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शासन को नहीं फिक्र, मेवात में 90% महिलाएं एनीमिक
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Thu, 03 Sep 2015 07:01 PM IST
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मेवात की महिलाओं का दुर्भाग्य कहे या फिर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की लचरता की एनीमिया से प्रभावित किशोरियों और महिलाओं की संया लगातार बढ़ने के बावजूद इनकी सेहत सुरक्षा के लिए शासन और प्रशासन किसी को फिक्र नहीं।
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चिकित्सकों का मानना है कि एनीमिया को मामूली समझने की भूल कदापि ना की जाए क्योंकि यह बीमारी जानलेवा भी हो सकती है।
पता चला है कि मेवात में रहने वाली अधिकांश किशोरियां और महिलाएं इस बीमारी से इस वजह से ग्रस्त हैं, क्योंकि वे समय-समय पर अपने स्वास्थ्य की नियमित जांच नहीं करा रही। ऐसी सूरत में मर्ज लगातार बढ़ रहा है।
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कहने को तो जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा बढ़ा है मगर महिलाओं के कल्याण और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए उठाए गए कदम आज भी नाकाफी हैं और असलियत बहुत कड़वी है।
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सवाल यह है कि देहात में रहने वाली महिलाओं को एनीमिया से छुटकारा कब मिलेगा? कब इस मामले पर स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग जरूरी कदम उठाएंगे और सरकारी तंत्र जागरुकता मुहिम छेड़ेगा।
आखिर कब तक प्रशासन अपनी ओर से हरियाणा सरकार को इस बीमारी से प्रभावित किशोरियों और महिलाओं को लेकर विस्तृत रिपोर्ट बनाकर भेजेगा। सवाल कई हैं मगर जवाब अभी गायब हैं। बात करें जिले में एनीमिया के प्रति जागरुकता की तो यहां पंजीकृत सैंकड़ों सामाजिक संस्थाएं होने के बाजवूद डिब्बा गोल है। इनकी गतिविधियां शून्य हैं।
महिलाओं की स्वास्थ्य सुरक्षा की ओर समुचित ध्यान नहीं दिया जा रहा। स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग गर्भवती महिलाओं को टीकाकरण, आंगनवाड़ी केन्द्रों में गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच जैसे कार्यक्रम चला रहा है मगर इनके समुचित लाभ को परखने के लिए कोई पैमाना निर्धारित नहीं है।
क्या है एनीमिया-
बात एनीमिया बीमारी की करें, तो आयुर्विज्ञान की भाषा में खून की कमी इसका सीधा अर्थ है। 2010 के आंकड़ों के अनुसार मेवात में तीन लाख से अधिक महिलाएं थी। इसी प्रकार किशोरियों की संया भी लाखों में है। 2015 में मौजूदा वक्त मेवात की आबादी 12 लाख का आंकड़ा पार करती नजर आ रही है।
इसमें महिला मतदाताओं और किशोरियों की संया 40 फीसदी से अधिक पहुंच गई है। स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों का कहना है कि मेवात में अधिकांश महिलाएं एनीमिया बीमारी से जूझ रही हैं। एनीमिया बीमारी में हीमोज्लोबिन कम हो जाता है और शारीरिक कमजोरी की शुरूआत हो जाती है।
चिकित्सकों के मुताबिक स्वस्थ पुरुष में 14 से 16 ग्राम जबकि महिला के मामले में यह मात्र 12 से 16 ग्राम होनी चाहिए मगर मेवात में ऐसा नहीं है। यहां यह आंकड़ा 7 से 8 ग्राम तक निकलकर आ रहा है।
क्या है मुख्य वजह-
इसकी मुख्य वजह अधिक श्रम वाले काम कराना, संतुलित भोजन नहीं लेना, जल्दी जागना और पूरी नींद नहीं लेना तथा समय-समय पर शरीर को आराम नहीं देना है।
लक्षण-
