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अपनी नींद छोड़ ये हिंदू परिवार करता है ऐसा काम जिससे मुकम्मल हो मुस्लिम भाईयों की नमाज
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 22 Jun 2016 06:46 PM IST
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गुलाब यादव और उनका बेटा अभिषेक
- फोटो : एनडीटीवी
ऐसे समय में जब एक अफवाह पर भीड़ एक आदमी को पीट-पीटकर मार डालती है और कैराना से हिंदुओं के कथित पलायन को लेकर सियासत गरमा जाती है, उस समय में दिल्ली में दिहाड़ी मजदूरी करने वाला एक शख्स है जो गंगा-जमुनी तहजीब को जिंदा रखते हुए हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की नई मिसाल पेश कर रहा है।
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हम बात कर रहे हैं यूपी के आजमगढ़ के गांव मुबारकपुर के मूल निवासी गुलाब यादव की और उसके 12 साल के बेटे की। रमजान के पाक महीने में वो एक ऐसा काम करता है जो रोजा रखने से कम नहीं है। रात के करीब तीन बजे जब सारा गांव सो रहा होता है उस वक्त गुलाब और उसके बेटे अभिषेक पूरे गांव में घूम रहे होते हैं।
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हालांकि इनका काम रात 1 बजे से ही शुरु हो जाता है जो अगले दो घंटे तक चलता है। ये दोनों पूरे गांव में घूमकर यह सुनिश्चित करते हैं कि कोई भी मुस्लिम परिवार सहरी और फज्र की नमाज करने से न चूक जाए। ये दोनों पूरे गांव में घूमकर हर मुस्लिम परिवार को सहरी के लिए जगाते हैं।
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अपने इस काम के बारे में गुलाब कहते हैं कि वह अपने पिता द्वारा चलाई गई 45 साल पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। बता दें कि साल 1975 में उनके पिता चिर्कित यादव ने इसकी शुरुआत की थी।
ये काम कुछ सालों तक उनके बड़े भाई ने भी किया, उनके बाद गुलाब ने इस काम का जिम्मा उठा लिया। गुलाब कहते हैं, 'मुझे लगता है इससे शांति मिलती है। मेरे पिता के बाद, मेरे बड़े भाई ने कुछ वर्षों तक यह काम किया, उनके बाद मैंने यह जिम्मा उठाया और अब मैं हर रमजान यहां लौट आता हूं।'
दिल्ली में दिहाड़ी करने वाले गुलाब का ज्यादातर समय दिल्ली में ही बीतता है लेकिन हर रमजान वो अपने आजमगढ़ स्थित गांव लौट आते हैं।
गुलाब के दोस्त शफीक बताते हैं कि वह मात्र 4 साल के थे जब यह परंपरा शुरु हुई थी। शफीक गुलाब के इस काम की तारीफ में कहते हैं कि 'आप देखिए यह बेहद काबिलेतारीफ काम है। वह पूरे गांव का चक्कर लगाते हैं, इसमें डेढ़ घंटे का वक्त लगता है। इसके बाद वह एक बार फिर पूरे गांव में घूमते हैं। इस तरह वो पक्का करते हैं कि कोई भी सेहरी करने से ना चूके। इससे ज्यादा पवित्र चीज और क्या हो सकती है।'
(साभार- एनडीटीवी)