3000 फाइलें खंगाल जुटाए सबूत, फिर डाला यादव सिंह पर हाथ
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नोएडा प्राधिकरण के निलंबित चीफ इंजीनियर यादव सिंह की गिरफ्तारी से पहले सीबीआई टेंडर और जमीन आवंटनों से जुड़ी 3000 से अधिक फाइलें खंगाल चुकी है।
04 अगस्त को यादव सिंह पर सीबीआई छापे के बाद से फाइलों के जाने का सिलसिला शुरू हो गया। सबसे पहले विकास परियोजनाओं के टेंडरों की जांच शुरू हुई। दो करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले लगभग 2000 टेंडरों की फाइलें सीबीआई ने अपने पास जमा करा लिए और पड़ताल शुरू कर दी।
प्राधिकरण ने सीबीआई को जो रिपोर्ट भेजी, उसमें यादव सिंह के जरिए 2003 से 2014 तक कुल 13081 टेंडर जारी किए गए थे, जिसमें सिविल और मेनटेनेंस के कार्यों के 3562 टेंडर हैं।
इस तरह चली लंबी पड़ताल
इनकी कीमत 1641 करोड़ रुपये है, जबकि जल, सीवर और बिजली आदि के 9519 टेंडर जारी किए गए, जिनकी कीमत 2547.33 करोड़ रुपये है। जून 2014 से 01 दिसंबर 2014 केबीच 533 कामों के टेंडरों का भी जिक्र है, जिनकी कीमत करीब 735 करोड़ रुपये है।
इसी प्रकरण की जांच कर रहे जस्टिस वर्मा आयोग ने प्रदेश सरकार को सौंपी रिपोर्ट में जिक्र किया है कि यादव सिंह टेंडर देने के एवज में ठेकेदारों से कमीशन लेते थे।
जांच एजेंसी इन टेंडरों की पड़ताल के साथ ही उनसे संबंधित इंजीनियरों और कर्मचारियों से पूछताछ करती रही। नोएडा प्राधिकरण के कर्मचारियों को अपने दफ्तर बुलाकर रिपोर्ट भी बनवाती रही। प्राधिकरण के दो-चार अफसर व कर्मचारी रोज बुलाए जाते थे।
पत्नी बेटा व बहू के नाम दर्ज संपत्तियों को भी खंगाला गया
टेंडरों की जांच के साथ ही सीबीआई ने संपत्ति के आवंटनों में भी पड़ताल शुरू कर दी। प्राधिकरण के उद्योग, संस्थागत और आवासीय भूखंड हर तरह के आवंटनों की जांच हुई।
यादव सिंह के अलावा उनकी पत्नी, बेटा व बहू के नाम दर्ज संपत्तियों को भी खंगाला गया। इसमें रजिस्ट्री विभाग की भी मदद ली गई। सीबीआई ने यादव सिंह की पत्नी की सहभागिता वाली कंपनियों का भी ब्योरा जुटा लिया।
इन कंपनियों के नाम ही 25 से अधिक प्लॉट मिले। अप्रत्यक्ष रूप से सैकड़ों संपत्तियों के आवंटन में जांच एजेंसी को यादव सिंह के प्रभाव की जांच कर चुकी है। 2002 से 2014 के बीच बिल्डरों को आवंटित भूखंडों की भी पड़ताल हो चुकी है।
मुआवजा व पांच फीसदी भूखंड में भी खेल
यादव सिंह ने प्राधिकरण से मुआवजा और पांच फीसदी आवासीय भूखंड में भी खेल किया। अधिक मुनाफा कमाने के लिए गांवों में किसानों से सीधे जमीन खरीदी। उसे प्राधिकरण से अधिग्रहण कराया और तगड़ा मुआवजा भी वसूला। पर्थला खंजरपुर समेत कई गांवों की जमीन खरीदने की पुष्टि भी हुई। यादव सिंह ने प्राधिकरण से मुआवजे केसाथ ही पांच फीसदी आवासीय भूखंड भी लिए। मनमाफिक लोकेशनों पर ये प्लॉट लगवाए।
आयकर ने यादव सिंह केकरीबी 75 ठेकेदारों की सूची देकर प्राधिकरण से ब्योरा मांगा था उसे भी सीबीआई ने खंगाल लिया है। इनमें यादव सिंह के मुख्य अभियंता बनने के बाद से 2014 तक के ठेकेदार शामिल हैं।
कुछ ठेकेदारों को सीबीआई बुलाकर पूछताछ भी कर चुकी है। 15 दिसंबर 2015 को सीबीआई ने 954 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच में नोएडा आकर जमीन के अंदर पाइप लाइनों को खुदवाकर जांच पड़ताल की थी।
यादव सिंह मामला कब क्या हुआ
- 1980 में अवर अभियंता के पद पर हुई तैनाती।
- 1985 में सहायक परियोजना अभियंता पर पदोन्नति।
- 1995 में परियोजना अभियंता बनाए गए।
- 1997 में वरिष्ठ परियोजना अभियंता बने।
- 2002 में मुख्य अनुरक्षण अभियंता बने।
- 2011 में इंजीनियर इन चीफ बने।
- 2012 जून में घोटाले के आरोप में निलंबित हुए। नवंबर 2013 में हुए बहाल।
- 2014 फरवरी में मिला जन स्वास्थ्य व उद्यान का चार्ज।
- 2014 नवंबर में तीनों प्राधिकरणों के इंजीनियर इन चीफ बने।
- 27 नवंबर 2014 को आयकर ने छापा मारा।
- 2014 दिसंबर में प्राधिकरण से फिर निलंबित हुए।
- 10 फरवरी 2015 को जस्टिस वर्मा आयोग का गठन।
- 16 जुलाई 2015 को हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के दिए आदेश।
- 04 अगस्त 2015 को सीबीआई ने पहली बार छापा मारा।
- अगस्त से दिसंबर 2015 के बीच प्राधिकरण से दस्तावेज जुटाए।
- 18 दिसंबर 2015 को सीबीआई ने रामेंद्र को किया गिरफ्तार।
- 03 फरवरी 2016 को यादव सिंह गिरफ्तार।