25 हजार का इनाम घोषित होते ही इंस्पेक्टर लक्ष्मी चौहान ने कोर्ट में किया सरेंडर, ये है पूरा मामला
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70 लाख के गबन के मामले में लिंक रोड थाने की पूर्व एसएचओ लक्ष्मी चौहान सहित सात पुलिसकर्मियों पर गुरुवार को 25-25 हजार का इनाम घोषित किया। इसके कुछ ही घंटों बाद ही एसएचओ लक्ष्मी चौहान ने एक अन्य सिपाही के साथ मेरठ के एंटी करप्शन कोर्ट में सरेंडर कर दिया।
बता दें कि आज सुबह ही सातों आरोपी पुलिसकर्मियों के घर कुर्की का नोटिस चस्पा करने की कार्रवाई पूरी की गई थी। क्ले काउंटी नोएडा स्थित इंस्पेक्टर लक्ष्मी चौहान के फ्लैट पर भी कुर्की का नोटिस चस्पा किया गया।
अग्रिम जमानत से हाईकोर्ट ने किया था इंकार, ये है पूरा मामला
गौरतलब है कि लक्ष्मी चौहान और अन्य सिपाहियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका डाली थी। जिसकी सुनवाई करते हुए एक नवंबर को हाईकोर्ट ने गाजियाबाद में तैनात महिला इंस्पेक्टर लक्ष्मी सिंह चौहान और पांच अन्य पुलिस कांस्टेबलों को अग्रिम जमानत देने से इंकार करते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी थी।
इन सभी पुलिसकर्मियों पर गाजियाबाद के साहिबाबाद थाने में भ्रष्टाचार अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज है। अग्रिम जमानत अर्जी पर न्यायमूर्ति डीके सिंह ने सुनवाई की।
याचीगण की ओर से तर्क दिया गया कि उनको झूठे मुकदमे में फंसाया गया है। एटीएम में पैसा डालने वाली कंपनी सीएमएस का मैनेजर 56 लाख रुपये लेकर भाग गया था। उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई। याची जांच अधिकारी थी।
उसने राजीव सचान से 31 लाख रुपये बरामद किए। एक अन्य व्यक्ति अजीम से भी 14 लाख रुपये बरामद हुए। बरामद धनराशि को जीडी इंट्री कर सार्वजनिक किया गया।
याची का कहना था कि सीओ साहिबाबाद ने याची पर बरामदगी की रकम कम दिखाने का दबाव बनाया था। नहीं मानने पर उन्होंने फर्जी मुकदमा दर्ज करवा दिया। और याचीगण पर 58 लाख रुपये की हेराफेरी का आरोप लगाया। जबकि कुल 56 लाख रुपये का ही मामला था।
प्रदेश सरकार की ओर से कहा गया कि गायब की गई धनराशि बढ़ गई है। ड्राइवर ओम प्रकाश ने बरामद रकम से एक बैग गायब करने की बात स्वीकार की है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अग्रिम जमानत देने से इंकार कर दिया था।