी के तहत 70 फीसदी जमीन एकत्रित करना और उसके बाद वहां बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने में समय लग सकता है। उक्त सारी सुविधाएं विकसित होने और निर्माण कार्य पूरा होने में कई साल लगने तय हैं।

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