दागी डाक्टरों को केजरीवाल सरकार में मिला इनाम!
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आम आदमी पार्टी ने अपने एक हालिया फैसले से यह साबित कर दिया है कि उसकी कथनी और करनी में कितना अंतर है। दिल्ली के लोगों के लिए पूरी ईमानदारी से काम करने का दावा करने वाली आप सरकार अपने एक फैसले से आलोचनाओं के भंवर में फंस गई।
अपने एक ताजा फैसले में केजरीवाल सरकार ने दो ऐसे डॉक्टरों को मेडिकल मामलों की अनदेखी करने वालों पर निगाह रखने को कहा है जो खुद ही ऐसे मामलों में दोषी पाए गए हैं।
23 सदस्यों वाली दिल्ली मेडिकल काउंसिल में नियुक्त 4 डॉक्टरों में से दो ऐसे हैं जिनपर मेडिकल केसों में लापरवाही का आरोप झेल रहे हैं और उनपर केस भी चल रहा है।
4 में से 2 नामित सदस्य हैं आरोपी
दरअसल डीएमसी रजिस्टर्ड डॉक्टरों और मेडिकल एजुकेशन का नियमन बोर्ड है। इसके लिए दिल्ली सरकार ने डॉ अतुल गुप्ता, डॉ अरुण कुमार गुप्ता, डॉ चंद्रप्रकाश और डॉ योगेश कुमार सरीन को नामित किया है।
इन चारों में से डॉ चंद्रप्रकाश और डॉ सरीन के ऊपर चिकित्सा में लापरवाही के आरोप हैं। गौरतलब है कि सुंदर लाल जैन हॉस्पिटल के निदेशक डॉ प्रकाश को 13 जुलाई, 2001 के दिन 30 वर्षीय शमशाद अली नामक शख्स जिसका एक्सीडेंट हो गया था, उसके मौत के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
डॉ प्रकाश पर आरोप है कि शमशाद का एक्सीडेंट होने पर उसके इलाज के लिए डॉक्टर ने 25 हजार रुपए मांगे जिसका इंतजाम शमशाद न कर पाया और अस्पताल में उसका दाखिला नहीं हुआ।
जिसके बाद उसे दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उसकी मौत हो गई। दूसरे अस्पताल के डॉक्टरों का कहना था कि एक छोटे ऑपरेशन में शमशाद की जान बचाई जा सकती थी पर ऐसा नहीं किया गया।
पिछले साल 6 मई को सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टर के खिलाफ लगे आरोपों को हटने से इंकार कर दिया और आदेश दिया कि आईपीसी के प्रावधानों के तहत चार्जशीट दायर की जाए।
स्वास्थ्य मंत्री को नहीं मालूम आरोपी हैं डॉक्टर
इसी तरह से लोकनायक जय प्रकाश नारायण अस्पताल में पीडिएट्रिक्स सर्जरी डिपार्टमेंट के हेड डॉक्टर सरीन पर भी मेडिकल लापरवाही के गंभीर आरोप हैं।
डॉ सरीन के ऊपर रविंद्रनाथ दूबे नाम के व्यक्ति ने आरोप लगाया था कि साल 2005 में डॉक्टर ने उसके बेटे की गलत सर्जरी कर दी थी। दूबे ने तत्कालीन सीएम शीला दीक्षित से डॉ सरीन के खिलाफ शिकायत की थी। दूबे ऑटो रिक्शा ड्राइवर है।
बच्चे का इलाज आज भी एम्स में चल रहा है। दूबे का कहना है कि डॉ सरीन ने उसके दो साल के बेटे की एक किडनी निकाल ली जबकि उसकी जरूरत नहीं थी। वहीं उस छोटे से बच्चे की आठ सर्जरियां भी कर दीं। दूबे ने डॉ सरीन के खिलाफ अंतिम सांस तक लड़ने की बात कही है।
अंग्रेजी अखबार के मुताबिक स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने बताया कि वह सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश से अंजान हैं। यह मामला पेंडिंग है। वह यही कह सकते हैं कि डॉ प्रकाश पर कोर्ट ने अभी तक आरोप तय नहीं किए हैं। और डॉ सरीन के मामले की उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
बता दें कि 20 मार्च को दिल्ली हाई कोर्ट ने काउंसिल में नए डॉक्टरों की नियुक्ति वाली अधिसूचना पर रोक लगाई थी। मामले की अगली सुनवाई 21 अप्रैल को है।