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आठ साल की लड़की से दुष्कर्म की आशंका
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
Updated Sat, 04 Oct 2014 10:48 PM IST
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बच्चों के मामले पर नोएडा पुलिस कितनी सजग है, इसका अंदाजा एक मामले की जांच में उसकी लेटलतीफी से लग जाता है।
आठ साल की बच्ची से दुष्कर्म की आशंका, स्त्री रोग विभाग के डॉक्टर द्वारा बच्ची का इलाज न करने और पुलिस को इसकी सूचना न देने पर चाइल्ड लाइन ने 29 सितंबर को थाना सेक्टर-20 थाना पुलिस से शिकायत की थी, लेकिन अब तक मामले में कोई प्रगति नहीं हुई है। वहीं थाना प्रभारी रीता यादव का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है।
गौरतलब है कि 23 सितंबर को आठ साल की बच्ची जिला अस्पताल के आपातकालीन विभाग में लाई गई थी। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने बताया था कि बच्ची के प्राइवेट पार्ट से रक्तस्राव हो रहा है। डॉक्टर ने खून रोकने का इंजेक्शन लगाकर दुष्कर्म की आशंका जताते हुए बच्ची को महिला विभाग रेफर कर दिया था। परिजनों का आरोप है कि महिला डॉक्टर ने उन्हें यह कहते हुए वहां से भगा दिया कि इसका इलाज यहां नहीं हो सकता। बच्ची को दिल्ली ले जाओ।
चाइल्ड लाइन की नोएडा शाखा के पदाधिकारी सत्य प्रकाश ने बताया कि उनके पास जिला अस्पताल के इमरजेंसी रजिस्टर के उस पन्ने की फोटो भी है, जिसमें बच्ची के प्राइवेट पार्ट से ब्लीडिंग और उसकी मेडिकल रिपोर्ट संबंधी जानकारी है। रक्त स्राव का कारण क्या था, डॉक्टर उसे समझने और बता पाने में असमर्थ रहा। इस संदर्भ में यदि शोषण हुआ तो पोक्सो एक्ट के तहत इसका पता लगाया जाना जरूरी है।
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साथ ही अस्पताल की ओर से यह जानकारी पास के पुलिस स्टेशन के बाल किशोर अधिकारी को देना अनिवार्य था। सीएमएस डॉ. आरएनपी मिश्र का कहना है कि बच्चियों में ऐसी जांच के उपकरण अस्पताल में नहीं है। यह अस्पताल की इलाज व्यवस्थाओं पर एक सवालिया निशान है। इन सभी मामलों की पुलिस को जांच करनी चाहिए।
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आठ साल की बच्ची से दुष्कर्म की आशंका, स्त्री रोग विभाग के डॉक्टर द्वारा बच्ची का इलाज न करने और पुलिस को इसकी सूचना न देने पर चाइल्ड लाइन ने 29 सितंबर को थाना सेक्टर-20 थाना पुलिस से शिकायत की थी, लेकिन अब तक मामले में कोई प्रगति नहीं हुई है। वहीं थाना प्रभारी रीता यादव का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है।
गौरतलब है कि 23 सितंबर को आठ साल की बच्ची जिला अस्पताल के आपातकालीन विभाग में लाई गई थी। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने बताया था कि बच्ची के प्राइवेट पार्ट से रक्तस्राव हो रहा है। डॉक्टर ने खून रोकने का इंजेक्शन लगाकर दुष्कर्म की आशंका जताते हुए बच्ची को महिला विभाग रेफर कर दिया था। परिजनों का आरोप है कि महिला डॉक्टर ने उन्हें यह कहते हुए वहां से भगा दिया कि इसका इलाज यहां नहीं हो सकता। बच्ची को दिल्ली ले जाओ।
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चाइल्ड लाइन की नोएडा शाखा के पदाधिकारी सत्य प्रकाश ने बताया कि उनके पास जिला अस्पताल के इमरजेंसी रजिस्टर के उस पन्ने की फोटो भी है, जिसमें बच्ची के प्राइवेट पार्ट से ब्लीडिंग और उसकी मेडिकल रिपोर्ट संबंधी जानकारी है। रक्त स्राव का कारण क्या था, डॉक्टर उसे समझने और बता पाने में असमर्थ रहा। इस संदर्भ में यदि शोषण हुआ तो पोक्सो एक्ट के तहत इसका पता लगाया जाना जरूरी है।
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साथ ही अस्पताल की ओर से यह जानकारी पास के पुलिस स्टेशन के बाल किशोर अधिकारी को देना अनिवार्य था। सीएमएस डॉ. आरएनपी मिश्र का कहना है कि बच्चियों में ऐसी जांच के उपकरण अस्पताल में नहीं है। यह अस्पताल की इलाज व्यवस्थाओं पर एक सवालिया निशान है। इन सभी मामलों की पुलिस को जांच करनी चाहिए।