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बिन शराब भी लिवर बीमार: 40 प्रतिशत भारतीय MASLD के शिकार, देश के 27 शहरों में हुआ अध्ययन

Sun, 01 Mar 2026 11:02 PM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विकास कुमार Updated Sun, 01 Mar 2026 11:02 PM IST
सार

रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। यहां 41.3 प्रतिशत लोगों में फैटी लिवर पाया गया, जबकि 4.8 प्रतिशत में फाइब्रोसिस के लक्षण मिले। अध्ययन में भोपाल और श्रीनगर जैसे शहरों में स्थिति और भी गंभीर पाई गई। भोपाल में 51.8 प्रतिशत और श्रीनगर में 54.4 प्रतिशत लोगों में फैटी लिवर के संकेत मिले। 

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About 40 percent of adults in inida suffer from fatty liver
फैटी लिवर - फोटो : adobe stock

विस्तार

देश के करीब 40 प्रतिशत वयस्क फैटी लिवर की समस्या से जूझ रहे हैं। एक नए शोध के अनुसार, 10 में से चार भारतीय वयस्क मेटाबॉलिक डिसफंक्शन एसोसिएटेड स्टिएटोटिक लिवर डिजीज (एमएएसएलडी) से प्रभावित हो सकते हैं। इस बीमारी को पहले नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज के नाम से जाना जाता था। इसमें लिवर में असामान्य चर्बी जमा हो जाती है, जो मोटापा, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों से जुड़ा है। यह शोध इसी महीने मेडिकल जर्नल लैंसेट क्षेत्रीय स्वास्थ्य-दक्षिण पूर्व एशिया में प्रकाशित हुआ है।

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 देश के 27 शहरों में हुआ अध्ययन
अध्ययन फिनोमा इंडिया कोहार्ट पर की गई है, जिसमें देश के 27 शहरों के 10,267 वयस्कों को शामिल किया। लिवर की जांच फाइब्रोस्कैन मशीन से की गई, जो बिना सर्जरी के लिवर के चर्बी और फाइब्रोसिस का पता लगाती है। ऐसे में रिपोर्ट के अनुसार, 38.9 प्रतिशत प्रतिभागियों में फैटी लिवर के संकेत मिले। इनमें से 6.3 प्रतिशत लोगों में लिवर फाइब्रोसिस पाया गया, जो लिवर में शुरुआती स्थायी नुकसान का संकेत है। यह आगे चलकर सिरोसिस या लिवर कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है। इसके अलावा कुछ इलाकों जैसे असम, दिल्ली, उत्तर व मध्य भारत में यह समस्या ज्यादा दिखी।

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दिल्ली में 41.3 प्रतिशत फैटी लिवर रिकॉर्ड
रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। यहां 41.3 प्रतिशत लोगों में फैटी लिवर पाया गया, जबकि 4.8 प्रतिशत में फाइब्रोसिस के लक्षण मिले। अध्ययन में भोपाल और श्रीनगर जैसे शहरों में स्थिति और भी गंभीर पाई गई। भोपाल में 51.8 प्रतिशत और श्रीनगर में 54.4 प्रतिशत लोगों में फैटी लिवर के संकेत मिले। विशेषज्ञों के अनुसार यह बीमारी केवल शराब पीने से नहीं होती, बल्कि मोटापा, डायबिटीज शरीर में मेटाबॉलिक गड़बड़ियों और जीवनशैली या पर्यावरणीय कारण की वजह से भी हो सकती है। चौंकाने वाली बात यह है कि सामान्य बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) वाले कई लोगों में भी फैटी लिवर पाया गया। इसका कारण शरीर के अंदर जमा होने वाली विसरल फैट है, जो बाहर से दिखाई नहीं देती लेकिन गंभीर जोखिम पैदा करती है।

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बचाव की राह
शोधकर्ताओं ने इससे बचने के लिए बताया कि मोटापा, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करें। नियमित जांच करवाएं, खासकर हाई-रिस्क ग्रुप वाले। उन्होंने सरकार और स्वास्थ्य विभागों को फैटी लिवर की स्क्रीनिंग को डायबिटीज/हृदय रोग कार्यक्रमों में शामिल करने का प्रस्ताव जाहिर किया है। जागरूकता फैलाने पर जोर दिया गया।

डॉक्टर क्या बोले
फैटी लिवर शुरुआती दौर में बिना लक्षण के बढ़ता है, इसलिए लोग अक्सर इसे नजरअंदाज कर देते हैं। नियमित जांच, वजन नियंत्रण, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम बेहद जरूरी है। अगर समय रहते इस बीमारी पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में लिवर फेलियर और लिवर कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है। -डॉ. पीयूष रंजन, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट

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