मोइली पर 52 हजार करोड़ के घोटाले का आरोप
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आम आदमी पार्टी ने केंद्र की यूपीए सरकार पर एक बार फिर वार किया है। पार्टी के सीधे निशाने पर पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली हैं। वरिष्ठ नेता प्रशांत भूषण का कहना है कि चुनाव आचार संहिता लागू होने के बावजूद वीरप्पा मोइली जाते-जाते अपनी पसंद की तेल कंपनियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।
भूषण ने मोइली पर 52 हजार करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया। मीडिया से बात करते हुए प्रशांत भूषण ने कहा कि मुंबई के समुंद्री तट पर 1993 में पन्ना मुक्ता व रत्ना जैसे तमाम पेट्रोलियम ब्लॉक एस्सार कंपनी को दिया थे। तत्कालीन केंद्र सरकार ने एस्सार के साथ समझौते पर दस्तखत होने से पहले पन्ना मुक्ता ब्लॉक के आवंटन की सीबीआई जांच कराई।
इसमें घोटाले की बात सामने आई। इससे रत्ना ब्लॉक का आवंटन भी रोक दिया था। भूषण का आरोप है कि अब 21 साल बाद वीरप्पा मोइली पुरानी दर पर आवंटित करने की कोशिश कर रहे हैं। मंत्रालय के अधिकारियों के विरोध के बावजूद उन्होंने दो अप्रैल को कैबिनेट नोट भी तैयार करवा लिया है।
एस्सार को 52 हजार करोड़ रुपये का होगा फायदा
भूषण ने बताया कि कोल ब्लॉक आवंटन के मामले में अटार्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट का बताया था कि समझौते पर दस्तखत होने से पहले इसे रद्द किया जा सकता है। लेकिन कैबिनेट नोट तैयार करने के मामले में अटार्नी जनरल ने मंत्रालय को सलाह दी है कि मंत्रालय इसे खुद ही तय कर सकता है।
भूषण ने बताया कि मोइली को यह कोशिश मंत्रालय के अधिकारियों की उस सलाह को दरकिनार करने की है, जिसमें उन्हें सलाह दी गई थी कि फिलहाल ब्लॉक के आवंटन का कोई कानूनी आधार नहीं है। मंत्रालय के एक अधिकारी ने इस फैसले का लिखित रूप में विरोध किया था।
भूषण ने बताया कि कैबिनेट नोट में पुरानी दर से ब्लॉक आवंटन का प्रावधान है। इस बीच न सिर्फ पेट्रोलियम का दाम बढ़ा है, बल्कि डालर भी महंगा हुआ है। इससे एस्सार को करीब 52 हजार करोड़ रुपये पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। भूषण का कहना है कि पार्टी इसके खिलाफ चुनाव आयोग से शिकायत करेगी। भूषण ने इस दौरान दर निर्धारण से जुड़े दस्तावेज भी पेश किए।
रिलायंस को 80 हजार करोड़ का फायदा
प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि मोइली एस्सार के अलावा रिलायंस इंडस्ट्र्री को भी फायदा पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2002 में केंद्र सरकार ने रिलायंस को केजी बेसिन में गैस के कुएं दिए थे। समझौते की शर्तों के मुताबिक इनसे गैस का दोहन करना था।
इसके बावजूद रिलायंस ने अभी तक गैस के कई कुओं पर काम नहीं किया। इस हिसाब से संविदा रद्द होनी चाहिए थी। आरोप है कि मोइली ने इसके लिए मार्च के आखिर में कैबिनेट तैयार करवाया। इसमें रिलायंस को एक साल की छूट दी गई है। यह समय कैबिनेट की मंजूरी के बाद से माना जाएगा।
भूषण का कहना है कि अगर रिलायंस को नई दरों से गैस आपूर्ति की इजाजत मिलती है तो नए प्रावधान से रिलायंस को 80 हजार करोड़ रुपये का फायदा होगा।