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Noida : फीस बढ़ोतरी पर जुर्माना लगते ही हरकत में आए 81 स्कूल प्रबंधन, दी पूरी जानकारी

Thu, 27 Apr 2023 05:28 AM IST
दुष्यंत शर्मा संदीप वर्मा, ग्रेटर नोएडा
संदीप वर्मा, ग्रेटर नोएडा Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 27 Apr 2023 05:28 AM IST
सार

बुधवार दोपहर बाद तक 81 स्कूलों ने जिला शुल्क नियामक समिति को विद्यार्थियों की फीस समायोजित करने या वापस करने की पूरी जानकारी उपलब्ध करा दी।

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81 school management came into action as fine imposed in noida
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विस्तार

जिलाधिकारी की अध्यक्षता समिति की ओर से 1 लाख रुपये के जुर्माने की खबर का पता चलते ही एकाएक स्कूलों के प्रबंधक हरकत में आ गए। बुधवार दोपहर बाद तक 81 स्कूलों ने जिला शुल्क नियामक समिति को विद्यार्थियों की फीस समायोजित करने या वापस करने की पूरी जानकारी उपलब्ध करा दी। स्कूल प्रबंधकों ने समिति के सचिव और जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. धर्मवीर को इस बाबत सूचित कर दिया है। देर शाम तक जानकारी देने वाले स्कूलों की संख्या बढ़ती रही। दरअसल, समिति ने मनीही के बावजूद 100 स्कूलों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया था। 

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स्कूलों में मनमानी फीस बढ़ाने का मामला हो, आरटीई का मसला हो या उच्च न्यायालय की ओर से 15 प्रतिशत फीस विद्यार्थियों को लौटाने की बात। जिले के ज्यादातर स्कूल प्रबंधक अपनी मनमानी करते आए हैं। आरटीई के अंतर्गत पिछले आठ वर्षों से स्कूलों ने अभिभावकों और विद्यार्थियों को गेट से लौटाया जा रहा है। कई बार शिक्षा अधिकारियों के कॉल करने के बाद भी स्कूल प्रशासन कार्रवाई नहीं करते। इसका खामियाजा जरूरतमंद बच्चों भुगतना पड़ता रहा है।
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इधर उच्च न्यायालय के 6 जनवरी के आदेश के बाद जिला शुल्क नियामक समिति ने स्कूलाें को विद्यार्थियों की फीस समयोजित करने के लिए निर्देश दिए लेकिन स्कूल प्रबंधनों ने इस पर गौर करना भी मुनासिब नहीं समझा। इसके बाद तारीख पर तारीख पड़ती रही लेकिन कुछ एक स्कूलों को छोड़कर अधिकतर स्कूल प्रबंधनों ने कार्रवाई नहीं की। इस बीच एनसीआर अभिभावक संघ समेत अन्य अभिभावक संगठनों ने जिलाधिकारी कार्यालय, नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट में लगातार प्रदर्शन जारी रखें। जिला प्रशासन प्रदर्शनों काे लगातार संज्ञान लेता रहा।
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अंतत: जिला शुल्क नियामक समिति के अध्यक्षता में जिलाधिकारी समेत समिति ने 100 से अधिक बड़े नामों वाले स्कूलों पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया है। जुर्माने की भनक लगते ही स्कूल प्रबंधक हरकत में आ गए। दोपहर 1 बजे तक लगभग 81 स्कूलों ने बच्चों की फीस समायोजित कर और स्कूल छोड़कर चले गए बच्चों की फीस उनके खाते में देने की जानकारी शुल्क नियामक समिति को भेज दी गई।

क्रिया-प्रतिक्रिया...
स्कूलों पर आर्थिक दंड लगाया जाना अच्छी पहल है। जिन स्कूलों पर कार्रवाई हुई है उनके नाम सार्वजनिक किए जाने चाहिए। यदि एक सप्ताह में स्कूलों की ओर से फीस समायोजित या वापस नहीं की जाती तो अवमानना की कार्रवाई होनी चाहिए। जब तक अभिभावकों को न्याय नहीं मिलता, यह लड़ाई जारी रहेगी। 
- सुखपाल सिंह तूर, संस्थापक एनसीआर पैरेंट्स एसोसिएशन

