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Delhi NCR News: अवैध बोरवेल पर कार्रवाई, मालिक पर 35 हजार का जुर्माना और कुआं सील
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-यह कार्रवाई मोहम्मद दानिश नाम के व्यक्ति की शिकायत पर हुई
-आरोप लगाया था कि पड़ोसी घर में निर्माण के लिए अवैध बोरवेल से पानी निकाला जा रहा
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
दिल्ली के ब्रह्मपुरी इलाके में एक घर में अवैध तरीके से भूजल निकालने के मामले में दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने सख्त कदम उठाया है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेश पर जांच के बाद बोरवेल को सील कर दिया गया। साथ ही मालिक पर 35 हजार रुपये से ज्यादा का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया गया। यह कार्रवाई मोहम्मद दानिश नाम के व्यक्ति की शिकायत पर हुई, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि पड़ोसी घर में निर्माण के लिए अवैध बोरवेल से पानी निकाला जा रहा है। मामला दिल्ली के चौहान बांगर, गली नंबर 16, डी-23 वाले प्लॉट का है। एनजीटी ने जुलाई 2024 में इसकी जांच के लिए एक संयुक्त समिति बनाई, जिसमें उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जिलाधिकारी और डीपीसीसी शामिल थे।
डीपीसीसी को नोडल एजेंसी बनाया गया। 6 सितंबर 2024 को जांच टीम ने मौके पर जाकर देखा कि प्लॉट को चार हिस्सों में बांटा गया है और सभी मालिक भाई हैं। कोने वाले हिस्से डी-23/4 में एक बोरवेल मिला, जो 7-8 साल पुराना था। मालिक मुन्नवर अली मौजूद थे, लेकिन उन्होंने बोरवेल की अनुमति का कोई कागज नहीं दिखाया। उन्होंने बताया कि वे रोजाना 10 मिनट के लिए बोरवेल चलाते हैं। टीम ने पाया कि यह बोरवेल घरेलू इस्तेमाल के लिए था, लेकिन बिना सरकारी मंजूरी के चल रहा था, जो पर्यावरण कानून का उल्लंघन है। जांच के दौरान सीलिंग नहीं हुई, लेकिन सीलमपुर के एसडीएम ने वादा किया कि वे जल्द कार्रवाई करेंगे। उसके बाद 9 सितंबर 2024 को एसडीएम ने बोरवेल को सील कर दिया। बाद में 18 सितंबर को एक सुधार पत्र जारी कर व्यावसायिक इस्तेमाल को घरेलू इस्तेमाल में बदल दिया गया।
ऐसे मामलों में प्रदूषक भुगतान के सिद्धांत पर जुर्माना लगाने की नीति
डीपीसीसी के वरिष्ठ पर्यावरण अभियंता एमएस रावत ने रिपोर्ट में कहा कि यह मामला भूजल के अवैध दोहन से जुड़ा है, जो दिल्ली में पानी की कमी को बढ़ा रहा है। जांच में यह भी पता चला कि इसी संपत्ति पर कड़कड़डूमा कोर्ट में एक अलग मुकदमा चल रहा है, जिसमें अवैध निर्माण और संपत्ति विवाद का जिक्र है। डीपीसीसी ने ऐसे मामलों में प्रदूषक भुगतान के सिद्धांत पर जुर्माना लगाने की नीति अपनाई है। अधिकारियों ने बताया कि आगे भी ऐसी शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई की जाएगी, ताकि पानी की बचत हो सके।
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तुर्कमान गेट इलाके में औद्योगिक काम नहीं
तुर्कमान गेट इलाके में सरकारी जमीन पर अवैध फैक्टरी चलाने की शिकायत पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कार्रवाई की थी। मोहम्मद कमरान सिविलियन वेलफेयर चैरिटेबल ट्रस्ट नाम की संस्था ने शिकायत की थी कि 1584, ग्राउंड फ्लोर, गली पीपल वाली, पहाड़ी भोजला में गैरकानूनी फैक्टरी चल रही है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने जांच की और रिपोर्ट दी कि अब वहां कोई औद्योगिक काम नहीं हो रहा है। पहले यह फैक्टरी हल्के इंजीनियरिंग काम करती थी, जो व्हाइट कैटेगरी में आती है, यानी इसमें प्रदूषण की संभावना नहीं होती। इसलिए कोई जुर्माना या कार्रवाई की जरूरत नहीं है। मामला साल 2024 का है। एनजीटी ने 8 अगस्त 2024 को शिकायत पर नोटिस जारी किया। बाद में 16 जुलाई 2025 को आदेश दिया कि डीपीसीसी जांच करे कि क्या पहले पर्यावरण नियमों का उल्लंघन हुआ था। डीपीसीसी के सीनियर पर्यावरण अभियंता सिद्धार्थ गौतम ने रिपोर्ट में बताया कि 12 नवंबर 2025 को जांच की गई। वहां कोई मशीन (जैसे मेटल कटिंग या पंचिंग) नहीं मिली। अब वहां कुछ परिवार रह रहे हैं।
