Kidney Racket: आरोपी करते थे ऐसा खेल... किडनी लेने वाले और डोनर की बना देते एक लाइफस्टाइल, हर कोई खा जाता धोखा
यह गिरोह 2021 से चल रहा है। आरोपी का गोरखधंधा दिल्ली में ठीक से नहीं चल पाता था तो ये गुजरात व अन्य राज्यों में चले जाते थे। जांच में और भी चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।
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किडनी रैकेट को लेकर जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है वैसे-वैसे नए खुलासे हो रहे हैं। जांच में सामने आया है कि किडनी लेने वाले की जिस तरीके की लाइफस्टाइल होती थी, वह उसी तरीके की लाइफ स्टाइल डोनर की बना देते थे। इससे डोनर व प्राप्तकर्ता के कागज व शक्ल देखने में एक जैसी लगती थी। इस कारण दोनों डोनर व प्राप्तकर्ता की फाइल पर किसी को संदेह नहीं होता था। गिरोह में ये काम विजय कश्यप करता था। गिरोह कारपोरेट तरीके से चलता था। गिरोह के सभी सदस्यों को अलग-अलग काम दिया गया था।
गिरोह के सदस्य इस तरह कागजात तैयार करते थे कि कोई भी भ्रम में पड़ जाए। उनके द्वारा तैयार किए गए कागज तो किडनी देने वाले के ही होते थे, मगर उस पर फोटो किडनी लेने वाले के परिवार के सदस्य की होती थी। अपराध शाखा के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली समेत कुछ राज्यों के अस्पतालों की इंटरनल कमेटी फाइल को अनुमति दे देती है। कुछ राज्यों में शहर के सीएमओ के सदस्य वाली कमेटी अनुमति देती है। दोनों कमेटियों के सदस्यों को नोटिस दिया जाएगा और उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। सभी अस्पतालों की किडनी प्रत्यारोपण की फाइलें मंगाई जा रही हैं। पुलिस अधिकारी ने बताया कि गिरोह सरगना संदीप रोहिणी निवासी एक प्राप्तकर्ता से 35 लाख रुपये ले लिए थे। मगर किडनी प्रत्यारोपण हो उससे पहले ही नकली कागजात पकड़े गए। ऐसे में पीड़ित को किडनी नहीं मिली और उसकी मौत हो गई।
अधिकारियों ने बताया कि ये गिरोह 2021 से चल रहा है। संदीप यहां पर किडनी देने आया था और फिर उसने अपनी किडनी दान की थी। आरोपी का गोरखधंधा दिल्ली में ठीक से नहीं चल पाता था तो ये गुजरात व अन्य राज्यों में चले जाते थे। वहां से अस्पतालों के जरिए ओरिजनल पेपर बनाते थे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, चीका प्रकाश ने मेडिकल डिग्री ले रखी है। उस डिग्री के आधार पर ये किडनी प्रत्यारोपण करता था। पुलिस इस बात का पता कर रही है कि आरोपी ने फर्जी डिग्री कहां से और कैसे ली।
सोशल मीडिया के जरिए डोनर से करते थे संपर्क
किडनी रैकेट गिरोह गिरोह के सदस्य सोशल मीडिया से दानदाताओं से संपर्क करते थे। साथ ही उनकी खराब आर्थिक स्थिति का फायदा उठाते हुए किडनी देने के लिए 5 से 6 लाख रुपये देने के बहाने उनका शोषण करते थे। वे मरीज / दानकर्ताओं के जाली दस्तावेज तैयार कर उन्हें करीबी रिश्तेदार दिखाते थे। कुछ मामलों में, उन्होंने फर्जी दस्तावेज बनाए और किसी भी संदेह से बचने के लिए विभिन्न राज्यों के अस्पताल में प्रत्यारोपण कराने के लिए दानकर्ता और मरीज को दूसरे राज्य का निवासी दिखाया। जाली दस्तावेज के आधार पर, उन्होंने अपनी प्रारंभिक चिकित्सा जांच कराई और विभिन्न अस्पतालों में प्रत्यारोपण प्राधिकरण समिति की जांच में पास होने की व्यवस्था की।
अलग-अलग राज्यों के 11 अस्पतालों में किडनी प्रत्यारोपण
