{"_id":"5f725acf37056542531dbe09","slug":"87-percentage-of-jnu-scholars-are-undergoing-mental-stress","type":"story","status":"publish","title_hn":"शोध में हुआ चौंकाने वाला खुलासा, जेएनयू के 87 फीसदी स्कॉलर्स मानसिक तनाव से गुजर रहे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शोध में हुआ चौंकाने वाला खुलासा, जेएनयू के 87 फीसदी स्कॉलर्स मानसिक तनाव से गुजर रहे
Tue, 29 Sep 2020 03:21 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Tue, 29 Sep 2020 03:21 AM IST
विज्ञापन
jnu
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के 87 फीसदी एमफिल और पीएचडी स्कॉलर्स मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। जबकि 64.7 फीसदी स्कॉलर्स की स्कॉलरशिप तक रूक गई हैं। यह चौंकाने वाला खुलासा जेएनयू के ही तीन रिसर्च स्कॉलर्स द्वारा कोविड-19 के चलते शिक्षण संस्थान बंद होने से एमफिल और पीएचडी स्कॉलर्स की दिक्कतों पर शोध में हुआ है।
विज्ञापन
जेएनयू के इन तीन रिसर्च स्कॉलर्स अलामू आर, सोमाश्री दास और यांगचेन ने कोरोना काल के दौरान छात्रों की स्थिति पर एक ऑनलाइन सर्वे किया है। इसके लिए इन्होंने जेएनयू के ही करीब 530 शोद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। जिसमें से करीब 41.5 फीसदी छात्र और 58.1 फीसदी छात्राएं शामिल हैं। वहीं इस शोध में छात्रों को आ रही परेशानी और उनकी मनोदशा पर सवाल पूछे थे। जिसमें से ज्यादातर ने अपनी मानसिक परिशानियों का हवाला दिया है।
विज्ञापन
प्रति पांच में से 4 के पास अपना रिसर्च वर्क की किताब नहीं
सर्वे में सामने आया है कि प्रति पांच में से चार स्कॉलर्स के पास इस समय रिसर्च वर्क के लिए किताब या संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। जब शिक्षण संस्थान बंद हुए तो वे अपनी किताब, रिसर्च संबंधी अन्य सामान हॉस्टल से नहीं ले जा पाये थे। इस कारण वे पिछले छह महीनों से अपने शोधकार्यों से दूर हैं।
विज्ञापन
87 फीसदी अपने भविष्य को लेकर चिंतित
सर्वे में सामने आया है कि करीब 87 फीसदी छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। शोध कार्य पूरा न होने से स्कॉलरशिप भी रूक गई है। ऐसे में वे अपने खर्चे तक नहीं निकाल पा रहे हैं। एमफिल और पीएचडी की किताब बहुत महंगी मिलती है। ऐसे में वे उन्हें खरीद तक नहीं सकते हैं। क्योंकि घर में भी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है।
अधिकतर छात्र अपने घर लौटे
शोध में दावा किया गया है कि मार्च में ही अधिकतर स्कॉलर्स अपने गांवों को लौट गए थे। महज 13 से 14 फीसदी छात्र ही कैंपस में है। करीब 75.9 फीसदी स्कॉलर्स का कहना है कि वे डिजिटली अपनी थीसिस और शोधकार्य पूरा नहीं कर सकते हैं। करीब दस फीसदी छात्रों ने कहा कि उनके घर में 4 से 6 घंटे बिजली कट होती है। जबकि 38 फीसदी ने कहा कि वे लगातार बिजली कट से परेशान रहे हैं।