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Delhi NCR News: - सिरमौर, हिमाचल प्रदेश के लिए उपयोगी। 82 साल के बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट कर 1.16 करोड़ रुपये ठगने वाले तीन गिरफ्तार
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- दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा से तीनों से कर रही पूछताछ
-एनजीओ के खाते में जमा हुआ था ठगी का पैसा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने 82 साल के बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट कर 1.16 करोड़ रुपये ठगने वाले तीन आरोपियों प्रभाकर कुमार (27), रूपेश कुमार सिंह (37) और देव राज (46) को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने बुजुर्ग को सुरक्षा एजेंसी का अफसर बनकर धमकाया और व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर नकली गिरफ्तारी आदेश दिखाए। डरकर पीड़ित ने आरोपियों को पैसे ट्रांसफर कर दिए थे।
अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त आदित्य गौतम ने बताया कि ठगी गई राशि का एक बड़ा हिस्सा (1.10 करोड़) हिमाचल प्रदेश में स्थित एक एनजीओ के खाते में जमा हुआ था। खाता बिहार के पटना में बैठे ठग संचालित कर रहे थे। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर इस खाते के खिलाफ कुल 32 शिकायतें दर्ज हैं, जिनकी राशि लगभग 24 करोड़ रुपये है। इंस्पेक्टर सुभाष चंद की टीम ने हिमाचल प्रदेश और बिहार के इलाकों में कई छापे मारे, इसमें तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
नालंदा जिले, बिहार का निवासी प्रभाकर कुमार 12वीं पास है। इसने आरोपी देव राज के फोन पर एक मैलिशियस एपीके फाइल इंस्टॉल की, जिससे धोखाधड़ी वाले बैंक खातों से जुड़े सिम कार्ड सक्रिय हो गए। वह व्हाट्सएप वर्चुअल नंबरों के माध्यम से साइबर धोखेबाजों के साथ लगातार संपर्क में रहा। दूसरा वैशाली, बिहार निवासी रूपेश कुमार सिंह स्नातक है। तीसरा जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश का निवासी देव राज 12वीं पास है। इसी ने पिता वेद प्रकाश, जो अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता हैं, की मिलीभगत से एनजीओ के नाम पर एक चालू खाता खोला। आसान पैसे के लिए, उन्होंने बिहार में रूपेश कुमार को अकाउंट सौंप दिया। देवराज ने इंटरनेट बैंकिंग क्रेडेंशियल और किट शेयर करके धोखाधड़ी में मदद की, ट्रांजेक्शन करने के लिए पटना गया और एक बड़ा कमीशन लिया।
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-एनजीओ के खाते में जमा हुआ था ठगी का पैसा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने 82 साल के बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट कर 1.16 करोड़ रुपये ठगने वाले तीन आरोपियों प्रभाकर कुमार (27), रूपेश कुमार सिंह (37) और देव राज (46) को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने बुजुर्ग को सुरक्षा एजेंसी का अफसर बनकर धमकाया और व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर नकली गिरफ्तारी आदेश दिखाए। डरकर पीड़ित ने आरोपियों को पैसे ट्रांसफर कर दिए थे।
अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त आदित्य गौतम ने बताया कि ठगी गई राशि का एक बड़ा हिस्सा (1.10 करोड़) हिमाचल प्रदेश में स्थित एक एनजीओ के खाते में जमा हुआ था। खाता बिहार के पटना में बैठे ठग संचालित कर रहे थे। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर इस खाते के खिलाफ कुल 32 शिकायतें दर्ज हैं, जिनकी राशि लगभग 24 करोड़ रुपये है। इंस्पेक्टर सुभाष चंद की टीम ने हिमाचल प्रदेश और बिहार के इलाकों में कई छापे मारे, इसमें तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
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नालंदा जिले, बिहार का निवासी प्रभाकर कुमार 12वीं पास है। इसने आरोपी देव राज के फोन पर एक मैलिशियस एपीके फाइल इंस्टॉल की, जिससे धोखाधड़ी वाले बैंक खातों से जुड़े सिम कार्ड सक्रिय हो गए। वह व्हाट्सएप वर्चुअल नंबरों के माध्यम से साइबर धोखेबाजों के साथ लगातार संपर्क में रहा। दूसरा वैशाली, बिहार निवासी रूपेश कुमार सिंह स्नातक है। तीसरा जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश का निवासी देव राज 12वीं पास है। इसी ने पिता वेद प्रकाश, जो अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता हैं, की मिलीभगत से एनजीओ के नाम पर एक चालू खाता खोला। आसान पैसे के लिए, उन्होंने बिहार में रूपेश कुमार को अकाउंट सौंप दिया। देवराज ने इंटरनेट बैंकिंग क्रेडेंशियल और किट शेयर करके धोखाधड़ी में मदद की, ट्रांजेक्शन करने के लिए पटना गया और एक बड़ा कमीशन लिया।
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