उच्च न्यायलय के आदेश के अवमानना पर मात्र एक लाख का जुर्माना? जिन 100 स्कूलों पर जुर्माना लगाया गया है उनकी लिस्ट सार्वजनिक की जाए। जिले में 300 से ज्यादा स्कूल हैं, बाकी बचे हुए स्कूलों पर भी कार्रवाई सुनिश्चित हो। 
- मनीष कुमार, अभिभावक

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना करने पर स्कूलों पर लगाए गए जुर्माने की कार्रवाई अधूरी है। जिलाधिकारी से आग्रह है की जुर्माना लगाए गए स्कूलों की सूची सार्वजनिक करें। 15 प्रतिशत फीस वापसी के लिए हमारी लड़ाई जारी रहेगी। 
- हिमांशु अग्रवाल, अभिभावक

दोपहर तक 81 स्कूलों ने विद्यार्थियों के फीस समायोजित करने और स्कूल छोड़ चुके विद्यार्थियों की फीस उनके खाते में देने की जानकारी दी गई है। अनुमान है कि जल्द सभी स्कूल जानकारी दे देंगे।
- डॉ. धर्मवीर सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक

100 स्कूलों पर एक एक लाख का जुर्माना
इससे पहले कोरोना काल में बढ़ाई गई 15 फीसदी फीस नहीं लौटाने/ समायोजित करने वाले जिले के 100 स्कूलों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। जिला शुल्क नियामक समिति के अध्यक्ष जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने बुधवार को यह कार्रवाई की। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी स्कूल प्रबंधक वर्ष 2020-21 के दौरान बढ़ाई गई 15 फीसदी फीस वापसी को लगातार टाल रहे थे। इस मामले में जिलाधिकारी ने स्वयं सज्ञान लेते जुर्माना लगाया है। खास बात यह है कि प्रदेश में पहली बार एकसाथ इतने स्कूलों पर कार्रवाई हुई है।
 
वर्ष 2020-21 में कोरोना काल के दौरान स्कूलों में 15 प्रतिशत फीस बढ़ा दी थी। मामले में उच्च न्यायालय ने 6 जनवरी 2023 को दिए आदेश में प्रदेश के सभी स्कूलों के विद्यार्थियों को 15 प्रतिशत फीस अगले वर्ष में समायोजित करने या स्कूल छोड़ने वाले विद्यार्थियों के खाते में भेजने के आदेश दिए थे। न्यायालय के आदेश पर जिला शुल्क नियामक समिति ने 16 फरवरी तक सभी स्कूलों को 15 प्रतिशत फीस वापस करने के लिए नोटिस दिया था। जिस पर निजी स्कूलों ने कार्रवाई नहीं की। समिति ने दोबारा 25 फरवरी को फीस वापसी का नोटिस देते हुए कार्रवाई की बात कही थी।


इधर लगातार अभिभावकों के प्रदर्शन से जिला शुल्क नियामक समिति की किरकिरी हो रही थी। लगातार नोटिस को नजरअंदाज करने पर 8 अप्रैल को 10 स्कूलों और 15 अप्रैल को सभी स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। कुछ स्कूलों को छोड़कर अन्य ने इसका संज्ञान नहीं लिया। इस मामले में 24 अप्रैल को शुल्क नियामक समिति के अध्यक्ष जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा की अध्यक्षता में बैठक की गई। इसमें सिटी मजिस्ट्रेट धर्मेंद्र सिंह, मुख्य कोषाधिकारी अशोक कुमार, सीए प्रदीप गोयल, सहायक अभियंता शुभम सारस्वत, एमिटी इंटरनेशनल की प्रधानाचार्या रेनू सिंह, अभिभावक प्रशांत सिंह और जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. धर्मवीर सिंह आदि मौजूद रहे। समिति ने स्कूलों की मनमानी पर कार्रवाई का फैसला लिया। 

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