दिल्ली चुनाव की तैयारियों में जुट गई है 'आप'
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महाराष्ट्र और हरियाणा में चुनाव जीतने के बाद भाजपा अब दिल्ली में जल्द से जल्द चुनाव कराने को आतुर है। इसका कारण है कि दोनों राज्यों में हुए चुनाव के कारण जो मोदी लहर की बयार हर ओर बह रही है उसका ज्यादे से ज्यादा फायदा उठाया जा सके।
इन दिनों दोनों राज्यों में हुए चुनाव परिणाम से उत्साहित भाजपा अब दिल्ली की गद्दी पर भी आसीन होने के सपने बुन रही है। लेकिन उसका यह सपना इतनी आसानी से पूरा होता नहीं दिखता। इसका कारण है दिल्ली में भाजपा की कड़ी प्रतिद्वंद्वी आम आदमी पार्टी, जिसने दिल्ली में चुनाव की तैयारी पहले से ही शुरू कर दी है।
दिल्ली चुनाव में उठेंगे स्थानीय मुद्दे
आप दिल्ली के चुनाव को पूरी तरह स्थानीय बनाने की कोशिश कर रही है। इसका तात्पर्य यह है कि आप दिल्ली के चुनाव में स्थानीय मुद्दे उठाकर जनता के बीच जाना चाहती है। इस तरह आप चुनाव में स्थानीय मुद्दे उठाकर दिल्ली में होने वाले चुनाव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रभाव को कम करने की फिराक में है।
आप के वरिष्ठ नेता ने बताया कि अगर दिल्ली में चुनाव की घोषणा होती है तो यहां भी भाजपा पीएम से महाराष्ट्र और हिरायाणा जैसी ही रैलियां कराएगी। अपनी तैयारियों पर बोलते हुए आप नेता ने कहा कि इसलिए हम चुनाव प्रचार के दौरान जनता को यह याद दिलाएंगे कि विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री की कोई भूमिका नहीं होती।
आप नेता ने आगे कहा कि महाराष्ट्र और हरियाणा में भाजपा का कोई सीएम उम्मीदवार न होने के बावजूद भाजपा केवल मोदी के दम पर जीती है। भाजपा ने चुनाव से दस दिन पहले प्रचार और रैलियों के माध्यम से लोगों का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की गई। लेकिन इन जगहों पर राज्य सरकारों के प्रति घोर असंतोष था।
इसके साथ ही दोनों राज्यों में मजबूत विपक्ष भी नहीं था। दिल्ली में आप नई पार्टी है, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़ी है। दिल्ली में होने वाले चुनाव में स्थानीय मुद्दे ज्यादा हावी रहेंगे। यहां जो प्रचार होगा उसमें मोदी नहीं बीजेपी बनाम अरविंद केजरीवाल की लड़ाई होगी।
'बीजेपी को मौके मिलने पर भी उसने नहीं किया काम'
सोमवार को कौशांबी में आप की सीनीयर लीडरशिप एकत्र हुई थी जहां आगामी दिल्ली चुनाव में होने वाले चुनाव प्रचार पर विचार विमर्श किया गया। एक वरिष्ठ आप नेता ने कहा कि, लोकपाल बिल पर कांग्रेस के साथ असहमति के कारण केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया था।
तब से ही यानी 14 फरवरी से दिल्ली सरकार विहीन है। आप के एक सीनीयर नेता ने कहा कि सरकार विहीन दिल्ली पर केंद्र का पूरी तरह से नियंत्रण है। भाजपा ने अपने लोकसभा मेनिफेस्टो में दिल्ली के लोगों से बिजली की दरों में 30 प्रतिशत तक कटौती का वादा किया था।
भाजपा के ये काम करने का मौका भी था जब अरुण जेटली ने दिल्ली का बजट पेश किया था। लेकिन बीजेपी ने ऐसा कुछ नहीं किया। यही सारी बातें हम जनता तक लाएंगे।
आप अपने प्रचार अभियान में बीजेपी नेतृत्व और पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित में समानताएं भी बताएगी। इस तरह 'आप', कांग्रेस और बीजेपी एक-दूसरे से कितनी मिलती-जुलती हैं ये भी बताएगी।
आप के सीनीयर नेता मनीष सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली के लोग जानते हैं कि नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री पद के लिए चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। प्रदेश में कोई भी भाजपा नेता चाहे वो जगदीश मुखी ही क्यों न हों केजरीवाल की लोकप्रियता की बराबरी नहीं कर सकते।