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दिल्ली: निजामुद्दीन मरकज को लेकर बड़ा खुलासा, हॉटस्पॉट बनने के बावजूद जारी रहा 16 हजार लोगों का आवागमन

Sun, 03 May 2020 03:36 PM IST
प्राची प्रियम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्राची प्रियम Updated Sun, 03 May 2020 03:36 PM IST
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About 16 thousand people visited Nizamuddin markaz between 13 to 24 march
निजामुद्दीन मरकज - फोटो : PTI

कोरोना वायरस संक्रमण के फैलने के दौरान सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बनकर सामने आए निजामुद्दीन मरकज के बारे में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। पुलिस द्वारा चलाए गए सघन जांच अभियान में पता चला कि हॉटस्पॉट घोषित किए जान बाद 13 से 24 मार्च के बीच उस इलाके में कम से कम 16500 लोगों का आना-जाना लगा रहा। 

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पुलिस अधिकारी ने नाम न उजागर करने की शर्त पर बताया कि पुलिस ने मरकज में शामिल लोगों के भौतिक सत्यापन से लेकर मोबाइल फोन के डाटा तक को ट्रेस कर जानकारी जुटाई है। 
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उन्होंने बताया कि मरकज की छह मंजिला इमारत के अंदर जितने भी फोन नंबर सक्रिय थे, उनके आधार पर पुलिस ने वहां आने वाले लोगों की संख्या का अंदाजा लगाया। इसकी रिपोर्ट केंद्र और राज्य सरकार को सौंप दी गई है। 
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उन्होंने बताया कि मरकज में शामिल होने के लिए दिल्ली के बाहर से करीब 1000 लोग आए थे। पिछले चार सप्ताह में पुलिस ने सभी के कॉल डिटेल खंगाले, जिससे यह पता चला कि मरकज से निकलने के बाद वे करीब 15000 अन्य लोगों के सीधे संपर्क में आए थे। 

वहीं मरकज में शामिल होने वाले कुछ लोग ऐसे थे जो आयोजन के बाद भी मस्जिद में ही रुके रहे, जबकि कुछ लोग दिल्ली के अन्य हिस्सों में घूमते रहे। उनके संपर्क में आए सभी 15000 लोगों से पुलिस ने फोन पर संपर्क किया है। 

अधिकारी ने बताया कि इस जांच को पूरी करने में पुलिस की सभी इकाईयों को लगाया गया था। इन्हीं टीमों ने स्वास्थ्य विभाग को संदिग्ध मामलों की जानकारी दी जिसके बाद चिन्हित लोगों को आवश्यक्तानुसार आइसोलेट या क्वारंटीन होने के निर्देश दिए गए या अस्पताल में भर्ती कराया गया। 

कॉल ट्रेसिंग में शामिल एक अन्य पुलिस अधिकारी ने बताया कि उन्होंने मरकज के आसपास की जगहों के तब के आंकड़े निकाले, जब वहां सामाजिक दूरी जैसे किसी प्रतिबंध को लागू नहीं किया गया था। उन्होंने बताया कि 13 मार्च के बाद उन इलाकों में आने वालों की संख्या में भारी वृद्धि दर्ज की गई। 
 

पुलिस जमात के पदाधिकारियों के खिलाफ सख्त धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच कर रही है। वहीं जमात का कहना है कि पहले दिल्ली सरकार ने 24 मार्च को लॉडाउन घोषित किया था, उसके बाद 25 मार्च से देश भर में यह लागू हो गया। इस वजह से जमात में आए बाहरी लोग वहीं फंस गए थे। 

29 से 31 मार्च के बीच पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने मरकज से करीब 2300 लोगों को निकलवाकर जगह को खाली करवाया था। इसके बाद अप्रैल के पहले सप्ताह में भी दिल्ली की अन्य मस्जिदों में छिपे 200 जमातियों को पुलिस ने पकड़ा। 

मालूम हो कि दिल्ली में कोरोना संक्रमण का सबसे बड़ा खतरा मरकज के कारण ही फैला है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक अब तक कुल संक्रमण में से करीब 30 प्रतिशत मरीज ऐसे हैं जो मरकज के कारण कोरोना की चपेट में आए हैं। 

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