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Delhi NCR News: कार का दरवाजा अचानक खोलने से 90% दिव्यांग हुए युवक को 84.65 लाख का मुआवजा
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रोहिणी कोर्ट के मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने दिया आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। रोहिणी कोर्ट के मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (एमएसीटी) ने सड़क हादसे में 90 प्रतिशत स्थायी दिव्यांग हो चुके 21 वर्षीय युवक को 84.50 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि बिना किसी संकेत के वाहन का दरवाजा खोलना स्वयं में लापरवाही है। इसी कारण हादसा हुआ और नौजवान दिव्यांग हो गया।
पीठासीन अधिकारी पूजा अग्रवाल रोशन कुमार साहू की याचिका पर सुनवाई कर रही थीं। 20 अगस्त 2024 को रोशन अपनी बाइक से बुराड़ी स्थित बैंक जा रहे थे। तभी कार चालक वाहबुद्दीन ने अचानक चालक कार का दरवाजा खोल दिया। दरवाजे से टकराने के कारण साहू गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में उन्हें 90 प्रतिशत स्थायी दिव्यांग हो गए। फैसले में ट्रिब्यूनल ने कहा कि चालक की ओर से न तो पीछे से आ रहे यातायात पर ध्यान दिया गया और न ही कोई चेतावनी दी गई, जिससे उसकी लापरवाही सिद्ध होती है। अदालत ने माना कि दुर्घटना सीधे तौर पर इसी कृत्य का परिणाम थी।
उम्र, आय की संभवाना को देखते हुए सुनाया आदेश
ट्रिब्यूनल ने पीड़ित की उम्र, दिव्यांगता और आय की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए कुल 84.65 लाख रुपये का मुआवजा तय किया। इसमें 64.58 लाख रुपये भविष्य की आय के नुकसान के लिए शामिल हैं। साहू को हादसे के समय स्नातक श्रेणी की न्यूनतम मजदूरी के आधार पर आय का आकलन किया गया। प्रतिवादियों ने याचिकाकर्ता को झूठा फंसाने का दावा किया, लेकिन वे दुर्घटना के तथ्यों को चुनौती नहीं दे सके। ट्रिब्यूनल ने इसे भी चालक की लापरवाही मानते हुए प्रतिवादियों के खिलाफ प्रतिकूल अनुमान लगाया। वाहन बीमित होने के चलते ट्रिब्यूनल ने बीमा कंपनी रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को पूरी मुआवजा राशि जमा करने का निर्देश दिया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। रोहिणी कोर्ट के मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (एमएसीटी) ने सड़क हादसे में 90 प्रतिशत स्थायी दिव्यांग हो चुके 21 वर्षीय युवक को 84.50 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि बिना किसी संकेत के वाहन का दरवाजा खोलना स्वयं में लापरवाही है। इसी कारण हादसा हुआ और नौजवान दिव्यांग हो गया।
पीठासीन अधिकारी पूजा अग्रवाल रोशन कुमार साहू की याचिका पर सुनवाई कर रही थीं। 20 अगस्त 2024 को रोशन अपनी बाइक से बुराड़ी स्थित बैंक जा रहे थे। तभी कार चालक वाहबुद्दीन ने अचानक चालक कार का दरवाजा खोल दिया। दरवाजे से टकराने के कारण साहू गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में उन्हें 90 प्रतिशत स्थायी दिव्यांग हो गए। फैसले में ट्रिब्यूनल ने कहा कि चालक की ओर से न तो पीछे से आ रहे यातायात पर ध्यान दिया गया और न ही कोई चेतावनी दी गई, जिससे उसकी लापरवाही सिद्ध होती है। अदालत ने माना कि दुर्घटना सीधे तौर पर इसी कृत्य का परिणाम थी।
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उम्र, आय की संभवाना को देखते हुए सुनाया आदेश
ट्रिब्यूनल ने पीड़ित की उम्र, दिव्यांगता और आय की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए कुल 84.65 लाख रुपये का मुआवजा तय किया। इसमें 64.58 लाख रुपये भविष्य की आय के नुकसान के लिए शामिल हैं। साहू को हादसे के समय स्नातक श्रेणी की न्यूनतम मजदूरी के आधार पर आय का आकलन किया गया। प्रतिवादियों ने याचिकाकर्ता को झूठा फंसाने का दावा किया, लेकिन वे दुर्घटना के तथ्यों को चुनौती नहीं दे सके। ट्रिब्यूनल ने इसे भी चालक की लापरवाही मानते हुए प्रतिवादियों के खिलाफ प्रतिकूल अनुमान लगाया। वाहन बीमित होने के चलते ट्रिब्यूनल ने बीमा कंपनी रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को पूरी मुआवजा राशि जमा करने का निर्देश दिया।
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