'अंग्रेजी बनाम हिंदी नहीं, ये है सीसैट की लड़ाई'
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आम आदमी पार्टी (आप) ने सीसैट पर केंद्र सरकार के प्रस्ताव को छात्र आंदोलन के साथ धोखा बताया है।
आप प्रवक्ता योगेंद्र यादव ने कहा कि छात्रों की मांग को दरकिनार करते हुए केंद्र सरकार ने सीसैट में ऐसा सुधार किया है, जिसकी मांग छात्रों ने की ही नहीं थी। छात्रों की मूल मांगों पर सरकार ने ध्यान तक नहीं दिया। योगेंद्र यादव बुधवार को हनुमान रोड स्थित पार्टी कार्यालय पर मीडिया से बात कर रहे थे।
यादव के मुताबिक, छात्र आंदोलन शुरू होने के साथ केंद्र के कई मंत्रियों ने इस बारे में सार्वजनिक बयान दिए। सभी ने छात्रों से वादा किया था कि उनकी सारी मांगें पूरी होंगी। लेकिन अंत में सरकार ने सीसैट पर जो बदलाव किया, छात्रों ने उसकी मांग की ही नहीं थी।
रास्ता भटक गई छात्रों की मांग!
छात्रों ने सीसैट को भेदभाव रहित करने की मांग की थी। इसके साथ भारतीय भाषाओं के साथ यूपीएससी परीक्षा में कई स्तरों में भेदभाव का सवाल भी उठाया। लेकिन सरकार ने इस दिशा में ध्यान तक नहीं दिया।
इस दौरान यादव ने साफ किया कि मसला अंग्रेजी बनाम हिंदी का नहीं है। सवाल एक भाषा के ऊपर दूसरी भाषा को वरीयता देने का है।
‘आप’ छात्र आंदोलन से उठे सवालों के साथ खड़ी है। साथ ही केंद्र सरकार से मांग करती है कि इस साल की प्रारंभिक परीक्षा स्थगित करने के साथ सरकार ऐलान करे कि सीसैट के अंकों के आधार पर मेरिट तय नहीं होगी। सीसैट सिर्फ क्वालीफाइंग रहेगा।
'22 भाषाओं में कराई जाए परीक्षा'
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार संसद को यकीन दिलाए कि यूपीएससी की पूरी परीक्षा प्रणाली की समीक्षा होगी।
इतना ही नहीं, एक साल के भीतर भेदभाव रहित प्रणाली तैयार कर ली जाएगी। यादव ने मांग की कि यूपीएससी परीक्षा संविधान की आठवीं अनुसूची में दर्ज सभी 22 भाषाओं में कराई जानी चाहिए।