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आप विधायक सुरेंद्र सिंह को मारपीट मामले में मिली जमानत

Sat, 22 Aug 2015 10:24 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 22 Aug 2015 10:24 PM IST
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AAP commando MLA Surendra Singh gets bail in assault case.

एनडीएमसी कर्मचारी से मारपीट व जाति सूचक शब्द का प्रयोग करने के मामले में गिरफ्तार विधायक सुरेंद्र सिंह व दो अन्य आरोपियों को अदालत ने शनिवार को जमानत दे दी।

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पुलिस ने कोर्ट में इन्हें पेश कर न्यायिक हिरासत में भेजने का आग्रह किया था। पटियाला हाउस अदालत की महानगर दंडाधिकारी गोमती मनौचा ने आरोपी विधायक सुरेंद्र सिंह, उनके ड्राइवर पंकज व सहायक प्रवीण को 30-30 हजार के निजी मुचलके व इतनी ही राशि के जमानती की शर्त पर जमानत दी है।

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अदालत ने कहा एससी-एसटी प्रताड़ना रोकथाम अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों का गठन किया गया है, लेकिन इन मामलों में मजिस्ट्रेट द्वारा आरोपियों को जमानत देने के अधिकार पर कोई रोक नहीं है।
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बचाव पक्ष ने पेश की दलील

AAP commando MLA Surendra Singh gets bail in assault case.

जमानत याचिका पर बहस करते हुए बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश गुप्ता ने कहा कि एससी-एसटी अधिनियम के तहत यह मामला दर्ज किया गया है।

इसके मद्देनजर इस कोर्ट को इस मामले में हिरासत देने या उसे सुनने का अधिकार नहीं है। सुरेंद्र सिंह जनप्रतिनिधि है और दिल्ली छावनी क्षेत्र से विधायक है।

वह सेना का कमांडो रह चुका है और मुंबई हमले के दौरान आतंकियों का सामना भी कर चुका है। उसे केवल राजनीतिक दुर्भावना के चलते फर्जी मामले में फंसाया जा रहा है।

दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अधिवक्ता अनुपम शर्मा ने कहा कि विधायक ने अपने रसूख का इस्तेमाल कर चार अगस्त 2015 को सफदरजंग रोड पर सरकारी कर्मचारियों को काम करने से रोका।

'आरोपियों के फरार होने की आशंका नहीं'

AAP commando MLA Surendra Singh gets bail in assault case.

एक कर्मचारी से मारपीट की और इनके खिलाफ जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल किया। इसके मद्देनजर उसे जमानत प्रदान न की जाए, क्योंकि गवाहों को धमकाकर साक्ष्य से भी छेड़छाड़ कर सकता है।

अदालत ने कहा कि यह कोर्ट आरोपियों की हिरासत बढ़ाने के साथ उन्हें जमानत प्रदान करने में सक्षम है। आरोपियों के खिलाफ लगी किसी भी धाराओं के तहत सात साल से अधिक की सजा नहीं हो सकती।

इसके अलावा पुलिस के आरोप को मान भी लिया जाए तो भी आरोपियों के खिलाफ अपहरण का मामला नहीं बनता। इसके अलावा आरोपियों के फरार होने की आशंका नहीं है। इसलिए जमानत दी जा सकती है।

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