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15 साल बाद नजर आया गिद्ध, पक्षी प्रेमी डॉक्टर ने फोटो खींची

Mon, 20 Mar 2017 11:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद Updated Mon, 20 Mar 2017 11:58 AM IST
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After 15 years, the vulture, bird lover doctor photographed
vulture - फोटो : अमर उजाला

गिद्धों के लिए काल बनी डायक्लोफेनिक दवाओं पर प्रतिबंध का असर दिखने लगा है। करीब 15 साल बाद रविवार को लोहिया नगर में एक गिद्ध दिखाई दिया। विलुप्त होते प्रकृति के इस ‘सफाई कर्मी’ की वापसी के संकेत मिलने से पक्षी प्रेमी खुश हैं, वहीं वन विभाग के अधिकारी भी इसे अच्छा संकेत मान रहे हैं।

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रविवार सुबह लोहिया नगर सी-ब्लाक में गुरुनानक गर्ल्स कालेज के पास एक पेड़ पर ‘इंडियन व्हाइट बैक्ड वल्चर’ (सफेद कमर वाला भारतीय गिद्ध) दिखाई दिया। पक्षी प्रेमी डॉ.एके गुप्ता ने उसे अपने कैमरे में कैद कर लिया।
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एके गुप्ता पक्षियों की तकरीबन 850 प्रजातियों की पहचान रखते हैं और 150 से ज्यादा पक्षियों को आवाज से पहचान लेते हैं। एके गुप्ता का कहना है कि वह हर छह महीने में पक्षियों को देखने देश के विभिन्न हिस्सों में जाते हैं, लेकिन गाजियाबाद या आसपास के जिलों में उन्हें करीब 15 साल से इंडियन वल्चर नहीं दिखे।
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उन्होंने बताया कि इसे बंगाल का गिद्ध भी कहा जाता है और यूरोपियन सफेद कमर वाले गिद्ध का करीबी माना जाता है। 1990 के दशक में यह सबसे ज्यादा आबादी वाला बड़ा परभक्षी पक्षी था।

1992 से 2005 के अंतराल में इनकी संख्या 99 फीसदी तक घट गई। इसका कारण पशुओं में होने वाली डायक्लोफेनिक दवाओं के इस्तेमाल को माना जा रहा है। इस दवा के इस्तेमाल वाले पशु का मांस खाने से इनके गुर्दे फेल हो जाते हैं।

अब यह प्रजाति विलुप्त प्राय है, ऐसे में फिर से इन गिद्धों की नई पीढ़ी का दिखना प्रकृति में इनका वापस लौटने का संकेत है। उन्होंने बताया कि रविवार को दिखा गिद्ध वयस्क नहीं था, यानी लगता है कि आसपास ही गिद्धों ने अपना डेरा डाल रखा है और उसी में से भटककर वह यहां पहुंचा होगा। उनका कहना है कि वह इसकी जानकारी वन विभाग के अधिकारियों को भी भेजेंगे।


गिद्धों की संख्या तेजी से घट रही थी, अगर फिर से गाजियाबाद या इनके आसपास इनकी आमद हो रही है तो यह बेहतर संकेत है। इसकी जानकारी ली जाएगी। - डीपी सिंह, डीएफओ

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