AAP विधायकों का नहीं चल रहा खर्च, मांगा और वेतन
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आम आदमी पार्टी के विधायकों ने वेतन बढ़ाने की मांग सरकार के सामने रख दी है। विधायकों का तर्क है कि इलाके में ऑफिस खोलने, शादी-जन्म दिन अटेंड करने में पैसे खर्च होते हैं।
दिल्ली के एमएलए का मूल वेतन 12 हजार समेत यात्रा, टेलीफोन खर्च, बिजली-पानी बिल, दो डाटा एंट्री ऑपरेटर, सचिवालय खर्च मिलाकर 88 हजार रुपये मिलते हैं। जबकि विधानसभा में ऑफिस खोलना पड़ता है तो ऑफिस लेने और उसमें कर्मी रखने पर भी राशि खर्च होती है।
दिल्ली सरकार के अधिकारी स्वीकारते हैं कि करीब डेढ़ दर्जन विधायकों ने यह मांग अलग-अलग स्तर पर की है। विधायकों का वेतन पिछली बार 4 नवंबर, 2011 को बढ़ा था। उससे पूर्व 9 फरवरी, 2007 को वेतन-भत्ते बढ़ाए गए थे। ऐसे में सीएमओ के वरिष्ठ अधिकारी कह रहे हैं कि कार्यालय के लिए खर्च जैसे कुछ जरूरी मांग पूरी हो सकी है।
विधायक नितिन त्यागी, सौरभ भारद्वाज ने कहा है कि खर्च की तुलना में वेतन कम है। ऑफिस खोलने, उसमें कर्मी रखने के लिए राशि चाहिए। दिनभर मिलने वाले आते हैं तो चाय-पानी खर्च के अलावा शादी-पार्टी में जाने पर भी खर्च होता है।
माकन बोले वीआईपी कल्चर की आदत हो गई है इन्हें
हम ईमानदारी से काम करने वाले लोग हैं, इसलिए वेतनमान में इजाफा होना चाहिए। सूत्र बताते हैं कि पिछले ट्रेंड को देखते हुए जल्द वेतन बढ़ाने का फैसला लिया जा सकता है। इस बार विधायकों का वेतन एक लाख रुपये से ऊपर जाने की उम्मीद है।
वहीं अजय माकन का कहना है कि आप के नेता व एमएलए आम आदमी की तरफ न रहना चाहते हैं और दिखना चाहते हैं। ये वो पार्टी है वीआईपी कल्चर के खिलाफ चुनाव जीतकर आए हैं। सुपर एमएलए बनाने के लिए 21 विधायकों को संसदीय सचिव बनाकर कार्यालय व वाहन की सुविधाएं दी। अब महज चार महीने में वेतन बढ़ाने की मांग करने लगे।
वहीं बीजेपी विधायक कहते हैं कि देखिए आम आदमी पार्टी के ये नेता जब चुनाव लड़ रहे थे तब आम आदमी की बात करते थे। इन्हें नहीं पता था कि कितना वेतन मिलता है और क्या काम करना होता है। विधायक बनना समाज सेवा का काम है, इसे मजदूरी से नहीं जोड़ना चाहिए। वेतन बढ़ाने की मांग गलत कर रहे हैं।