अब तक यह पता चला है कि सिंडिकेट ने विभिन्न राज्यों के 11 अस्पतालों में किडनी प्रत्यारोपण में सफलता हासिल की थी। इसके अलावा, किडनी ट्रांसप्लांट करवाने वाले पांच मरीजों और दो डोनर की पहचान की गई है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है। अब तक अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के 34 मामलों की पहचान की गई है।
प्रत्येक ट्रांसप्लांट के लिए करीब 35-40 लाख वसूलते थे
नोएडा, यूपी निवासी संदीप आर्य इस किडनी रैकेट का सरगना है और पब्लिक हेल्थ में एमबीए है। उसने फरीदाबाद, दिल्ली, गुरुग्राम, इंदौर और वडोदरा के विभिन्न अस्पतालों में ट्रांसप्लांट को-ऑर्डिनेटर के रूप में काम किया। वह मरीजों से संपर्क करता था और उन अस्पतालों में किडनी ट्रांसप्लांट की व्यवस्था करता था, जहां उसे ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर के रूप में तैनात किया गया था। वह प्रत्येक किडनी ट्रांसप्लांट के लिए करीब 35-40 लाख लेता था। जोकि मरीजों द्वारा भुगतान किया गया अस्पताल का खर्च, डोनर की व्यवस्था, आवास और सर्जरी के लिए आवश्यक अन्य कानूनी दस्तावेज शामिल होते थे। वह प्रत्येक किडनी ट्रांसप्लांट से 7 से 8 लाख बचाता था। वह पहले दिल्ली के शालीमार बाग थाना क्षेत्र में क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी के मामले में शामिल था।
ये आरोपी भी हैं शामिल
उत्तराखंड निवासी 10 वीं पास देवेंद्र संदीप आर्य का साला है। इसने अपना खाता उपलब्ध कराया था। इस खाते में शिकायतकर्ता के पति से 7 लाख रुपये आए थे। उसका काम आरोपी संदीप आर्य की सहायता करना और उसके निर्देश पर भुगतान प्राप्त करना था। वह प्रत्येक मामले के लिए 50,000 रुपये लेता था।
लखनऊ (यूपी) निवासी विजय कुमार कश्यप उर्फ सुमित वह स्नातक है। शुरू में वह पैसे के लिए अपनी किडनी देने के लिए आरोपी संदीप आर्य के संपर्क में आया। इसके बाद, वह धोखाधड़ी में लिप्त हो गया। और संदीप आर्य के साथ काम करता था। उसे हर केस में 50,000 रुपये मिलते थे। उसका काम मरीज/रिसीवर की जीवनशैली और पारिवारिक पृष्ठभूमि के अनुसार डोनर के व्यक्तित्व को निखारना और संदीप के निर्देश पर सर्जरी से पहले डोनर की सुविधा प्रदान करना था।
आगरा (यूपी) निवासी पुनीत कुमार 2018 में अस्पताल प्रबंधन की डिग्री हासिल की और उसके बाद विभिन्न राज्यों के 7 प्रतिष्ठित अस्पतालों में नौकरी की। वह संदीप के निर्देश पर मरीज और डोनर के बीच संबंध साबित करने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करता था। वर्तमान में वह यूपी के आगरा के एक अस्पताल में ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर के पद पर काम कर रहा था। संदीप उसे प्रत्येक फाइल के लिए 50,000 हजार से 1 लाख रुपये देता था।
मुंबई निवासी मोहम्मद हनीफ शेख पेशे से दर्जी है और घाटे के बाद, वह फेसबुक पेज के माध्यम से संदीप आर्य के संपर्क में आया और पैसे के लिए अपनी किडनी दान कर दी। इसके बाद, वह अपराध में लिप्त हो गया और संदीप आर्य के लिए काम करता था। उसका काम आरोपी संदीप आर्य को मरीज या डोनर उपलब्ध कराना था। हैदराबाद निवासी चीका प्रशांत संदीप आर्य के माध्यम से अपनी किडनी दान की और उसके बाद वह उसके साथ जुड़ गया। संदीप ने उसे अस्पतालों में पहुंच पाने के अवसर के रूप में देखा।