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संदीप की तुलना गांधी और नेहरु से कर फंसे आशुतोष, राष्ट्रीय महिला आयोग भेजेगा नोटिस

Sun, 04 Sep 2016 10:21 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 04 Sep 2016 10:21 AM IST
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aap ashutosh left alone with his views on sandeep kumar, kapil mishra writes blog against him
आशुतोष

संदीप कुमार मामले पर आप नेता आशुतोष को राष्ट्रीय महिला आयोग नोटिस भेजेगा। बता दें‌ कि इस मामले के सामने आने के बाद आशुतोष ने ब्लॉग लिखकर संदीप कुमार की तुलना महात्मा गांधी और जवाहर लाल नेहरु से की थी।

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आप नेता संदीप कुमार का सेक्स स्कैंडल सामने आने के बाद, जिस तरह आम आदमी प्रवक्ता आशुतोष ने उनकी तरफदारी करते हुए ब्लॉग लिखा था, उसके बाद से विपक्ष के साथ ही अपनी पार्टी के नेताओं ने उनकी आलोचना शुरु कर दी।
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गौरतलब है कि आशुतोष ने अपने ब्लॉग में संदीप कुमार की तुलना महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू से कर दी थी। यही वजह है कि किसी को भी ये बात नहीं पची और अब इस मुद्दे पर आशुतोष अपनी पार्टी में ही अलग-थलग पड़ गए हैं।
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एक ओर जहां डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने आशुतोष के इस ब्लॉग के बारे में कहा ‌है यह आशुतोष की निजी राय है और पार्टी इसका समर्थन नहीं करती। वही दिल्ली जल बोर्ड के अध्यक्ष और दिल्ली के संस्कृति मंत्री कपिल मिश्रा ने तो पूरा ब्लॉग ही बा और बापू को समर्पित करते हुए आशुतोष के राय की आलोचना की है।

पढ़ें कप‌िल म‌िश्रा का ब्लॉग

aap ashutosh left alone with his views on sandeep kumar, kapil mishra writes blog against him
कपिल मिश्रा

बा और बापू का संबंध समझना आसान नहीं है। बा के बिना बापू संभव ही नहीं । बा ने कुछ पत्र भी लिखे बापू को, उनको पढ़े तो शायद प्रेम और प्यार की अलग ही समझ शुरू हो जाये।

आज अचानक किसी बात को सीधे बापू से जोड़ देना , उनके जीवन के किसी एक पक्ष से जोड़ देना आसान जरूर है पर सही नहीं। उस ऐनक, लाठी, धोती वाले महात्मा के जीवन से सीखने के लिए भी कई जीवन चाहिये। बा जैसा समर्पण व प्रेम … ये सब शांत चित्त से सोचने , मनन करने के लिए है।

अभी कुछ दिन पहले मैं साबरमती आश्रम गया था, बापू के जीवन के बारे में लिखा है वहां, उनकी बातें, उनके लेख, उनके सत्याग्रह … जीवन में, अपने अंदर सत्य के लिए आग्रह। खुद के अंदर अहिंसा का भाव।

बापू सिर्फ अंग्रेजो से थोड़ी आज़ादी दिलाने आये थे, वो जो आज़ादी दिलाने आये थे वो जिस स्वराज, सत्य व अहिंसा की बात करते थे वो अपनानी इतनी मुश्किल थी कि हमने बापू को ही छोड़ दिया।

जिन्होंने बापू को मारा वो किस बात से डरते थे? क्या ताकत थी उस बूढ़े में कि गोडसे जैसो को लगा कि ख़तम ही करना पड़ेगा? एक मुट्ठी नमक से दुनिया के बादशाहों को हिलाने के लिए जो नैतिक, आध्यात्मिक, सामाजिक शक्ति व स्वीकृति बापू के पास थी वो नकली हों ही नहीं सकती।

बापू के जीवन से तुलना तब की जाये जब ऐसा तराजू हो जो नाप सके, तौल सके। बापू ने तो एक बच्चे को ज्यादा गुड़ मत खाओ ये कहने में भी दस दिन लगा दिए, क्योंकि पहले खुद ज्यादा गुड़ खाने की आदत पर संयम किया फिर सीख दी।

दुसरो पर जय से पहले खुद को जय करना। बापू तो कुंजी है, चाबी है, दुविधा दूर करने के लिए है … बापू पर्दा नहीं है। ढंकने और छिपाने के लिए बापू नहीं है।

गांधी जी से तुलना तो ऐसी बात है जैसे प्रेम की तुलना व्यभिचार से की जाये गंदगी ढंकना और सफाई करना दो अलग अलग बातें है।
ईश्वर अल्लाह तेरो नाम , सबको सन्मति दे भगवान

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