आरुषि-हेमराज मर्डर केस : ‘तलवार की गोल्फ स्टिक से सीबीआई ने की थी छेड़छाड़’
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आरुषि-हेमराज मर्डर केस में ‘अतीत का झरोखा’ बताता है कि डिफेंस ने कई बार अपने मजबूत तथ्यों को सीबीआई कोर्ट के समक्ष रखा, बावजूद इसके तलवार दंपति को उम्रकैद की सजा मिली।
डिफेंस ने सीबीआई पर राजेश तलवार की गोल्फ स्टिक से छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया था। 30 अक्तूबर 2013 को डिफेंस द्वारा कोर्ट के समक्ष दी गई दलील से पाठकों को रू-ब-रू कराती अमर उजाला के सीनियर रिपोर्टर संजय शिशौदिया की रिपोर्ट।
डिफेंस की फाइनल बहस का यह चौथा दिन था। अपनी बहस में डिफेंस ने सीबीआई पर गोल्फ स्टिक के साथ छेड़छाड़ किए जाने का आरोप लगाया। डिफेंस का कहना था कि सील किए जाने के बाद भी सीबीआई ने गोल्फ स्टिक मालखाने में जमा न कराकर अपने आफिस में रखीं।
यही कारण रहा कि गोल्फ स्टिक सील किए जाने और उसके रखने के संबंध में कोई रजिस्टर मेनटेन नहीं किया गया। डिफेंस के अधिवक्ता तनवीर अहमद मीर, मनोज शिशौदिया और सत्यकेतु सिंह ने कोर्ट को बताया कि 2009 में ही सीबीआई ने राजेश तलवार की गोल्फ स्टिक सील कर ली थीं।
पहली बार 2009 में सीबीआई ने गोल्फ स्टिक तलवार दंपति से मांगी थी
इसके बावजूद उन्हें मालखाने में जमा नहीं कराया गया। सीबीआई आफिस में ही गोल्फ स्टिक रखी गईं। इसकी पुष्टि इस बात से भी होती है कि सीबीआई ने न तो मालखाने का रजिस्टर कोर्ट में पेश किया और न ही मालखाना इंचार्ज को कभी गवाही के लिए बुलाया। डिफेंस का आरोप था कि इस बीच सीबीआई ने गोल्फ स्टिक से छेड़छाड़ की।
डिफेंस के अधिवक्ताओं का कहना था कि पहली बार 2009 में सीबीआई ने गोल्फ स्टिक तलवार दंपति से मांगी थी। इसके अगले ही दिन राजेश तलवार ने अपने क्लीनिक पर बुलाकर सीबीआई इंस्पेक्टर रिछपाल सिंह को गोल्फ स्टिक सौंप दी थीं।
मौके पर ही उन्हें सील कर दिया गया था। सीबीआई का कहना था कि हत्या 3 और 5 नंबर की गोल्फ स्टिक से हुई हैं, क्योंकि जांच के बाद इन दोनों स्टिक पर मिट्टी कम पाई गई है। बाद में जब गोल्फ स्टिक लैब में जांच को भेजी गईं तो वहां से आई रिपोर्ट भी चौंकाने वाली थी।
स्टिक पर मिट्टी का कम होना बताया गया था
रिपोर्ट में 3 और 6 नंबर की स्टिक पर मिट्टी का कम होना बताया गया था। डिफेंस का कहना था कि एक लैब से दूसरी लैब ले जाते समय भी स्टिक से मिट्टी कम हो सकती है।
डिफेंस ने सीबीआई के स्वतंत्र गवाह लक्ष्मण सिंह के उस बयान पर भी सवाल उठाया, जिसमें उसने कहा था कि ड्राइवर उमेश ने उसके सामने ही दोनों गोल्फ स्टिक को पहचाना था।
डिफेंस का तर्क था कि जब 2009 में ही गोल्फ स्टिक सील कर दी गईं और इसके बाद पहली बार 2013 में उन्हें कोर्ट के समक्ष खोला गया, तब 2 अगस्त 2010 को लक्ष्मण के सामने उमेश को वह गोल्फ स्टिक भला किस प्रकार दिखा दी गईं।