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निजता नागरिक का मौलिक अधिकार- जानिए किस जज ने क्या कहा

Fri, 25 Aug 2017 10:54 AM IST
amarujala.com, Presented By: विकास जांगड़ा
amarujala.com, Presented By: विकास जांगड़ा Updated Fri, 25 Aug 2017 10:54 AM IST
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9 member bench of supreme court says right to privacy is fundamental right
supreme court
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों वाली संवैधानिक बेंच ने सर्वसम्मति से निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार बताया, साथ ही बेंच ने ये भी कहा कि निजता की सीमा तय की जा सकती है। जानिए बेंच के किस सदस्य ने निजता पर क्या कहा। 
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जीने और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार अविच्छेद्य हैं। इनके बिना गरिमामय मानवीय अस्तित्व की कल्पना नहीं की जा सकती है। ये संविधान की देन नहीं हैं बल्कि प्राकृतिक अधिकार हैं। जबकि निजता संवैधानिक अधिकार है और मौलिक अधिकारों से पैदा होता है।
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-जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़

पढ़ें:'राइट टू प्राइवेसी' पर SC का बड़ा फैसला, कहा- ये आपका मौलिक अधिकार
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मौैलिक अधिकार हमारी स्वतंत्रता में राज्य की दखलंदाजी को रोकने की एकमात्र दीवार हैं। निजता का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 में प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में समाहित है। इस अधिकार की हर कीमत पर सुरक्षा होनी चाहिए।
- जस्टिस जे चेलमेश्वर

व्यक्ति का अपनी निजी पसंद पर अख्तियार है। संविधान की प्रस्तावना इसकी मूल भावनाओं को दर्शाता है। संविधान की प्रस्तावना में सोच, अभिव्यक्ति, विश्वास, मत और पूजा के अधिकार का जिक्र है। ये मूल्य स्वतंत्रता से संबंधित है। 
-जस्टिस आर एफ नरीमन

सुप्रीम कोर्ट में इससे पहले भी कई मामलों में निजता को मौलिक अधिकार का फैसला दिया जा चुका है कि निजता के अधिकार के बिना बाकी सभी मौलिक अधिकार निरर्थक हैं। हमारे प्राचीन शास्त्रों में भी निजता को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।
- जस्टिस एस ए बोबडे

पढें:'निजता' है मौलिक अधिकार, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर जानिए आए कैसे ‌रिएक्शंस

निजता एक ऐसा अधिकार है जो जन्म से ही व्यक्ति के पास रहता है और उसकी मौत तक साथ रहता है। इसके लिए अमेरिकी अदालतों के फैसलों में जाने की जरूरत नहीं है। इस देश के न्यायालयों ने कई मामलों में निजता को मौलिक अधिकार माना है। 
- जस्टिस एम एम सप्रे

किसी भी शख्स के बारे में जानकारी उसे काबू में करने के लिए इस्तेमाल की जा सकती है। ऐसे में मतभिन्नता की गुंजाइश खत्म हो जाएगी जो लोकतंत्र का मूल सिद्धांत है। ऐसी सूचनाओं की सरकार और गैर सरकारी इकाइयों से रक्षा जरूरी है।
-जस्टिस एस के कौल
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