देश में हर दूसरी महिला एनीमिया ग्रस्त: महिलाओं में खून की कमी दूर करेगा एक टीका, अब तक दिए जाते थे पांच-छह डोज
स्वदेशी टीके को भारतीय मूल की महिलाओं में होने वाली एनीमिया की समस्या को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसका ट्रायल भी सफल रहा। पिछले दो साल से एम्स में यह गर्भवती महिलाओं को दिया जा रहा है। इस टीके के परिणाम सुरक्षित और असरदार पाया गया।
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गंभीर एनीमिया की परेशानी से जूझ रही गर्भवती महिलाओं में स्वदेशी टीके का एक डोज ही कारगर होगा। अभी तक ऐसी गंभीर मरीजों के लिए पांच से छह डोज का इंजेक्शन मौजूद था। वहीं समस्या बढ़ने पर ऐसी गर्भवती महिलाओं में खून चढ़ाने की जरूरत पड़ जाती थी।
विशेषज्ञ की माने तो देश में हर दूसरी महिलाओं में एनीमिया की समस्या है। जबकि तीन फीसदी फीसदी महिलाओं में समस्या गंभीर हो जाती है। ऐसी महिलाओं को यदि समय पर इलाज न मिले तो मौत तक हो सकती है। इसे देखते हुए एम्स ने साल 2013 में एक शोध शुरू किया। इस शोध के तहत आईवी (इंट्रावेनस) आयरन इंजेक्शन तैयार किया। यह स्वदेशी टीका एक डोज का है। इसकी मदद से महिलाओं में आयरन की कमी पूरी हो जाती है।
इस शोध के बारे में एम्स के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. कपिल यादव ने बताया कि देश में तीन फीसदी महिलाओं में गंभीर एनीमिया पाया जाता है। ऐसी महिलाओं में ब्लड चढ़ाना पड़ता है या गर्भवती महिलाओं को आयरन के पांच से छह इंजेक्शन देने पड़ते हैं। हर सप्ताह एक इंजेक्शन लगता है लेकिन कई गर्भवती महिलाएं सभी इंजेक्शन नहीं ले पातीं। इन विदेशी फेरी कार्बोक्सीमाल्टोज (एफसीएम) इंजेक्शन को किडनी व कैंसर मरीजों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। इसकी कीमत भी तीन से पांच हजार रुपये होती है।
जबकि स्वदेशी टीके को भारतीय मूल की महिलाओं में होने वाली एनीमिया की समस्या को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसका ट्रायल भी सफल रहा। पिछले दो साल से एम्स में यह गर्भवती महिलाओं को दिया जा रहा है। इस टीके के परिणाम सुरक्षित और असरदार पाया गया।
दाम हुआ सस्ता
डॉ. यादव ने कहा कि देश में हर महिला तक महंगा इंजेक्शन पहुंच पाना मुश्किल है। ऐसे में इस समस्या को देखते हुए मौजूदा इंजेक्शन के मालिक्यूल में थोड़ा बदलाव कर जेनेरिक स्वदेशी इंजेक्शन तैयार किया है। अब इसकी कीमत 300 रुपये तक आ गई है। दाम 10 से 15 गुना तक कम होने के बाद यह आम महिलाओं की पहुंच जाएगी।
एनीमिया मुक्त भारत का बना हिस्सा
डॉ. यादव के अनुसार इस टीके को एनीमिया मुक्त भारत के वर्ष 2024 के निर्देश में शामिल कर लिया गया है। ऐसे में उम्मीद है कि अगले कुछ माह में यह राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत गंभीर एनीमिया से पीड़ित महिलाओं को निशुल्क सुविधा मिलेगी।
- पौष्टिक आहार की कमी
- संक्रमण - टीबी, मलेरिया, व अन्य
- अनुवांशिक - थैलेसीमिया व अन्य
| पीड़ित | फीसदी | हीमोग्लोबिन स्तर |
| गर्भवती महिलाएं | 52.2 | 11 ग्राम प्रति डेसी लीटर |
| गर्भवती महिलाएं | 10-20 | 7 ग्राम प्रति डेसी लीटर से ऊपर |
| गर्भवती महिलाएं | 03 | 7 ग्राम प्रति डेसी लीटर से कम |
खाने से पहले ले आयरन की दवा
सफदरजंग अस्पताल में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की प्रमुख डॉ. बिंदु बजाज ने कहा कि देश में हर दूसरी महिलाओं में खून की कमी पाई जाती है। यह बड़ी समस्या है। इसे रोकने के लिए आयरन की दवा दी जाती है। लेकिन देखा गया है कि महिलाएं दवा लेने में लापरवाही करती है। ऐसे में यह स्वदेशी टीका काफी मददगार होगा।
उनका कहना है कि आयरन की दवा खाना खाने से एक घंटे पहले लेनी चाहिए। इसे नीबू पानी के साथ लेना चाहिए। दूध के साथ नहीं। आयरन की दवा के साथ कैल्शियम की दवा कभी नहीं लेनी चाहिए।