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आप की चुनावी रणनीति पूर्ण राज्य के दर्जे पर टिकी
Sat, 16 Feb 2019 08:18 AM IST
राजेश सैनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
Published by: राजेश सैनी
Updated Sat, 16 Feb 2019 08:18 AM IST
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अरविंद केजरीवाल
- फोटो : ani
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कांग्रेस से गठबंधन की खत्म होती संभावना के बीच आम आदमी पार्टी (आप) अकेले दम पर लोकसभा चुनाव के मैदान में उतरने की रणनीति पर काम कर रही है। आप की कोशिश भाजपा विरोधी वोटों का बंटवारा रोकने की है। पार्टी एक तरफ दिल्ली की मौजूदा समस्याओं के लिए भाजपा को कटघरे में खड़ा करेगी, वहीं कांग्रेस पर भी इसकी जिम्मेदारी डाली जाएगी। इसी रणनीति पर काम करते हुए आप शुरुआती तौर पर पूर्ण राज्य के दर्जे को हवा देगी।
लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी पार्टी दिल्ली के साथ पंजाब, हरियाणा व गोवा में बेहद संजीदगी से अभियान को आगे बढ़ा रही है। आप की कोशिश ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने की है। इनमें सबसे अहम दिल्ली है, जहां पार्टी की सरकार भी है। आप के रणनीतिकारों का मानना है कि आप के संसाधनों का सबसे ज्यादा फायदा दिल्ली में मिल सकता है, लेकिन दिल्ली में आप की राह में सबसे बड़ी अड़चन कांग्रेस की तरफ से आ रही है। अगर भाजपा विरोधी वोटों का बंटवारा कांग्रेस व आप के बीच होता है तो दोनों दलों को इसका नुकसान होगा।
आप के रणनीतिकार इसे अपनी सबसे बड़ी चुनौती मान रहे हैं। इसी वजह से पार्टी दिल्ली में कांग्रेस के साथ गठबंधन को तैयार भी हो गई थी, लेकिन गठबंधन को लेकर कांग्रेस का रुख नकारात्मक होने से अभी तक बात नहीं सकी है। खासतौर से कांग्रेस की पंजाब इकाई किसी भी हालत में आप से समझौता करने को तैयार नहीं है। बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी साफ कर दिया था कि कांग्रेस गठबंधन को तैयार नहीं है।
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पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि पार्टी अकेले दम पर मैदान में उतरने को तैयार है। शुरुआती तौर पर रणनीति बनाई गई है कि पूर्ण राज्य के दर्जे को हवा दी जाए। दिल्ली की सभी समस्याओं का समाधान पूर्ण राज्य के दर्जे में दिखाया जाएगा। दूसरी तरफ अभी तक पूर्ण राज्य का दर्जा न मिल पाने के पीछे भाजपा व कांग्रेस का हाथ बताया जाएगा। इसके लिए केंद्र के बीते साढ़े साल के भाजपा के शासन और उससे पहले कांग्रेस के दस साल के शासन पर चर्चा होगी। इस दौरान दिल्ली वालों से आह्वान किया कि अब उनको दिल्ली को पूर्ण स्वराज दिलाने के लिए सड़क पर लड़ाई लड़नी होगी।
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लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी पार्टी दिल्ली के साथ पंजाब, हरियाणा व गोवा में बेहद संजीदगी से अभियान को आगे बढ़ा रही है। आप की कोशिश ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने की है। इनमें सबसे अहम दिल्ली है, जहां पार्टी की सरकार भी है। आप के रणनीतिकारों का मानना है कि आप के संसाधनों का सबसे ज्यादा फायदा दिल्ली में मिल सकता है, लेकिन दिल्ली में आप की राह में सबसे बड़ी अड़चन कांग्रेस की तरफ से आ रही है। अगर भाजपा विरोधी वोटों का बंटवारा कांग्रेस व आप के बीच होता है तो दोनों दलों को इसका नुकसान होगा।
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आप के रणनीतिकार इसे अपनी सबसे बड़ी चुनौती मान रहे हैं। इसी वजह से पार्टी दिल्ली में कांग्रेस के साथ गठबंधन को तैयार भी हो गई थी, लेकिन गठबंधन को लेकर कांग्रेस का रुख नकारात्मक होने से अभी तक बात नहीं सकी है। खासतौर से कांग्रेस की पंजाब इकाई किसी भी हालत में आप से समझौता करने को तैयार नहीं है। बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी साफ कर दिया था कि कांग्रेस गठबंधन को तैयार नहीं है।
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पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि पार्टी अकेले दम पर मैदान में उतरने को तैयार है। शुरुआती तौर पर रणनीति बनाई गई है कि पूर्ण राज्य के दर्जे को हवा दी जाए। दिल्ली की सभी समस्याओं का समाधान पूर्ण राज्य के दर्जे में दिखाया जाएगा। दूसरी तरफ अभी तक पूर्ण राज्य का दर्जा न मिल पाने के पीछे भाजपा व कांग्रेस का हाथ बताया जाएगा। इसके लिए केंद्र के बीते साढ़े साल के भाजपा के शासन और उससे पहले कांग्रेस के दस साल के शासन पर चर्चा होगी। इस दौरान दिल्ली वालों से आह्वान किया कि अब उनको दिल्ली को पूर्ण स्वराज दिलाने के लिए सड़क पर लड़ाई लड़नी होगी।