राष्ट्रपति शासन के खिलाफ कोर्ट जाएगी AAP
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आम आदमी पार्टी दिल्ली में राष्ट्रपति शासन के खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी कर रही है। पार्टी का मानना है कि केंद्र द्वारा दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगाना गलत है। अरविंद केजरीवाल की ओर से कहा गया है कि एक बहुमत वाली सरकार के निर्णय को उप राज्यपाल मानने के लिए बाध्य हैं।
केजरीवाल का कहना है कि कोई भी सरकार बहुमत में है या नहीं इसका फैसला विधानसभा में विश्वास मत द्वारा होता है या फिर वित्त विधेयक पास कराकर। हमारी सरकार ने विधानसभा में विश्वास मत भी जीता है और वित्त विधेयक को भी पास करवा लिया था। फिर दिल्ली सरकार की सिफारिश को उप राज्यपाल ने किस नियम के तहत नहीं माना।
केजरीवाल ने कहा कि संविधान के मुताबिक एक बहुमत वाली सरकार की हर सिफारिश को मानने के लिए दिल्ली के उप राज्यपाल बाध्य हैं।
उप राज्यपाल नजीब जंग ने शुरू की बैटिंग
राष्ट्रपति शासन लगने के बाद दिल्ली की सत्ता संभालते ही उपराज्यपाल नजीब जंग ने सोमवार को फैसलों की शुरुआत कर दी है। साथ ही मंगलवार को सभी विभाग प्रमुखों की बैठक बुलाई है। बैठक में केजरीवाल सरकार के फैसलों की समीक्षा की जा सकती है।
उप राज्यपाल ने पहली बैठक में मिलेनियम पार्क डिपो नौ महीने में कैसे हटेगा या क्या-क्या दिक्कतें आएंगी, इस पर फैसला करने के लिए समिति गठित कर दी है।
पर्यावरण का हवाला देकर 1000 बसों के लिए बने डीटीसी डिपो को हटाने का फैसला अरविंद केजरीवाल ने किया था जबकि पुरानी सरकार ने जमीन नहीं मिलने का हवाला देकर लैंड यूज बदलाव की तैयारी कर रखी थी।
उप राज्यपाल कर सकते हैं सलाहकार की नियुक्ति
दिल्ली में पुलिस, भूमि और सेवा से जुड़े फैसलों को छोड़कर बाकी फैसले कैबिनेट करती थी। अब फैसले उपराज्यपाल करेंगे। विभाग प्रमुख अपने मंत्रियों की बजाय मुख्य सचिव के माध्यम से उपराज्यपाल को फाईल भेजेंगे।
ऐसे में उपराज्यपाल सचिवालय के पर काम का भार बढ़ेगा। सरकार की व्यवस्था से जुड़े अधिकारी बताते हैं कि ऐसे में पूर्व आईएएस अधिकारी समेत विशेषज्ञ लोगों की टीम को उपराज्यपाल सलाहकार के तौर पर नियुक्त कर सकते हैं। जिससे काम आसान हो सके।
तीन साल तक लग सकता है राष्ट्रपति शासन
लोकसभा व दिल्ली विधानसभा के पूर्व सचिव एसके शर्मा बताते हैं कि संविधान की धारा 356 के तहत राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगता है तो वह 6 महीने के लिए होता है।
दिल्ली में राष्ट्रपति शासन संविधान के अनुच्छेद 239एबी के तहत लगा है। इसमें प्रावधान है कि पहली बार एक साल के लिए लगेगा। बाद में एक-एक साल के लिए दो बार राष्ट्रपति शासन बढ़ाया भी जा सकता है। हालांकि केंद्रीय कैबिनेट अगर सिफारिश करे तो राष्ट्रपति शासन कभी भी हट सकता है।