फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   actual stroy of a cleaner_Gandhi jayanti_My Idea of Swachh Bharat_ Valmiki Basti

ये है सफाईकर्मी की असली कहानी, रोंगटे खड़े कर देगी

Thu, 02 Oct 2014 02:42 PM IST
Updated Thu, 02 Oct 2014 02:42 PM IST
विज्ञापन
actual stroy of a cleaner_Gandhi jayanti_My Idea of Swachh Bharat_ Valmiki Basti

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब देश भर में स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की, तो मुझे रेवा राम का चेहरा याद आ गया।

विज्ञापन


करीब पांच साल पहले मैं रेवा राम से मिली थी, 45 साल की उम्र, रेत में धंसा हुआ सा चेहरा, शीशे सी बुझी वो आंखें, छोटा कद और बेहद दुबली-पतली काया।

वो एक आम दिन था और रेवा राम रोज की तरह अपने काम के लिए तैयार था। पर मुझे मालूम नहीं था कि मैं जो देखने जा रही थी, वो दृश्य मुझे इतना अधिक शर्मिंदा कर देगा।

सफाईकर्मियों की असल जिंदगी से जुड़े ये अनुभव हैं ब्रिटिश बॉडकॉस्टिंग कार्पोरेशन (बीबीसी) की संवाददाता रूपा झा के।

'मुझे भयंकर दुर्गंध से उबकाई आने लगी'

actual stroy of a cleaner_Gandhi jayanti_My Idea of Swachh Bharat_ Valmiki Basti

दिल्ली की एक पॉश कॉलोनी में बंद पड़े एक मैन होल का ढक्कन जैसे ही उसने खोला, मुझे भयंकर दुर्गंध से उबकाई आने लगी। लेकिन रेवा राम नंगे बदन, बिना किसी 'मास्क' या 'बॉडी सूट' के नीचे उतरे उस कीचड़ को साफ करने लगा।

उसने घोड़े की लगाम की तरह एक रस्सी अपने बदन पर बांधी थी जिसका एक सिरा उनके दूसरे साथियों ने बाहर से पकड़ रखा था। मैनहोल का दायरा इतना छोटा था कि उसकी गंदी दीवारों से रगड़ खाकर ही रेवा राम उसमें उतर सका।

दीवारों पर बडे तिलचट्टे... चारों तरफ़ ऐसी बदबू, सर चकरा देने वाली दूषित गैस थी। मै देख पा रही थी रेवा राम आठ फुट गहरे मैनहोल मे लगातार खांस रहे थे और गंदगी हाथों से निकाल, बाहर लोगों को पकड़ा रहा था।

विज्ञापन
विज्ञापन

मुझे केवल शर्म आई कि ये सच मेरे सामने था

actual stroy of a cleaner_Gandhi jayanti_My Idea of Swachh Bharat_ Valmiki Basti

अचानक बगल के किसी आलीशान घर से किसी ने फ्लश किया होगा कि मल से भरा पानी उनके सिर पर गिरने लगा। कुछ पल मे ही वे उससे लथपथ हो गए। उसकी सांसे फूलने लगीं, आँखें जलने लगीं, उन्हें खीच कर बाहर निकाला गया। वे खाँसते हुए कह रहा था.. 'गैस लग गई ... थोड़ा सा पानी चाहिए।'

शायद चेहरे पर पानी के छींटे पड़ते तो उन्हें बेहतर महसूस होता। उनके दोस्तों ने पड़ोस के बडे घरों के आलीशान दरवाजों को पीटना शुरू किया। लेकिन मुझे आश्चर्य नहीं हुआ कि दरवाजे नहीं खुले। मुझे केवल शर्म आई कि ये सच मेरे सामने था, 21वीं सदी की एक आम दोपहर में। कुलीनता की हिंसा क्या होती है, तब मुझे समझ में आया।

रेवा राम दिल्ली महानगर के सीवरों, मेनहोल्स की सफ़ाई करने वाले कुछ हजार बेलदारों में से एक था और दिल्ली जल बोर्ड के कर्मचारी था। घरों के कचरे, लोगों के मल-मूत्र, कारखानों की गंदगी, ये सब इन सीवरों में बहता है और जब कचरे से ये भरने लगता है तो बेलदारों को बिना किसी सुरक्षा उपकरणों के इन नालों के, मेनहोल्स के भीतर जाना पड़ता है।

विज्ञापन

'हमारी जात तो सदियों से करती आई है'

actual stroy of a cleaner_Gandhi jayanti_My Idea of Swachh Bharat_ Valmiki Basti

सरकार दावा करती रही है कि बेलदार केवल आपात स्थिति में ही इन मेनहोल्स या सीवर पाईपों की सफ़ाई करते हैं लेकिन शायद ये सच भी किसी से छिपा नहीं कि दिल्ली जैसे महानगर में हर दिन आपात स्थिति की तरह ही होता है।

सरकारी एजेंसियां ये भी दावा करती हैं कि बेलदारों के लिए सुरक्षा के सभी उपकरण मौजूद हैं। मैने खांसते और कीचड़ में फंसे रेवा राम से पूछा था, "आपको ग़ुस्सा नहीं आता कि ये काम आपको करना पड़ता है।"

जवाब था, "नहीं मैडम। कम से कम सरकारी नौकरी है। अनपढ़ हूं और करूंगा भी क्या? फिर हमारी जात तो सदियों से ये काम करती रही है।"

बेलदारों को सीवरों में मीथेन और हाईड्रोजन सल्फाईड जैसी दूषित गैसों के संपर्क मे लगातार आना पड़ता है, जिससे उन्हें चर्म रोग, सांस की बीमारी, सिरदर्द और अन्य कई तरह की बीमारियां हो जाती हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed