Delhi: 'आप' का आरोप, कानून विभाग की राय की अवहेलना कर रहे हैं उपराज्यपाल
आम आदमी पार्टी (आप) का कहना है कि कानून विभाग की राय का पूरी तरह से उल्लंघन कर उपराज्यपाल ने मुख्य सचिव के माध्यम से सीधे फाइलें मंगवाई। चुनी हुई सरकार को दरकिनार कर अवैध रूप से अभियोजन प्रतिबंधों को अधिकृत करके इस प्रक्रिया को उलट दिया।
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आम आदमी पार्टी ने उपराज्यपाल पर आपराधिक न्याय प्रणाली को संकट में डालने का आरोप मढ़ा है। साथ ही कहा कि वह कानून विभाग की राय का अवहेलना कर रहे हैं। सीआरपीसी के तहत 7 मामलों में अवैध रूप से अभियोजन प्रतिबंधों की स्वीकृति दी है।
पार्टी का कहना है कि तीन दशकों से अधिक समय से सीआरपीसी की धारा 196 के तहत मुकदमा चलाने की वैध स्वीकृति जारी करने की कार्यकारी शक्तियां पूरी तरह से चुनी हुई सरकार के पास निहित हैं। उपराज्यपाल ने ऐसे प्रतिबंधों को अमान्य कर दिया है, जिससे आरोपी अपराधी मुक्त हो गए हैं। इस धारा के तहत घृणा अपराध, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना, देशद्रोह, राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ना, दुश्मनी को बढ़ावा देने के मामलों में कोई भी अदालत राज्य सरकार की मंजूरी के बाद ही संज्ञान ले सकती है।
यह भी कहा है कि इन सभी मामलों में मंत्री की स्वीकृति ली जानी चाहिए थी। मंत्री की मंजूरी लेने के बाद फाइल एलजी को भेजी जाती। क्या वह इसे भारत के राष्ट्रपति को संदर्भित करना चाहते हैं। इस मामले को लेकर मुख्य सचिव के द्वारा 15 दिसंबर 2022 को नए सिरे से राय लेने के लिए दिल्ली सरकार के कानून विभाग को भेजा गया था। मामले की विस्तार से जांच करने के बाद कानून विभाग ने 3 जनवरी 2023 को अपनी राय दी। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया कि इस कानून में राज्य सरकार का मतलब दिल्ली में चुनी हुई सरकार है।
आरोप: सात मामलों को अवैध रूप से मंजूरी दी
आप का कहना है कि कानून विभाग की राय का पूरी तरह से उल्लंघन कर उपराज्यपाल ने मुख्य सचिव के माध्यम से सीधे फाइलें मंगवाई। चुनी हुई सरकार को दरकिनार कर अवैध रूप से अभियोजन प्रतिबंधों को अधिकृत करके इस प्रक्रिया को उलट दिया। गृह विभाग के रिकॉर्ड से पता चला है कि पिछले कुछ महीनों में अभियोजन प्रतिबंधों के ऐसे 7 मामलों को एलजी ने अवैध रूप से मंजूरी दे दी है। जिसने दिल्ली की आपराधिक न्याय प्रणाली को भारी संकट में डाल दिया है। जबकि लोकतांत्रिक तौर पर चुनी गई सरकार की वास्तविक शक्ति चुने गए लोगों के पास रहनी चाहिए।
आप की नजर में सात मामले
ओंकारेश्वर ठाकुर पर ट्विटर पर मुस्लिम महिलाओं की तस्वीरें नीलाम करने का आरोप।
शेहला राशिद पर ट्विटर पर भारतीय सेना की छवि खराब करने का आरोप।
अभिषेक मिश्रा के ऊपर सोशल मीडिया पर लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने और धर्म के नाम पर दुश्मनी फैलाने का आरोप
9 लोगों को पुरानी दिल्ली के एक मंदिर में पथराव और कांच की बोतलें फेंकने की सलाह दी गई।
जफर इस्लाम खान जिस पर भड़काऊ पोस्ट करने का आरोप है।
ताहिर हुसैन जो कि उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़ी दो घटनाओं में आरोपी है।