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Delhi NCR News: डूसू चुनाव के बाद अब एबीवीपी की जेएनयू पर नजर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 20 Sep 2026 06:15 PM IST
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वामपंथी संगठनों के मजबूत गढ़ में अध्यक्ष पद हासिल करना बड़ी चुनौती, राष्ट्रीय मुद्दों पर चुनाव लड़ने की तैयारी
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अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की नजर अब जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्र संघ चुनाव पर है। हालांकि, जेएनयू में अध्यक्ष पद हासिल करना एबीवीपी के लिए आसान नहीं होगा। डीयू और जेएनयू के छात्रसंघ चुनावों की राजनीतिक परिस्थितियां और चुनावी मुद्दे एक-दूसरे से काफी अलग हैं। जेएनयू में छात्र हितों के साथ राष्ट्रीय और वैचारिक मुद्दे भी चुनावी विमर्श का हिस्सा रहते हैं।
एबीवीपी ने जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष पद पर आखिरी बार वर्ष 2000 में संदीप महापात्रा के जरिए जीत दर्ज की थी। इसके बाद से संगठन इस पद पर वापसी नहीं कर सका है। हालांकि, वर्ष 2015 में सौरभ शर्मा और वर्ष 2025 में वैभव मीणा ने संयुक्त सचिव पद पर जीत हासिल कर संगठन की मौजूदगी दर्ज कराई। लंबे अंतराल के बावजूद अध्यक्ष पद एबीवीपी के लिए अब भी चुनौती बना हुआ है।
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पिछले चुनाव में एबीवीपी के वोट प्रतिशत में 27.47 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन संगठन केंद्रीय पैनल में जीत हासिल नहीं कर सका। वामपंथी छात्र संगठनों के गठबंधन ने एकजुट होकर सभी केंद्रीय पदों पर जीत दर्ज की थी। ऐसे में इस बार एबीवीपी के सामने न केवल अपने मत प्रतिशत को बढ़ाने, बल्कि वामपंथी संगठनों के संयुक्त मोर्चे का मुकाबला करने की भी चुनौती होगी।
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जेएनयू छात्रसंघ का मौजूदा कार्यकाल नवंबर में पूरा होने वाला है। हालांकि, शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए पीएचडी दाखिला प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है। जेएनयू में पीएचडी दाखिला सत्र शुरू होने के छह से आठ सप्ताह के भीतर छात्रसंघ चुनाव कराने का प्रावधान है। ऐसे में चुनाव कार्यक्रम घोषित होने में अभी समय लग सकता है। पिछले वर्ष सितंबर में चुनाव की रूपरेखा तैयार करने से संबंधित दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए थे।
एबीवीपी की जेएनयू इकाई के अध्यक्ष मयंक पांचाल के मुताबिक संगठन ने चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। वह कहते हैं, एबीवीपी लंबे समय से जेएनयू में वामपंथी संगठनों के खिलाफ संघर्ष कर रही है और इस बार भी पूरी ताकत से चुनाव मैदान में उतरेगी। चुनाव के लिए राष्ट्रवाद, महिला सशक्तीकरण और दिमागी नक्सलवाद जैसे मुद्दों को धार दिया जाएगा।

अगली बड़ी सियासी परीक्षा
पीएचडी दाखिला प्रक्रिया शुरू नहीं होने के कारण चुनाव की तारीख अभी तय नहीं है। एबीवीपी को उम्मीद है कि दाखिला प्रक्रिया पूरी होने के बाद अगले वर्ष जनवरी-फरवरी के दौरान चुनाव आयोजित हो सकते हैं। ऐसे में डूसू की जीत के बाद जेएनयू में अध्यक्ष पद हासिल करना संगठन के लिए अगली बड़ी राजनीतिक परीक्षा होगी।
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