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तिहाड़ में बड़ा बदलाव, अपराधियों की मुसीबत

Thu, 11 Dec 2014 01:45 PM IST
Updated Thu, 11 Dec 2014 01:45 PM IST
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according to  prisoners name prison will change.

तिहाड़ और रोहिणी जेल में बंद कैदियों की गुटबाजी को खत्म करने के लिए और बड़े मामलों के आरोपी एक साथ एक ही जेल में बंद न हों इसके लिए तिहाड़-प्रशासन ने अब कैदियों के नाम के पहले अक्षर के अनुसार जेल की संख्या तय करने का निर्णय लिया है।

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इसी माह के आखिर तक कैदियों के नाम के पहले अक्षर के अनुसार जेल की संख्या तय होने की उम्मीद है। हालांकि महिला जेल और सजायाफ्ता कैदियों की जेलों में किसी तरह के बदलाव का प्रस्ताव नहीं है। वर्ष-2004 तक तिहाड़ में कैदियों के नाम के पहले अक्षर के अनुसार ही जेल संख्या तय की जाती थी।
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आदतन अपराधी किस्म के कैदियों की गुटबंदी को तोड़ने और जेल में बंद कैदियों के बीच बार-बार हो रहे हिंसक झड़पों को देखते हुए तिहाड़-प्रशासन ने तय किया है कि एक ही मामले में बंद कैदियों को एक-दूसरे से दूर रखने के लिए उन्हें अलग-अलग जेल में रखा जाए।

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इन जेलों में बंद हैं 14 हजार से ज्यादा कैदी

according to  prisoners name prison will change.

सजायाफ्ता कैदियों के लिए बने जेल संख्या दो और 21 वर्ष की उम्र तक के कैदियों के लिए निर्धारित जेल संख्या सात में कोई परिवर्तन नहीं करने का प्रस्ताव है। तिहाड़ और रोहिणी जेल में इस समय करीब 14 हजार से अधिक विचाराधीन और सजायाफ्ता कैदी अलग-अलग मामलों में बंद हैं।

यह व्यवस्था लागू होने के बाद रोहिणी जेल में बंद कैदियों को ज्यादा दिक्कत होगी क्योंकि यहां उन्हीं कैदियों को रखा गया है जिनके मामले की सुनवाई रोहिणी अदालत में हो रही है।

अपराधी किस्म के कैदियों के गठजोड़ को खत्म करने और पारदर्शिता लाने के लिए कैदियों के नाम के पहले अक्षर के अनुसार कैदियों की जेल संख्या तय करने का निर्णय लिया गया है। रोहिणी जेल में बंद कैदियों के मामलों की सुनवाई दूसरी अदालतों में भी होती है।

कई बार कैदी जेल स्थानांतरण की अर्जी देकर भी जेल बदलवाते हैं, लिहाजा जेल से अदालत लाने-जाने के लिए दिल्ली पुलिस की बसें होती हैं। इसलिए नई व्यवस्था होने के बाद किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी। उम्मीद है कि इसी माह के आखिरी तक नई व्यवस्था को लागू कर दी जाए।

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