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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   After death of Santosh Kumar of Aligarh organ donation will save lives of four people.

अपनों को रुला दूसरों को दीं खुशियां: चार लोगों को जिंदगी दे गया अलीगढ़ का संतोष, इलाज के दौरान तोड़ दिया था दम

Sun, 15 Oct 2023 08:18 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: आकाश दुबे Updated Sun, 15 Oct 2023 08:18 PM IST
सार

गंभीर रूप से घायल होने के बाद आठ अक्तूबर को उन्हें अलीगढ़ के एक ट्रॉमा अस्पताल में ले जाया गया। यहां स्थानीय उपचार देने के बाद उन्हें एम्स के ट्रामा सेंटर में रेफर कर दिया गया। यहां 14 अक्तूबर तक जिंदगी और मौत से जुझते हुए आखिरकार उन्होंने दम तोड़ दिया।

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After death of Santosh Kumar of Aligarh organ donation will save lives of four people.
एम्स दिल्ली - फोटो : फाइल

विस्तार

एक घटना में गंभीर रूप से घायल हुए संतोष कुमार ने जान देकर भी चार लोगों की जिंदगी बचाई। अलीगढ़ के अरनी गांव निवासी संतोष कुमार को 7 अक्तूबर की शाम करीब 7:30 बजे गंभीर रूप से चोट लगी, जिसके बाद आठ अक्तूबर को उन्हें अलीगढ़ के एक ट्रॉमा अस्पताल में ले जाया गया। यहां स्थानीय उपचार देने के बाद उन्हें एम्स के ट्रामा सेंटर में रेफर कर दिया गया। यहां 14 अक्तूबर तक जिंदगी और मौत से जुझते हुए आखिरकार उन्होंने दम तोड़ दिया। उनकी मृत्यु के बार परिवार की सहमति से अंगदान किया गया। संतोष से प्राप्त दिल, लीवर और एक किडनी को एम्स में प्रत्यारोपित के लिए आवंटित किया गया, जबकि दूसरी किडनी को डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में आवंटित की गई थी।

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एम्स से मिली जानकारी के मुताबिक, करीब 30 साल के संतोष को गंभीर रूप से चोटें आई थीं। अलीगढ़ से शिफ्ट करने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया। करीब सात दिनों तक उनकी हालत में उतार-चढ़ाव होता रहा और आखिरकार उन्होंने 14 अक्तूबर को दम तोड़ दिया। ब्रेन डेड घोषित होने के तुरंत बाद डॉक्टरों ने परिवार से संपर्क साधा। एम्स के अंग पुनर्प्राप्ति बैंकिंग संगठन (ओआरबीओ) ने परिवार को अंगदान के बारे में विस्तार से बताया। ओआरबीओ की प्रभारी प्रोफेसर डॉ. आरती विज ने कहा कि संतोष के परिवार ने दुख की खड़ी में भी दूसरों को जिंदगी देने को प्राथमिकता दी। यह सबसे बढ़ी मानवता है।

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वहीं संतोष के अंकल ऋषिचंद्र ने कहा कि हर किसी को अंग दान पर विचार करना चाहिए। संतोष कुमार एक ईमानदार व्यक्ति थे। उन्होंने स्नातक तक की शिक्षा पूरी की और खेती के माध्यम से अपने परिवार को वित्तीय सहायता प्रदान कर रहे थे। संतोष अपने दो भाइयों और पांच बहनों के साथ अलीगढ़ में रहते थे। परिवार की सहमति के बाद उनका दिल और लीवर, एक किडनी दिल्ली के एम्स अस्पताल में आवंटित किया गया था, जबकि दूसरी किडनी आरएमएल अस्पताल को आवंटित की गई।

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