शरीर में सूजन, चेहरे पर पीलापन, हर वक्त थकान महसूस होना।
कौन-कौन प्रभावित-
इस बीमारी से हर व्यक्ति प्रभावित हो सकता है। सामान्य दिखने के बावजूद अगर आपका वजन लगातार कम हो रहा है तो अपने स्वास्थ्य की जांच आप भी करा लें। लगातार सिर दर्द आना भी एनीमिया का संकेत हो सकता है। ग्रामीण इलाकों में अधिक मरीज पाए जाते हैं। साफ-सफाई नहीं होने से लोगों के इससे प्रभावित होने की उमीद अधिक होती है। संतुलित भोजन नहीं लिए जाने से किशोरियों में भी यह बीमारी पाई जाती है। गर्भ धारण करने योज्य विवाहित व अविवाहित युवतियों एवं महिलाओं में भी कई बार इसके लक्षण दिखाई दे जाते हैं। गर्भावस्था के दौरान अगर कोई महिला इस बीमारी से ग्रस्त हो जाती है तो उस महिला के अलावा उसके गर्भस्थ शिशु के विकास और स्वास्थ्य पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ता है। चिकित्सक बताते हैं कि 80 फीसदी मामलों में समय से पूर्व डिलीवरी होने का मूल कारण एनीमिया ही होता है। इसकी वजह से गर्भावस्था के दौरान, प्रसूति के वक्त अथवा बाद में भी अधिक रक्त स्राव की घटनाएं भी प्रकाश में आई हैं। प्री टाइम डिलीवरी में एनीमिया से प्रभावित महिला के शिशु की मौत भी हो जाती है। प्रसूति के दौरान मां और बच्चे दोनों की मौत भी हो सकती है।
उपाय-
इस बीमारी से बचाव के लिए प्रभावित पुरुष या महिला को अपने खान-पास और दिनचर्या में बदलाव लाना होगा। वह संतुलित भोजन ले, जिसमें हरे पत्तेदार सब्जी, जैसे पालक, दूध, अंडा, दाल, फसल, चावल, घी, दूध और फलों का सेवन करे। इसके साथ आयरन फोलिक एसिड की गोलियां और आयरन सुकोज के इंजेक्शन भी लिए जा सकते हैं।
इसके बावजूद अगर किसी पुरुष या महिला के शरीर में खून की कमी बनी रहती है, तो उसे दूर करने के लिए ब्लड ट्रांसफ्यूजन का तरीका अपनाया जाता है।
दादी-नानी का आसान नुस्खा-
अगर हर महिला अपने घर में भोजन और विशेष तौर पर सब्जी लोहे की कढ़ाई में पकाना शुरू कर दे तो परिवार के सदस्यों में लौह तत्व की कमी दूर हो जाएगी और खून की कमी की बीमारी दूर होने की संभावना प्रबल हो जाएगी।
किस-किसको खतरा-
एनीमिया बीमारी से सर्वाधिक खतरा हादसे में घायल हुए लोगों, किशोरियों, महिलाओं और कम उम्र के शिशुओं को होता है। ये हाई रिस्क श्रेणी में आते हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से एएनसी यानी एंटी नेटल केयर नाम का एक प्रोग्राम भी चलाया जाता है, जिसमें प्रसूति के दौरान गर्भावस्था से पूर्व महिला के शारीरिक जांच होती है। आंगनवाड़ी केन्द्रों में महिला विकास विभाग और गर्भवती महिलाओं, दूध पिलाने वाली माताओं और किशोरियों के स्वास्थ्य की नियमित जांच के कार्यक्रम चलाता है मगर मेवात में इन कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की स्थिति काफी सोचनीय है। इसी जांच में इन लोगों की रक्तचाप की जांच, शुगर और वजन पर भी निगरानी रखी जाती है। गंभीर बीमारी के लक्षण नजर आने पर उनको नजदीकी पीएचसी, सीएचसी या फिर मेडीकल कालेज भेजा जाता है।
विशेषज्ञ की राय-
मेवात में 90 फीसदी महिलाएं एनीमिया से प्रभावित हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से एनीमिया की जांच और इससे बचाव के लिए लोगों को जागरुक करने के समय-समय पर जरूरी कार्यक्रम चलाकर जागरुकता फैलाई जाती है। उन्होंने कहा कि एनजीओ इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे और यह स्थिति मेवात की महिलाओं के लिए अच्छी नहीं।
- डॉ. इरफान, चिकित्सक, सामान्य अस्पताल नूंह।