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नोटबंदी के बाद आधुनिक युग में भाने लगी है पुरानी परंपरा, इसी से हो रहा नकदी का इंतजाम

Thu, 24 Nov 2016 12:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा Updated Thu, 24 Nov 2016 12:24 AM IST
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after demonetization people liking old tradition of wedding in noida
- फोटो : Getty Images
कई दशकों से शादियों में समाज और रिश्तेदारों द्वारा शुरू की गई परंपरा आधुनिक युग में लोगों को बेहद भा रही है। रिश्तेदारों द्वारा लड़की की शादी में किया जाने वाला कन्यादान का शगुन अब नए नोट के रूप में वरदान साबित हो रहा है।
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दरअसल, हिंदू समाज में बेटियों की शादी में समाज के लोगों को बुलाया जाता है और जो भी शादी में शामिल होता है वह लड़की को बतौर आर्शीवाद एक शगुन देता है। जो बेटी की विदाई के दौरान बेटी का पिता कन्यादान के रूप में वर पक्ष को देता है।
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दशकों पुरानी यह परंपरा इन दिनों लोगों को बेहद पसंद आ रही है। चूंकि जो भी रिश्तेदार और समाज के लोग हैं वह इस शगुन को नए नोट के रूप में दे रहे हैं। इससे शादियों में बेटी के कन्यादान की रस्म पूरी हो रही है। नए नोट शादी में सिर्फ शगुन के काम ही लिए जा रहे हैं। अब शादियों में कार और अन्य सामान का दिखावा बंद हो रहा है।
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फिजूलखर्ची पर लगी रोक

after demonetization people liking old tradition of wedding in noida

ग्रेनो के डेल्टा दो निवासी कर्मवीर सिंह ने अपनी बेटी की शादी 21 नवंबर को की है। शादी में फर्नीचर से लेकर इलेक्ट्रानिक सामान देने के लिए उन्होंने बेटी को चेक से रकम दी है। इसके अलावा बेटी के कन्यादान में कार के नाम पर भी चेक देकर ही काम चलाया है। जबकि नोट बंदी न होती तो वह सारा सामान खरीदकर ही देते।

बिरौंडी के बुजुर्ग राजपाल महाशय बताते हैं कि कन्यादान की परंपरा करीब 5 दशक पुरानी है और यह बेटी की शादी में मदद करने की परंपरा थी। मगर आज नए नोट न मिलने के कारण यह रस्म शादी वाले परिवारों के लिए रामबाण साबित हो रही है।

1000 और 500 के नोट बंद होने से भले ही लोगों को परेशानी हो रही है। मगर यह बात भी सही है कि लोगों ने पिछले 14 दिन से फिजूलखर्ची पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। शादियों में आतिशबाजी बंद हो गई और अधिक बैंड बाजे भी नहीं आ रहे हैं। सजावट आदि के लिए मोटी रकम खर्च की जाती थी मगर अब उसे भी कम दिया है।

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