क्या AAP में बढ़ रहा मतभेद?
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दिल्ली जीत के बाद आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता योगेंद्र यादव बेशक चार राज्यों में पार्टी के विस्तार का दावा कर रहे हैं। लेकिन पार्टी के भीतर इस मसले पर एक राय नहीं है।
नेताओं का बड़ा तबका फिलहाल दिल्ली में ही काम करने के हक में है। दिल्ली यूनिट से जुड़े सक्रिय कार्यकर्ताओं में विस्तार का खासा विरोध है। आप की दिल्ली यूनिट के सक्रिय कार्यकर्ताओं का मानना है कि पिछले दिल्ली चुनाव से पहले तिनका-तिनका जोड़कर पार्टी खड़ी की गई।
दिल्ली के कार्यकर्ताओं का इसमें खासा योगदान था, लेकिन लोकसभा चुनाव में जाने से उनके काम पर पानी फिर गया। चुनाव में करारी हार से पार्टी की लोकप्रियता कम हुई।
दोबारा दिल्ली में पार्टी खड़ी करने में हुई बड़ी मेहनत
एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि संसदीय चुनाव के बाद पार्टी को खड़ा करने में केजरीवाल समेत दिल्ली के कार्यकर्ताओं को दुबारा एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ा। इसमें 90 फीसदी से ज्यादा कार्यकर्ता दिल्ली से थे।
इसका असर चुनाव में मिली ऐतिहासिक जीत के तौर पर दिखा। ऐसे में आप की सरकार को सिर्फ दिल्ली में काम करना चाहिए, जिससे पांच साल में इसे मॉडल के तौर पर विकसित किया जा सके।
देशव्यापी प्रसार की कोशिश से पार्टी को नुकसान मुमकिन हो सकता है। वहीं वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने बताया कि देशव्यापी विस्तार की फिलहाल कोई योजना नहीं है। इसी महीने पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होनी है। इसमें इस बारे में विचार किया जाएगा। हालांकि, पार्टी की राय है कि अभी दिल्ली में ही काम किया जाए।