{"_id":"6aaa8584c195d618bd028848","slug":"advanced-treatment-of-keratoconus-for-the-first-time-in-east-delhi-delhi-ncr-news-c-503-1-del1005-963-2026-09-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi NCR News: पूर्वी दिल्ली में पहली बार केराटोकोनस का एडवांस इलाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi NCR News: पूर्वी दिल्ली में पहली बार केराटोकोनस का एडवांस इलाज
विज्ञापन
24 घंटे में युवक की दृष्टि में उल्लेखनीय सुधार
प्रीत विहार अस्पताल में सीएआईआरएस व सीथ्रीआर प्रक्रिया से 22 वर्षीय मरीज का सफल ऑपरेशन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। पूर्वी दिल्ली के प्रीत विहार स्थित एक निजी अस्पताल में एडवांस्ड केराटोकोनस से पीड़ित 22 वर्षीय युवक की आंख का सफल इलाज किया गया। अस्पताल का दावा है कि पूर्वी दिल्ली में पहली बार कॉर्नियल एलोजेनिक इंट्रास्ट्रोमल रिंग सेगमेंट्स (सीएआईआरएस) प्रक्रिया की गई, साथ ही कॉर्नियल कोलेजन क्रॉस-लिंकिंग (सीथ्रीआर) भी की गई। इलाज के 24 घंटे के भीतर ही मरीज की दृष्टि में उल्लेखनीय सुधार देखा गया।
नोएडा के आईटी प्रोफेशनल वरुण डागर दोनों आंखों में केराटोकोनस से पीड़ित थे। इस बीमारी में कॉर्निया धीरे-धीरे पतला होकर बाहर की ओर उभरने लगता है, जिससे नजर धुंधली व टेढ़ी दिखाई देती है। वरुण को कंप्यूटर पर काम करने, पढ़ने व दूर से चेहरे पहचानने में परेशानी हो रही थी और चश्मे का नंबर बार-बार बदलना पड़ रहा था।
हरियाणा में जांच के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए दिल्ली आने की सलाह दी गई। इसके बाद उन्होंने प्रीत विहार स्थित डॉ. अग्रवाल आई हॉस्पिटल में उपचार कराया। अस्पताल की सीनियर नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सौम्या शर्मा ने वरुण की बाईं आंख में सीएआईआरएस व सीथ्रीआर प्रक्रिया की। सीएआईआरएस में डोनर कॉर्नियल टिश्यू से बने छोटे रिंग सेगमेंट कॉर्निया के अंदर लगाए जाते हैं, जिससे कॉर्निया का असामान्य आकार सुधरता है और रोशनी बेहतर तरीके से फोकस होती है। सीथ्रीआर प्रक्रिया कॉर्निया को मजबूत कर बीमारी को आगे बढ़ने से रोकती है।
विज्ञापन
डॉ. शर्मा के अनुसार, सर्जरी करीब 60 मिनट में पूरी हुई। सर्जरी के अगले दिन वरुण की बिना चश्मे की दृष्टि 3/60 से बढ़कर 6/24 हो गई, जबकि पिनहोल टेस्ट में यह 6/9 तक पहुंच गई। इससे उन्हें कंप्यूटर पर काम करने, पढ़ने व चेहरे पहचानने में आसानी हुई। वह सर्जरी के करीब एक सप्ताह बाद कार्यालय भी लौट गए। सीएआईआरएस केराटोकोनस के कुछ मरीजों में कॉर्निया बचाने व दृष्टि सुधारने की उन्नत प्रक्रिया है, जिसके लिए सर्जिकल सटीकता और विशेष प्रशिक्षण जरूरी है। इसमें फेम्टोसेकंड लेजर की मदद से कॉर्निया के अंदर सटीक चैनल बनाकर डोनर कॉर्नियल सेगमेंट डाला जाता है।
विज्ञापन
प्रीत विहार अस्पताल में सीएआईआरएस व सीथ्रीआर प्रक्रिया से 22 वर्षीय मरीज का सफल ऑपरेशन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। पूर्वी दिल्ली के प्रीत विहार स्थित एक निजी अस्पताल में एडवांस्ड केराटोकोनस से पीड़ित 22 वर्षीय युवक की आंख का सफल इलाज किया गया। अस्पताल का दावा है कि पूर्वी दिल्ली में पहली बार कॉर्नियल एलोजेनिक इंट्रास्ट्रोमल रिंग सेगमेंट्स (सीएआईआरएस) प्रक्रिया की गई, साथ ही कॉर्नियल कोलेजन क्रॉस-लिंकिंग (सीथ्रीआर) भी की गई। इलाज के 24 घंटे के भीतर ही मरीज की दृष्टि में उल्लेखनीय सुधार देखा गया।
नोएडा के आईटी प्रोफेशनल वरुण डागर दोनों आंखों में केराटोकोनस से पीड़ित थे। इस बीमारी में कॉर्निया धीरे-धीरे पतला होकर बाहर की ओर उभरने लगता है, जिससे नजर धुंधली व टेढ़ी दिखाई देती है। वरुण को कंप्यूटर पर काम करने, पढ़ने व दूर से चेहरे पहचानने में परेशानी हो रही थी और चश्मे का नंबर बार-बार बदलना पड़ रहा था।
विज्ञापन
हरियाणा में जांच के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए दिल्ली आने की सलाह दी गई। इसके बाद उन्होंने प्रीत विहार स्थित डॉ. अग्रवाल आई हॉस्पिटल में उपचार कराया। अस्पताल की सीनियर नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सौम्या शर्मा ने वरुण की बाईं आंख में सीएआईआरएस व सीथ्रीआर प्रक्रिया की। सीएआईआरएस में डोनर कॉर्नियल टिश्यू से बने छोटे रिंग सेगमेंट कॉर्निया के अंदर लगाए जाते हैं, जिससे कॉर्निया का असामान्य आकार सुधरता है और रोशनी बेहतर तरीके से फोकस होती है। सीथ्रीआर प्रक्रिया कॉर्निया को मजबूत कर बीमारी को आगे बढ़ने से रोकती है।
विज्ञापन
डॉ. शर्मा के अनुसार, सर्जरी करीब 60 मिनट में पूरी हुई। सर्जरी के अगले दिन वरुण की बिना चश्मे की दृष्टि 3/60 से बढ़कर 6/24 हो गई, जबकि पिनहोल टेस्ट में यह 6/9 तक पहुंच गई। इससे उन्हें कंप्यूटर पर काम करने, पढ़ने व चेहरे पहचानने में आसानी हुई। वह सर्जरी के करीब एक सप्ताह बाद कार्यालय भी लौट गए। सीएआईआरएस केराटोकोनस के कुछ मरीजों में कॉर्निया बचाने व दृष्टि सुधारने की उन्नत प्रक्रिया है, जिसके लिए सर्जिकल सटीकता और विशेष प्रशिक्षण जरूरी है। इसमें फेम्टोसेकंड लेजर की मदद से कॉर्निया के अंदर सटीक चैनल बनाकर डोनर कॉर्नियल सेगमेंट डाला जाता है।