विश्वास पर संजय सिंह का पलटवार, कहा-जीत के हजार मां-बाप, पर अनाथ है हार
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एमसीडी चुनाव में करारी हार के बाद आम आदमी पार्टी (आप) में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। शुक्रवार को पहले कुमार विश्वास ने आप पर बंद कमरे में फैसले लेने और मनमाने तरीके से टिकट बेचने जैसे कई गंभीर आरोप लगाए। इसके बाद आप के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने कुमार विश्वास पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि जीत के हजार मां-बाप होते हैं, लेकिन हार अनाथ होती है।
हालांकि, संजय ने सीधे तौर पर कुमार विश्वास का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने कहा कि पार्टी नेताओं को सुधरने की जरूरत है। संजय सिंह ने कहा कि सार्वजनिक मंच से बात करने पर कोई रास्ता नहीं निकलेगा। पार्टी ईवीएम का सवाल उठाने के साथ ही संगठन के स्तर पर संवादहीनता भी खत्म करेगी।
कुमार विश्वास के पंजाब चुनाव प्रचार में न बुलाने के आरोप पर संजय सिंह ने कहा कि यह फैसला अकेले उनका नहीं था। प्रचार अभियान के लिए पार्टी ने रणनीति तैयार की थी। दार्शनिक लहजे में उन्होंने कहा कि जीत के हजार मां-बाप होते हैं, हार अनाथ होती है। मिशन विस्तार के तहत दूसरे राज्यों में जनाधार मजबूत किया जाएगा। अभी दूसरे जगहों पर चुनाव लड़ने का फैसला फिलहाल होल्ड कर लिया गया है।
संजय ने पहली बार माना कि पंजाब व गोवा के बाद दिल्ली में अपेक्षित सफलता न मिलने की वजह ईवीएम के साथ-साथ पार्टी स्तर पर भी चूक हुई है। फिलहाल पार्टी नेताओं को सुधरने की जरूरत है। आपस में लड़ने के लिए पार्टी का गठन नहीं हुआ था। नेताओं को एकजुट होना पड़ेगा।
'लड़ने की वजह बंद कमरे में रखें अपनी बात'
उन्होंने कहा कि वे सार्वजनिक मंचों पर लड़ने की जगह बंद कमरे में अपनी बात रखें, जिससे सहमति बनाई जा सके। वहीं, नेताओं को कार्यकर्ताओं से संवाद भी बनाना है, जिससे कार्यकर्ताओं को उनका पुराना जज्बा वापस दिलाया जा सके। संजय ने माना कि पार्टी का कार्यकर्ताओं से संपर्क कटा हुआ है।
उन्होंने कहा कि संगठन स्तर पर आई कमियों का आकलन किया जा रहा है। बृहस्पतिवार रात करीब चार घंटे बैठक चली। नेताओं ने पार्टी के प्रदर्शन पर अपनी-अपनी राय रखी। प्रदेश संयोजक के तौर पर गोपाल राय के नाम पर चर्चा हुई। इस पर भी चर्चा हुई कि चार साल के सियासी सफर में पार्टी के नाम ढेरों उपलब्धियां भी रही हैं।
उन्होंने कहा कि आप ने दिल्ली में दो बार सरकार बनाई। इसके चार सांसद हैं। पंजाब में मुख्य विपक्षी दल बनने के साथ दिल्ली नगर निगम चुनाव में 40 से ज्यादा सीटें हासिल की। देश की राजनीति में इस तरह का मुकाम हासिल करने वाली आप पहली पार्टी है।