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Academic Calender 2023: सभी 45 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में सीयूईटी यूजी की मेरिट से ही दाखिला
Thu, 16 Feb 2023 09:27 AM IST
पूजा त्रिपाठी
सीमा शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
सीमा शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Thu, 16 Feb 2023 09:27 AM IST
सार
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने शैक्षणिक सत्र 2023-24 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सिफारिशों के तहत दाखिला, पाठ्यक्रम, कोर्स आदि पर तैयारी शुरू कर दी है।
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CUET 2022
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) चेयरमैन प्रोफेसर एम जगदीश कुमार ने कहा है कि देश के सभी 45 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में स्नातक प्रोग्राम के पहले वर्ष में दाखिला सीयूईटी यूजी 2023 की मेरिट स्कोर के आधार पर ही मिलेगा।
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यूजीसी चेयरमैन और सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की मंगलवार को आगामी शैक्षणिक सत्र 2023-24 में दाखिला और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (एनईपी)को लागू करने को लेकर बैठक आयोजित हुई। इसी में यूजीसी ने सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया है कि वे स्नातक प्रोग्राम के पहले वर्ष में दाखिला सीयूईटी यूजी की मेरिट के आधार पर देंगे।
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इसके अलावा इसी सत्र से चार वर्षीय डिग्री प्रोग्राम, मल्टीपल एंट्री-एग्जिट, अकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट, एक साथ दो डिग्री की पढ़ाई, इंटर्नशिप, रिसर्च, छात्रों को सामाजिक सरोकार, भारतीय परंपरा व संस्कृति से जोड़ने, वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई और विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर डयूल डिगी, एकल डिग्री शुरू करनी होगी।
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विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने शैक्षणिक सत्र 2023-24 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सिफारिशों के तहत दाखिला, पाठ्यक्रम, कोर्स आदि पर तैयारी शुरू कर दी है। यूजीसी और केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की बैठक में सभी आगामी शैक्षणिक सत्र में दाखिला से लेकर राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू करने आदि पर बात हुई।
यूजीसी ने कुलपतियों को निर्देश दिया है कि दाखिला सीट सीयूईटी यूजी की मेरिट से होंगे। सभी विश्वविद्यालयों को अकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (एबीसी)के लिए पंजीकरण करना जरूरी होगा और छात्रों को भी इसकी जानकारी देनी होगी। अपनी वेबसाइट पर एबीसी की जानकारी अपलोड करनी पड़ेगी। स्नातक, स्नातकोत्तर प्रोग्राम में छात्रों को उनकी सुविधा के अनुसार मल्टीपल एंट्री-एग्जिट की सुविधा के साथ अकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट का लाभ भी देना होगा, ताकि उनकी डिग्री में कोर्स और ज्ञान में बढ़ोतरी हो सके।
बहुविकल्पीय, कौशल, मानवीय मूल्य, समाज व देश से जोड़ने पर काम:
स्नातक और स्नातकोत्तर प्रोग्राम के छात्रों को बहुविकल्पीय पढ़ाई का मौका, मार्केट डिमांड के आधार पर कौशल विकास, मानवीय मूल्य, समाज, लोगों व देश के प्रति जिम्मेदारियों के आधार पर पढ़ाई करवानी होगी। अधिक से अधिक सर्टिफिकेट कोर्स, डिप्लोमा कोर्स शुरू करने होंगे, ताकि छात्रों के पास अधिक मौके उपलब्ध हों। छात्रों के संपूर्ण विकास पर काम करना होगा।
इंटर्नशिप, में रिसर्च और कम्यूनिटी आउटरीच भी जरूरी:
स्नातक प्रोग्राम के छात्रों क अब इंटर्नशिप अनिवार्य होगी। इसमें छात्रों को किताबी और मार्केट डिमांड के आधार पर कौशल विकास के साथ प्रशिक्षण मिलेगा। इसके अलावा छात्रों को फील्ड में जाकर कम्यूनिटी आउटरीच और प्रोजेक्ट पर काम करना होगा। उद्योगों के साथ मिलकर इंटर्नशिप प्रोग्राम चलाये जा सकते हैं। इसके अलावा रिसर्च क्षेत्र में इंटर्नशिप शुरू की जाएगी। यह दो शिक्षण संस्थान मिलकर कर सकते हैं। इसके लिए एडवांस रिसर्च सेंटर खोले जाएंगे। तनाव दूर करने, योग, ध्यान, पर्सनल डेवलेपमेंट आदि पर काम होगा।
ऑनलाइन कोर्स भी जरूरी:
छात्रों को डिग्री प्रोग्राम में कोर्स, माध्यम चुनने की आजादी होगी। इसमें डिस्टेंस लर्निंग मोड, ऑनलाइन डिग्री शामिल है। विश्वविद्यालयों को ऑनलाइन काेर्स में छात्रों को जोड़ने के लिए स्वयं पर काम करना होगा।
शिक्षकों की कमी न बने बाधा:
यूजीसी ने विश्वविद्यालयों को सभी खाली पद जल्द से जल्द भरने का निर्देश दिया है। इसके अलावा प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस को लागू करने और इस योजना के तहत अपने -अपने क्षेत्रों के विशेषज्ञों को भर्ती कर सकते हैं। पूर्व छात्रों का भी सहयोग लिया जा सकता है।