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Delhi NCR News: हरि नगर आश्रम स्कूल के आसपास बनेगा मॉडल सेफ स्कूल जोन
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आर्किटेक्चरल डिजाइन तैयार कराने के लिए परामर्शदाता नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राजधानी में स्कूली बच्चों की सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के हरि नगर आश्रम स्थित सर्वोदय सह-शिक्षा विद्यालय के आसपास के क्षेत्र को मॉडल सेफ स्कूल जोन के रूप में विकसित किया जाएगा। इस परियोजना के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने विस्तृत आर्किटेक्चरल डिजाइन तैयार कराने के लिए परामर्शदाता नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
योजना के तहत स्कूल के दोनों प्रवेश द्वारों और एमजी रोड से जुड़े हिस्से को फिर से डिजाइन किया जाएगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों, अभिभावकों और पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित एवं सुगम आवागमन सुनिश्चित करना है। नई सड़क भारतीय सड़क कांग्रेस (आईआरसी) के मानकों के अनुरूप होगी। इसमें चौड़े फुटपाथ, टेबल-टॉप क्रॉसिंग, विशेष संकेतक, स्ट्रीट फर्नीचर, लैंडस्केपिंग, बेहतर प्रकाश व्यवस्था आदि शामिल होगी। परियोजना में बच्चों को केंद्र में रखकर सड़क डिजाइन तैयार की जाएगी, जिससे वाहन चालकों की गति नियंत्रित हो सके और सड़क पार करना अधिक सुरक्षित बने। चयनित परामर्शदाता मौजूदा स्थिति का आकलन कर प्रारूप तैयार करेगा। पूरी परियोजना के लिए छह माह की समयसीमा निर्धारित की गई है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राजधानी में स्कूली बच्चों की सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के हरि नगर आश्रम स्थित सर्वोदय सह-शिक्षा विद्यालय के आसपास के क्षेत्र को मॉडल सेफ स्कूल जोन के रूप में विकसित किया जाएगा। इस परियोजना के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने विस्तृत आर्किटेक्चरल डिजाइन तैयार कराने के लिए परामर्शदाता नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
योजना के तहत स्कूल के दोनों प्रवेश द्वारों और एमजी रोड से जुड़े हिस्से को फिर से डिजाइन किया जाएगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों, अभिभावकों और पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित एवं सुगम आवागमन सुनिश्चित करना है। नई सड़क भारतीय सड़क कांग्रेस (आईआरसी) के मानकों के अनुरूप होगी। इसमें चौड़े फुटपाथ, टेबल-टॉप क्रॉसिंग, विशेष संकेतक, स्ट्रीट फर्नीचर, लैंडस्केपिंग, बेहतर प्रकाश व्यवस्था आदि शामिल होगी। परियोजना में बच्चों को केंद्र में रखकर सड़क डिजाइन तैयार की जाएगी, जिससे वाहन चालकों की गति नियंत्रित हो सके और सड़क पार करना अधिक सुरक्षित बने। चयनित परामर्शदाता मौजूदा स्थिति का आकलन कर प्रारूप तैयार करेगा। पूरी परियोजना के लिए छह माह की समयसीमा निर्धारित की गई है।
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