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-आरोप लगाया था कि पड़ोसी घर में निर्माण के लिए अवैध बोरवेल से पानी निकाला जा रहा
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
दिल्ली के ब्रह्मपुरी इलाके में एक घर में अवैध तरीके से भूजल निकालने के मामले में दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने सख्त कदम उठाया है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेश पर जांच के बाद बोरवेल को सील कर दिया गया। साथ ही मालिक पर 35 हजार रुपये से ज्यादा का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया गया। यह कार्रवाई मोहम्मद दानिश नाम के व्यक्ति की शिकायत पर हुई, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि पड़ोसी घर में निर्माण के लिए अवैध बोरवेल से पानी निकाला जा रहा है। मामला दिल्ली के चौहान बांगर, गली नंबर 16, डी-23 वाले प्लॉट का है। एनजीटी ने जुलाई 2024 में इसकी जांच के लिए एक संयुक्त समिति बनाई, जिसमें उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जिलाधिकारी और डीपीसीसी शामिल थे।
डीपीसीसी को नोडल एजेंसी बनाया गया। 6 सितंबर 2024 को जांच टीम ने मौके पर जाकर देखा कि प्लॉट को चार हिस्सों में बांटा गया है और सभी मालिक भाई हैं। कोने वाले हिस्से डी-23/4 में एक बोरवेल मिला, जो 7-8 साल पुराना था। मालिक मुन्नवर अली मौजूद थे, लेकिन उन्होंने बोरवेल की अनुमति का कोई कागज नहीं दिखाया। उन्होंने बताया कि वे रोजाना 10 मिनट के लिए बोरवेल चलाते हैं। टीम ने पाया कि यह बोरवेल घरेलू इस्तेमाल के लिए था, लेकिन बिना सरकारी मंजूरी के चल रहा था, जो पर्यावरण कानून का उल्लंघन है। जांच के दौरान सीलिंग नहीं हुई, लेकिन सीलमपुर के एसडीएम ने वादा किया कि वे जल्द कार्रवाई करेंगे। उसके बाद 9 सितंबर 2024 को एसडीएम ने बोरवेल को सील कर दिया। बाद में 18 सितंबर को एक सुधार पत्र जारी कर व्यावसायिक इस्तेमाल को घरेलू इस्तेमाल में बदल दिया गया।
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ऐसे मामलों में प्रदूषक भुगतान के सिद्धांत पर जुर्माना लगाने की नीति
डीपीसीसी के वरिष्ठ पर्यावरण अभियंता एमएस रावत ने रिपोर्ट में कहा कि यह मामला भूजल के अवैध दोहन से जुड़ा है, जो दिल्ली में पानी की कमी को बढ़ा रहा है। जांच में यह भी पता चला कि इसी संपत्ति पर कड़कड़डूमा कोर्ट में एक अलग मुकदमा चल रहा है, जिसमें अवैध निर्माण और संपत्ति विवाद का जिक्र है। डीपीसीसी ने ऐसे मामलों में प्रदूषक भुगतान के सिद्धांत पर जुर्माना लगाने की नीति अपनाई है। अधिकारियों ने बताया कि आगे भी ऐसी शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई की जाएगी, ताकि पानी की बचत हो सके।
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तुर्कमान गेट इलाके में औद्योगिक काम नहीं
तुर्कमान गेट इलाके में सरकारी जमीन पर अवैध फैक्टरी चलाने की शिकायत पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कार्रवाई की थी। मोहम्मद कमरान सिविलियन वेलफेयर चैरिटेबल ट्रस्ट नाम की संस्था ने शिकायत की थी कि 1584, ग्राउंड फ्लोर, गली पीपल वाली, पहाड़ी भोजला में गैरकानूनी फैक्टरी चल रही है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने जांच की और रिपोर्ट दी कि अब वहां कोई औद्योगिक काम नहीं हो रहा है। पहले यह फैक्टरी हल्के इंजीनियरिंग काम करती थी, जो व्हाइट कैटेगरी में आती है, यानी इसमें प्रदूषण की संभावना नहीं होती। इसलिए कोई जुर्माना या कार्रवाई की जरूरत नहीं है। मामला साल 2024 का है। एनजीटी ने 8 अगस्त 2024 को शिकायत पर नोटिस जारी किया। बाद में 16 जुलाई 2025 को आदेश दिया कि डीपीसीसी जांच करे कि क्या पहले पर्यावरण नियमों का उल्लंघन हुआ था। डीपीसीसी के सीनियर पर्यावरण अभियंता सिद्धार्थ गौतम ने रिपोर्ट में बताया कि 12 नवंबर 2025 को जांच की गई। वहां कोई मशीन (जैसे मेटल कटिंग या पंचिंग) नहीं मिली। अब वहां कुछ परिवार रह रहे हैं।