ऐसे मिला देश की राजधानी को पहला ब्रांड एंबेसडर
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आपको जानकर हैरानी होगी कि देश की राजधानी दिल्ली में कभी कोई स्पोर्ट्स का ब्रांड एंबेसडर नहीं रहा। जब दिल्ली सरकार को इस बात का एहसास हुआ तो उसने बिना देर किए रेसलर सुशील कुमार को राजधानी का पहला ब्रांड एंबेसडर बनाने की घोषणा कर दी।
ग्लासगो में संपन्न हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में दिल्ली के आठ खिलाड़ियों ने पदक हासिल किए। इनमें से एक सुशील कुमार भी हैं। सरकार ने इन आठों खिलाड़ियों को सम्मानित करने का फैसला किया और इसी मौके पर एलजी नजीब जंग ने सबके सामने सुशील कुमार को दिल्ली का ब्रांड एंबेसडर बनने का प्रस्ताव दिया। उन्होंने कहा, 'क्या आप इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं?'
सुशील कुमार ने सबके सामने कहा कि वह खेल को आगे बढ़ाने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। इस तरह एक पुरस्कार सम्मान में देश की राजधानी को अपना पहला ब्रांड एंबेसडर मिला। एलजी ने सुशील कुमार को दिल्ली का स्पोर्ट्स ब्रांड एंबेसडर नियुक्त करने के साथ ही दिल्ली के स्पोर्ट्स बजट को दोगुना करते हुए इसे 22 लाख से बढ़ाकर 44 लाख कर दिया।
गौरतलब है कि सुशील कुमार 2004, 2008 और 2012 के ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। इतना ही नहीं वह देश के एकमात्र कुश्तीबाज हैं, जिन्होंने देश को एक के बाद एक ओलंपिक मेडल दिलाए हैं।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि ब्रांड एंबेसडर बनने का क्या मतलब होता है? अगर नहीं तो पढ़िए आगे...
क्यों बनाए जाते हैं ब्रांड एंबेसडर
ब्रांड एंबेसडर को गुडविल एंबेसडर भी कहा जाता है। अक्सर गैर-लाभकारी संस्थानों में इनकी नियुक्ति की जाती है। ब्रांड एंबेसडर का प्रयोग संस्था के संदेश को लोगों तक पहुंचाना होता है। प्रायः किसी सेलिब्रिटी या चर्चित चेहरे को ही गुडविल एंबेसडर बनाया जाता है ताकि उसकी इमेज का फायदा संस्था के फंड और दान की मात्रा को बढ़ाने के लिए किया जा सके।
ब्रांड एंबेसडर को संस्था की छवि सुधारने के लिए भी नियुक्त किया जाता है। यही कारण है कि ब्रांड एंबेसडर बनाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि उस सेलिब्रिटी की जनता के बीच कैसी इमेज है। ताकि संस्था अधिक से अधिक लोगों तक अपना काम और अपनी बात आसानी से पहुंचा सके।
एंबसेडर की वजह से होता है पर्यटन का प्रमोशन
जहां तक किसी प्रदेश के ब्रांड एंबेसडर होने की बात है उसका भी यही काम होता है। विभिन्न कार्यक्रमों और विज्ञापन के माध्यम से ये प्रदेश की ब्रांडिंग करते हैं। प्रदेश से जुड़कर यहां पर्यटन को बढ़ावा देने का काम करते हैं।
राज्य में क्या खास है, कहां विकास की संभावनाएं हैं ये सब विभिन्न माध्यमों से लोगों को बताने में ब्रांड एंबेसडर की भूमिका काफी अहम होती है। जितना बड़ा स्टार प्रचारक होता है उतना ही उस राज्य के बारे में लोग जानते हैं। कई बार बहुत दुर्गम स्थानों पर भी जाकर ये लोग ब्रांड प्रमोशन करते हैं।
ब्रांड एंबेसडर पर भी हो चुका है विवाद
आमतौर पर ब्रांड एंबेसडर की नियुक्ति किसी राज्य या संस्था की छवि को चमकाने के लिए किया जाता है लेकिन भारत में ब्रांड एंबेसडरों को लेकर कई बार विवाद भी होते रहे हैं।
सबसे पहले बात करते हैं महानायक अमिताभ बच्चन की। फिलहाल वह गुजरात के ब्रांड एंबेसडर हैं। अपनी बुलंद आवाज में जब वह टीवी या रेडियो पर ये कहते हैं कि 'कुछ दिन तो गुजारिए गुजरात में' तो आप उन्हें नजरअंदाज नहीं कर पाते। हालांकि बिग बी के गुजरात के ब्रांड एंबेसडर बनने पर काफी विवाद हुआ था।
2012 के ओलंपिक में बैडमिंटन का कांस्य पदक जीतने वाली सायना नेहवाल आंध्र प्रदेश की ब्रांड एंबेसडर हैं। उनसे पहले आंध्र की ब्रांड एंबेसडर सानिया मिर्जा थीं। फिलहाल सानिया मिर्जा तेलंगाना की ब्रांड अंबेसडर हैं। सानिया की नियुक्ति पर भी काफी विवाद हो चुका है।
कुछ ब्रांड एंबेसडर ऐसी भी
अपने पैशन और परफेक्शन के लिए मशहूर आमिर खान भी ब्रांड एंबेसडर की सूची में शामिल हैं। वह भारत सरकार के पर्यटन विभाग के लिए बनाए गए ऐड 'इंक्रेडिबल इंडिया' को प्रमोट करते देखे जा सकते हैं। इस ऐड में उन्होंने अतिथि देवो भव का नारा बुलंद किया है।
'बादशाह खान' शाहरुख खान कोलकाता के ब्रांड एंबेसडर हैं। आईपीएल में जब उन्होंने कोलकाता नाइट राइडर्स के नाम से अपनी टीम बनाई तो पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने उन्हें कोलकाता का ब्रांड एंबेसडर बना दिया।
ब्रांड अंबेसडर की सूची में बॉलिवुड अभिनेत्री प्रिटी जिंटा का भी नाम शामिल है। हिमाचल प्रदेश का होने के कारण प्रीति जिंटा अपने राज्य का प्रमोशन कर रही हैं। हालांकि इसके बदले वह सरकार से कुछ नहीं लेतीं।