आप विधायक के पति को जमानत, पुलिस को फटकार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आरके पुरम से आम आदमी पार्टी की विधायक प्रमिला टोकस के पति धीरज टोकस को सरकारी काम में बाधा पहुंचाने और एससी-एसटी एक्ट के दो मामलों में शनिवार को अदालत से जमानत मिल गई।
अदालत ने पुलिस की दलीलों को खारिज करते हुए आरोपी को जमानत प्रदान की। गिरफ्तारी से पहले आरोपी को नोटिस नहीं दिए जाने को लेकर कोर्ट ने पुलिस को फटकार भी लगाई।
पटियाला हाउस अदालत के ड्यूटी एमएम धीरज मित्तल ने आरोपी धीरज टोकस को 40-40 हजार रुपये के निजी मुचलकों व इतनी ही राशि के दो जमानती की शर्त पर जमानत प्रदान की।
पुलिस ने धीरज को शुक्रवार शाम गिरफ्तार कर शनिवार को कोर्ट में पेश किया। आरोपी को रिमांड पर लेने के बजाय पुलिस ने उसे न्यायिक हिरासत में भेजने का आग्रह किया।
इस पर कोर्ट ने पूछा कि अगर रिमांड नहीं लेना था, तो फिर गिरफ्तार ही क्यों किया। जमानत याचिका पर बहस करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फूलका, एसपी कौशल व सीएल गुप्ता ने कहा कि यह मामला सात साल से कम सजा वाली श्रेणी में आता है।
नोटिस ने देने पर पुलिस को लगी फटकार
ऐसे मामलों में आरोपी को गिरफ्तार करने की जरूरत नहीं होती। अगर पुलिस गिरफ्तार करती है, तो पहले आरोपी को इसका नोटिस दिया जाना चाहिए।
अदालत ने पूछा कि क्या आरोपी को गिरफ्तारी से पहले नोटिस दिया गया था। इसके जवाब में पुलिस ने कहा कि नोटिस नहीं दिया गया।
गौरतलब है कि आप विधायक प्रमिला टोकस और उनके पति धीरज टोकस के खिलाफ पीडब्ल्यूडी के जूनियर इंजीनियर ज्ञानी राम की शिकायत पर 15 दिसंबर 2015 को सरकारी काम में बाधा पहुंचाने, धमकी देने, जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल करने संबंधी धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई थी।
दूसरा मामला पुलिस ने आरके पुरम निवासी महिला गीता की शिकायत पर 18 दिसंबर को दर्ज किया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि आरोपियों ने उसके देवर बलदेव सिंह के घर पर आकर धमकी दी, गाली-गलौच की, जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल किया, घर के भीतर रखे सामान का वीडियो बनाया और बलदेव सिंह को दुष्कर्म के मामले में फंसाने की धमकी दी।