संकट की घड़ी में AAP को याद आए अन्ना
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पोस्टर विवाद में फंसी ‘आप’ ने पहली बार किसी आपराधिक मामले में अपनी गलती स्वीकार की है। पार्टी ने इसे एक मानवीय भूल करार देते कहा कि इसके पीछे कोई बदनियती नहीं थी और न ही इसे जानबूझ कर किया गया।
अदालत में ‘आप’ की तरफ से पेश अधिवक्ता ने कहा कि इसमें दिलीप पांडेय की कोई गलती नहीं है। उन्होंने इसका ठीकरा राम कुमार झा व जावेद अहमद के सिर फोड़ दिया।
आप प्रवक्ता दिलीप पांडेय के जेल जाने और दिल्ली उठे विवाद के बीच आप नेताओं को अब अन्ना हजारे की याद आने लगी है।
हर बार बयान पर अड़ी रही AAP लेकिन...
यह पहला आपराधिक मामला है, जिसमें ‘आप’ ने अपनी गलती मानी है। वरना पार्टी ने विभिन्न दलों के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ दिए बयान को कभी भी वापस नहीं लिया। अदालत में पार्टी ने अपने हर कार्य को उचित ठहराने का ही प्रयास किया है।
अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, प्रशांत भूषण, सोमनाथ भारती आदि पर भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन गडकरी, पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, अवतार सिंह भड़ाना आदि ने मानहानि व अन्य मुकदमे दायर कर रखे हैं।
इन सभी ने गलती मानने की अपेक्षा भरी अदालत में अपने बयानों को दोहरा दिया। पोस्टर विवाद ऐसा पहला मामला बन गया है, जिसमें पार्टी ने गलती स्वीकार की।
अब क्यों याद आए अन्ना?
दरअसल, पार्टी को मुस्लिम वोट बैंक खिसकता नजर आ रहा है। यही कारण है कि ‘आप’ कार्यकर्ता अदालत में प्रदर्शन करने से भी गुरेज कर गए। पार्टी की ओर से पेश अधिवक्ता राहुल मेहरा ने कहा कि ‘आप’ किसी समुदाय के खिलाफ नहीं है और न ही शत्रुता पैदा कर उसे तोड़ती है।
पार्टी विभिन्न समुदायों को जोड़ने का काम करती है। लोकसभा चुनाव में पार्टी ने देशभर में चुनाव लड़ा और विभिन्न इलाकों से पोस्टर के डिजाइन पास होने के लिए आते रहे हैं। इसी क्रम में गलती से इन पोस्टरों का डिजाइन पास हो गया।
इतना ही नहीं पार्टी को अब अन्ना आंदोलन की भी याद आ गई। मेहरा ने अदालत को बताया कि उनकी पार्टी के नेता अन्ना आंदोलन से भी जुड़े रहे हैं। लाखों लोग आंदोलन में आए लेकिन कभी भी हिंसा नहीं हुई। राहुल ने माना कि यह मानवीय भूल है और वे स्वीकार करते है कि लापरवाही हुई।