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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   A day after of Supreme Court ordered Kejriwal violation!

1 दिन बाद केजरीवाल ने किया सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन!

Fri, 15 May 2015 12:23 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 15 May 2015 12:23 AM IST
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A day after of Supreme Court ordered Kejriwal violation!

कहते है कि जब वक्त खराब होता है तो ऊंठ पर बैठे शख्स को भी कुत्ता काट ही लेता है। कुछ ऐसा ही दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के साथ भी हो रहा है। हालांकि सीएम साहब का वक्त खराब है या रणनीति ये कहना फिलहाल जल्दबाजी होगा।

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लेकिन देखा जाए तो केजरीवाल का हर दांव और मोहरा उन पर भारी पड़ रहा है। उनकी हर बाजी का रास्ता विरोधी की जीत तक जा रहा है। जबकि विवाद और हमले उनके और आम आदमी पार्टी के लिए आम हो चले हैं।
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दरअसल आजकल टीवी पर अरविंद केजरीवाल और दिल्ली सरकार की छवि को चमकाने वाले कुछ चुनिंदा विज्ञापन खूब चल रहे हैं। इन विज्ञापनों में केजरीवाल विभिन्न मुद्दों के माध्यम से ये बताते नजर आ रहे हैं कि मौजूदा दिल्ली की सरकार पुरानी सरकारों से कैसे बेहतर है।

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विज्ञापन में क्या कहते हैं केजरीवाल?

A day after of Supreme Court ordered Kejriwal violation!

दिलचस्प बात ये है कि 39 सेंकेड़ के विज्ञापनों से दिल्ली सरकार का प्रचार-प्रसार तो हो रहा है लेकिन इनका असर सीएम साहब की इमेज पर एकदम विपरित और गलत पड़ रहा है। इतना ही नहीं विरोधियों ने इन विज्ञापनों के खर्च और सीएम की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाने भी शुरू कर दिए हैं।

केजरीवाल टीवी विज्ञापन में कहते हैं कि "दोस्तों!बेमौसम बारिश ने किसानों की फसलों को बर्बाद किया, अभी हमारी सरकार ने किसानों को 50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा देने का ऐलान किया है और यह ऐसे समय है जब बाकी सरकारें कहती हैं कि उनके पास पैसा नहीं है।"

दिल्ली सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए केजरीवाल कहते हैं कि "हमारी सरकार के पास पैसा है, क्योंकि हमने भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई है. इससे जो पैसा बचा वो हमने किसानों को मुआवजे में दे दिया"।

ये है सुप्रीम कोर्ट का आदेश

A day after of Supreme Court ordered Kejriwal violation!

दिल्ली सरकार के ये विज्ञापन इसलिए भी विरोधियों के निशाने पर हैं क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के एक अहम फैसले में उपलब्धियों वाले सरकारी विज्ञापनों में सिर्फ प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और चीफ जस्टिस के फोटो ही छापने के आदेश हैं।

इन आदेशों के तहत अब मुख्यमंत्री, राज्यपाल या किसी भी मंत्री और नेता के फोटो नहीं दिए जा सकते, इसके तहत उपलब्धियां गिनाते अब न केंद्रीय मंत्री दिखाई देंगे न ही मुख्यमंत्री। ऐसे में केजरीवाल के इन विज्ञापनों को सुप्रीम कोर्ट की अवमानना भी कहा जा सकता है।

इससे भी चौंकाने वाली बात ये है कि कुमार विश्वास संबंधी मामले के बाद 6 मई को दिल्ली सरकार ने सकुर्लर जारी कर सरकारी अवमानना या छवि खराब होने की संभावना जैसी खबरों पर कार्रवाई के आदेश भी दिए थे। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार के इस फैसले पर रोक भी लगा दी है।

केजरीवाल का दोहरापन

A day after of Supreme Court ordered Kejriwal violation!

मतलब साफ है कि पहले मीडिया पर सर्कुलर जारी करने और फिर मीडिया में विज्ञापन देकर सरकार का प्रचार करने से केजरीवाल की जनता में दोहरी इमेज बन रही है।

हालांकि तीखी आलोचना के एक ओर जहां दिल्ली सरकार की ओर से विज्ञापन बंद करवाने की बात कही गई है। वहीं दूसरी और इन विज्ञापनों का टीवी पर जोरदार प्रसारण हो रहा है।

केजरीवाल के पूर्व सहयोगी प्रशांत भूषण की माने तो इस तरह के विज्ञापन सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अवमानना है औ। वहीं कांग्रेसी नेता अजम माकन का कहना है कि ये पूरी तरह से जनता के पैसे का दुरूपयोग है जिसे विकास कार्यों में खर्च किया जा सकता था। उन्हें उम्मीद है कि कोर्ट जल्द ही इस पर संज्ञान ले सकता है।

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